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जोधपुर 23 जनवरी को विद्या भारती शिक्षा संस्थान, जोधपुर द्वारा सुभाषचन्द्र बोस जयन्ती के अवसर पर ''नई शिक्षा नीति'' विषय पर गोष्ठी हुई। गोष्ठी में दीप प्रज्वलन के साथ वन्दना एवं अतिथियों का परिचय कराया गया।
गोष्ठी के मुख्य अतिथि जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर के कुलपति डॉ़ रामपाल सिंह ने कहा कि जब हम भारत-केन्द्रित शिक्षा की बात करते हैं तो शिक्षा के उद्देश्य, उसके अनुरूप पाठ्यचर्या, पाठ्यक्रम, शिक्षा पद्घति आदि सभी विचार की परिधि में आ जाते हैं।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए तकनीकी विवि के पूर्व कुलपति डॉ. दामोदर शर्मा ने कहा कि शिक्षा के प्रति भारतीय सोच उसकी स्वायत्तता को लेकर भी है। भारत में शिक्षा का स्वरूप सदैव स्वायत्त रहा है। यह स्वायत्तता आज कैसे प्राप्त की जाए, उसका स्वरूप क्या हो, समाज और सरकार की क्या भूमिका हो आदि बातें विचारणीय हैं।
विद्या भारती के राष्ट्रीय मंत्री श्री अवनीश भटनागर ने नई शिक्षा नीति की चर्चा करते हुए बताया कि शिक्षा व्यक्ति और समाज के विकास से जुड़ी है। वह भविष्य की सम्भावित चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करने के लिये व्यक्ति की क्षमताओं का विस्तार करने की प्रक्रिया है।
ब्रिटिश शासन काल में साम्राज्यवादी हितों की रक्षा और उनके संवर्द्धन के लिए भारत की शिक्षा नीति और व्यवस्था पर विचार किया गया। लगभग सभी ने ब्रिटिश हितों को प्राथमिकता दी तथा उसी के अनुसार शिक्षा व्यवस्था की रचना की। महात्मा गांधी की बुनियादी शिक्षा की कुछ बातों को कुछ संशोधनों के साथ अवश्य सम्मिलित किया गया। आदर्श विद्यामंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष प्रो़ लालसिंह राजपुरोहित ने गोष्ठी में पधारे हुए महानुभावों, शिक्षाविदों, गणमान्य नागरिकों का आभार व्यक्त किया। अंत में वन्देमातरम् का सामूहिक गान हुआ। मंच संचालन पारसमल जैन ने किया। विश्व संवाद केन्द्र, जोधपुर











