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उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ राजनेता, कई बार मुख्यमंत्री और भारत के रक्षामंत्री रहे श्री मुलायम सिंह यादव का यह कहना कि 2 नवम्बर, 1990 में अयोध्या में जो गोलीकांड हुआ उसका हमें खेद है। यह बयान विचारणीय है। उन्होंने शायद यह भी कहा कि हमारे सामने लाचारी थी, कोई विकल्प नहीं था। वे वरिष्ठ हैं, हम उनका आदर करते हैं पर हम यह भी जानते हैं कि वे हनुमान जी के भक्त हैं और गोभक्त हैं, गाय पालते हैं। हमें यह भी मालूम है कि हिन्दी भाषा, भारतीय वेशभूषा-धोती कुर्ते के प्रति इनके मन में स्वाभिमान है। हमारी यह भी धारणा है कि इस देश में अगर विदेशी मूल की महिला प्रधानमंत्री नहीं बन पाईं तो उसका एकमात्र कारण मुलायम सिंह यादव हैं। और शायद मुलायम सिंह जी ही वह व्यक्ति थे जिन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी जी को सलाह दी कि अब्दुल कलाम जैसे देशभक्त को राष्ट्रपति बनाएं। हम मुलायम जी की बातों से परिचित हैं। लेकिन 25 वर्ष बाद उन्होंने खेद व्यक्त किया, हो सकता है उन्हें प्रायश्चित हुआ हो परन्तु वे एक राजनेता भी हैं और राजनेता जब कुछ बोलता है तो उसके जरूर राजनीतिक निहितार्थ होते हैं। मुझे लगता है उनकी बात में कुछ न कुछ राजनीति है, क्या है यह तो उसी क्षेत्र के विशेषज्ञ बता सकते हैं। उनका कहना कि मेरे पास कोई विकल्प नहीं था यह बात तथ्यों से विपरीत है। 2 नवम्बर को दो टोलियों में रामभक्त चले एक का नेतृत्व शायद उमा भारती जी कर रही थीं और विनय कटियार भी। उस समय महंत नृत्य गोपालदास जी के आश्रम से बाहर निकलकर प्रमोदवन होते हुए लखनऊ-गोरखपुर राजमार्ग पकड़ा, उस टोली पर तो कुछ भी नहीं हुआ, कोई गोली नहीं चली। दूसरी टोली राजस्थान के प्रो. महेन्द्र अरोड़ा के नेतृत्व में चली। दिगंबर अखाड़ा होते हुए हनुमानगढी चौराहे की ओर गई। दिगंबर अखाड़े तक भी उस टोली को रोकने की कोशिश नहीं की गई। जब वह दिगंबर अखाड़ा क्रॉस करके एक संकरी जगह पर पहुंची तब छतों से गोली चली। अगर भीड़ को जन्मभूमि की ओर नहीं बढ़़ने देना था, आपको खतरा था कि कुछ गलत काम हो सकता है तो इनको पीछे क्यों नहीं रोका गया। दिगंबर अखाड़े तक क्यों पहुंचने दिया गया। लेकिन जब संकरे क्षेत्र में फंसकर आने-जाने का रास्ता नहीं मिला। तब छतों से फायरिंग हुई। राम कोठारी और शरद कोठारी को तो लाल कोठी के सामने की सड़क की नाली पर गिराकर कनपट्टी पर बंदूक रखकर मारा गया। ऐसे आदेश कहां होते हैं, ऐसे आदेश कहीं नहीं होते। सरकार का तो एक सामान्य आदेश हुआ होगा कि भीड़ अगर नियंत्रण के बाहर हो जाए, कानून व्यवस्था बिगड़े तो फायरिंग कर सकते हैं। यह एकदम सुनियोजित था। उनको बताना पड़ेगा कि आदेश क्या था, इसको रोकने के कई विकल्प थे, खुली जगह पर आंसू गैस के गोले छोड़े जा सकते थे, पानी की बौछार या हवाई फायर से भी लोगों को तितर-बितर किया जा सकता था।
आज भी मुलायम सिंह यादव इस विषय को हल कर सकते हैं। चन्द्रशेखर जी ने प्रधानमंत्री रहते हुए हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच बातचीत करवाई थी। उस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह के साथ मध्यस्थ के रूप में राजस्थान के मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री शरद पवार और गृहराज्यमंत्री सुबोधकांत सहाय ने आधिकारिक रूप से बातचीत करवाई थी। मुलायम सिंह आज भी सक्रिय हैं, उत्तर प्रदेश से हैं। ये जानते हैं कि वार्ता की मेज पर बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी अथवा मुस्लिम पक्ष ने आना बंद कर दिया। अब सब बातंे स्पष्ट हैं मुलायम सिंह यादव का मुस्लिम नेतृत्व से संबंध है। जिन्होंने 15-20 साल तक लखनऊ उच्च न्यायालय में मुकदमा लड़ा वे जफरयाब गिलानी उ.प्र. सरकार में एडिशनल एडवोकेट जनरल हैं, उन्हें समझा सकते हैं कि आप अपना मुकदमा वापस ले लीजिए। अगर मुकदमा वापस ले लिया तो गोली चलवाने में देशभर में प्रसिद्ध हुए मुलायम सिंह यादव इस समस्या के समाधान में भी इतिहास पुरुष बन सकते हैं। ल्ल प्रतिनिधि
जयंती पर नेताजी को याद किया स्वयंसेवकों ने
भुवनेश्वर रा.स्व.संघ भुवनेश्वर महानगर द्वारा उत्कल की पावन माटी के दो सपूतों-नेताजी सुभाषचन्द्र बोस और वीर सुरेन्द्र साय की जयंतियां पूरे उत्साह के साथ मनाई गईं। रा.स्व.संघ की ओर से महानगर के पांच स्थानों में पथ संचलन आयोजित किया गया। अलग-अलग स्थानों से एकत्रित ये पथ संचलन एकमय होकर विशाल आकार में उच्च माध्यमिक बालिका विद्यालय के निकट स्थित मैदान में भव्य जयंती समारोह में परिवर्तित हुए। अतिथियों ने नेताजी व सुरेन्द्र साय के चित्रों पर माल्यार्पण किया। इस अवसर पर नेताजी पर शोध करने वाले एमडी मुश्ताक और आजाद हिन्द फौज से जुड़े हरिबंधु चंपतिराय, दैतारी चंपतिराय आदि के परिवार के सदस्यों को सम्मानित किया गया। रा.स्व.संघ के महानगर संघचालक डॉ. बसंत कुमार पति ने अध्यक्षता की। मुख्यवक्ता रा.स्व.संघ के पूर्व क्षेत्र के प्रचारक प्रदीप जोशी थे। उत्कल विश्वविद्यालय के राजनीति विभाग के पूर्व प्राध्यापक प्रो. सूर्यनारायण मिश्र मुख्य अतिथि व संघ के ओडिशा पूर्व प्रांत के संघचालक समीर कुमार मोहंती विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे। ल्ल प्रतिनिधि











