| दिंनाक: 25 Jan 2016 14:15:43 |
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'धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष, चारों पुरुषार्थों पर आधारित हिन्दू जीवनदर्शन ही हमें वर्तमान संकट से उबार सकता है। विश्व की समस्याओं का समाधान समाजवाद नहीं, हिन्दुत्ववाद है। हिन्दुत्व एक ऐसा जीवनदर्शन है जो जीवन का विचार सांचे में बंद ढंग से नहीं करता। इस जीवनदर्शन को पुराने निष्प्राण कर्मकांड के साथ जोड़कर हिन्दुत्व के बारे में संभ्रम नहीं करना चाहिए। हिन्दुत्व को वैज्ञानिक प्रगति के विरुद्ध मानना भी गलत है। विज्ञान तथा तंत्रविज्ञान का उपयोग हमारे सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन के अनुरूप रीति से करना चाहिए। हमें राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक एवं सैद्धांतिक अग्रपंक्ति पर यंत्रवाद का सामना करना पड़ेगा।'
—पं. दीनदयाल उपाध्याय, विचार-दर्शन खण्ड-3, पृष्ठ संख्या 58