| दिंनाक: 28 Dec 2015 13:24:04 |
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नई दिल्ली, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने संघ के वरिष्ठ प्रचारक सरदार चिरंजीव सिंह का अभिनंदन करते हुए कहा कि दीपक की तरह संघ के प्रचारक दूसरों के लिए जलकर राह दिखाते हैं। सम्मान आदि से प्रचारक दूर रहना ही पसंद करते हैं। संघ में व्यक्ति के सम्मान की परंपरा नहीं है, किंतु संगठन के लाभ के लिए न चाहते हुए भी सम्मान अर्जित करना पड़ता है।
सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत रा.स्व.संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं वर्तमान में राष्ट्रीय सिख संगत के मुख्य संरक्षक सरदार चिरंजीव सिंह के 85 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर नई दिल्ली स्थित मावलंकर सभागार में आयोजित सत्कार समारोह को संबोधित कर रहे थे।
श्री भागवत ने आगे कहा कि संघ में प्रचारक निकाले नहीं जाते वह अपने मन से बनते हैं। सरदार चिरंजीव सिंह ने ऐसा करके दिखाया। अगर यह परंपरा आगे चलाने की कोशिश हम सभी करें तो किसी भी प्राप्ति से बड़ी खुशी होगी।
इस अवसर पर सरदार चिरंजीव सिंह ने कहा कि संघ में प्रचारक बनने के लिए विशेष प्रयास की आवश्यकता नहीं होती, जैसे परिवार का काम करते हो उसी प्रकार सहज और स्वाभाविक रूप से आप समाज के लिए काम करो। डॉ़ हेडगेवार ने केवल 5 बच्चों को साथ लेकर संघ की स्थापना की थी। यही एक घटना हो सकती है हम सभी के संघ में आने के लिए। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एकमात्र संगठन है जिसमें व्यक्ति सिर्फ देने ही आता है, अपने लिए कुछ मांगता नहीं।
कार्यक्रम की भूमिका प्रस्तुत करते हुए राष्ट्रीय सिख संगत के अध्यक्ष सरदार गुरुचरन संह गिल ने कहा कि सरदार चिरंजीव सिंह ने संघ शाखा से मिले संस्कारों से स्वयं के जीवन को तो विकसित किया ही पवित्र मातृभूमि के लिए भी अपना पूरा जीवन लगा दिया।
उल्लेखनीय है कि सरदार चिरंजीव सिंह 1953 में स्नातक शिक्षा पूर्ण कर 62 वर्ष से संघ के प्रचारक के रूप में विभिन्न संगठनों- विहिप, पंजाब कल्याण फोरम, रा.स्व.संघ के विभिन्न दायित्व व राष्ट्रीय सिख संगत के 12 वर्ष तक राष्ट्रीय अध्यक्ष का दायित्व निभा चुके हैं। वर्तमान में वे राष्ट्रीय सिख संगत के मुख्य संरक्षक हैं।
पंजाब में उग्रवाद के दिनों में जब सामाजिक समरसता की बात कहना दुस्साहस था, तब इन्होंने पंजाब कल्याण फोरम बनाकर सांझीवालता की सोच रखने वाले सिख विद्वानों, गुरुसिख संतों व प्रमुख हस्तियों से निरंतर संवाद बनाये रखकर उग्रवाद से पीडि़त परिवारों को संवेदना व सहयोग प्राप्त करवाया। हरिद्वार से अमृतसर तक निकाली एक हजार संतों की भागीदारी यात्रा से लोगों में व्याप्त भय कम हुआ तथा समरसता का वातावरण बना। 70 व 80 के दशक में पंजाब के तनावपूर्ण वातावरण तथा 1984 में श्रीमती इन्दिरा गांधी की हत्या के बाद चिरंजीव सिंह ने सिख नेताओं और संतों के साथ मिलकर राष्ट्रीय सिख संगत की स्थापना की। 1990 में वह इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष बने।
समारोह का शुभारम्भ गुरु तेगबहादुर पब्लिक स्कूल मॉडल टाउन दिल्ली के छात्रों द्वारा शबद गायन 'देहि शिवा वर मोहि इहे' द्वारा किया गया। कार्यक्रम में सरदार चिरंजीव सिंह द्वारा लिखित पुस्तक का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पर संत बाबा निर्मल सिंह, बाबा बुड्ढा के वंशज, उत्तर क्षेत्र संघचालक डॉ. बजरंगलाल गुप्त, दिल्ली प्रान्त संघचालक श्री कुलभूषण आहूजा और नामधारी मुखी भी मंचस्थ थे।
मंच का संचालन रा.स्व.संघ दिल्ली प्रान्त सह संघचालक श्री आलोक कुमार ने किया। – प्रतिनिधि