| दिंनाक: 01 Feb 2016 12:58:39 |
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टिमरनी दुनिया में ऐसा कोई ताला नहीं बना जिसकी चाबी न हो और ऐसी कोई समस्या नहीं जिसका हल न हो। यह बात नागपुर के प्रबंधन गुरु श्री सुमंत टेकाड़े ने टिमरनी में आयोजित भाऊसाहेब भुस्कुटे स्मृति व्याख्यानमाला के 24 वें वार्षिक आयोजन के प्रथम दिन अपने ओजस्वी व्याख्यान में कही । वे 'छत्रपति शिवाजी का व्यवस्था कौशल' विषय पर अपना उद्बोधन दे रहे थे। श्री टेकाड़े ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज के समय जितनी भयंकर परिस्थितियां थीं उतनी उसके पहले या बाद में कभी नहीं रहीं। विरोध करने की किसी की हिम्मत नहीं थी। सारा समाज आत्मगौरव विहीन और आत्मविस्मृत हो चुका था। शिवाजी ने केवल चौदह साल की उम्र में हिन्दवी साम्राज्य की स्थापना का लक्ष्य सामने रखकर जनता में आत्मविश्वास फूंका।
7 लाख की फौज लेकर 27 साल तक औरंगजेब महाराष्ट्र में डटा रहा परन्तु फिर भी शिवाजी को मात नहीं दे सका। श्री टेकाड़े ने कहा कि व्यवस्था कौशल के जिन पांच सूत्रों को शिवाजी ने अपनाया था उनमें कुशल नेतत्ृव, नियोजन, अनुशासन, सही दृष्टिकोण, तथा कम संसाधन में अधिकतम प्राप्ति शामिल हैं। नेतृत्व वही है जो नये नेतृत्व का निर्माण करे। नेतृत्व सदैव प्रभावी होना चाहिए, उसका सूचना तंत्र पक्का होना चाहिए।
नियोजन की चर्चा करते हुए श्री टेकाड़े ने कहा कि 'क्या, किसको, कब, कैसे, और क्यों' इन सब बातों की पूरी योजना लिखित में होनी चाहिए। अपनी ताकत और अपनी कमजोरी की सम्पूर्ण समझ और धोखेबाज की पहचान होनी चाहिए। अनुशासन से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। सबको अपनी-अपनी जिम्मेदारी का भान होना चाहिए। यह सोचने का समय आ गया है कि 'मेरा उत्तरदायित्व क्या है?'
इस सत्र की अध्यक्षता राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त सेवानिवृत्त शिक्षक श्री राजेन्द्र उपाध्याय ने की तथा संचालन श्री अभिजीत गद्रे ने किया। कार्यक्रम में गणेश वंदना स्निग्धा भुस्कुटे एवं साथियों ने की तथा अंत में श्री बसंत सोनी ने आभार व्यक्त किया।
इसी शृखला में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री भागैय्या ने 'एकात्म मानव दर्शन के प्रकाश में ग्राम विकास' विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि टिमरनी जैसे स्वतंत्र और स्वाभिमानी ग्रामों के निर्माण से ही देश का समग्र विकास होगा। परिवार व्यवस्था के महत्व को रेखांकित करते हुए श्री भागैय्या ने कहा कि मनुष्य के नाते जीवन को जीने के संस्कार हमें अपनी कुटुम्ब व्यवस्था से ही प्राप्त होते हैं। प्रकृति के साथ भी हमारे संबंध हैं। प्रकृति हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति करती है, कामनाओं की नहीं इसलिये हमें प्रकृति का पोषण करना चाहिए, शोषण नहीं।
ग्राम विकास में जैविक खाद व गोपालन के महत्व पर श्री भागैया ने कहा कि गोमूत्र भारत के लिये वरदान है। गोमूत्र से कीटनाशक तथा उपयोगी दवाएं बनाई जा सकती हैं। इस संबंध में शोध कार्य की आवश्यकता है। खेती करना परम श्रेष्ठ कार्य है और इसके आधार पर हम गांव में परिवर्तन ला सकते हैं। इसके साथ ही श्री भागैय्या ने स्वास्थ्य के परंपरागत ग्रामीण उपायों और लोककलाओं के संरक्षण और संवर्द्धन पर भी जोर दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ़ अमरदास गुर्जर ने की। वंदेमातरम् के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। ल्ल प्रतिनिधि