मुद्दा/मिशनरी शिकंजा - चीन में हिलने लगी है चर्च की नींव 
August 17, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम Archive

मुद्दा/मिशनरी शिकंजा – चीन में हिलने लगी है चर्च की नींव 

Written byArchiveArchive
Apr 18, 2015, 12:00 am IST
inArchive

दिंनाक: 18 Apr 2015 14:53:53

चीन में बहुराष्ट्रीय कंपनियों की बहुलता वाले पूर्वी हिस्से में बसे एक प्रांत में चीन सरकार चर्च की इमारतें गिराने में जुटी है। एक वर्ष में चर्च की चार सौ इमारतें गिराई जा चुकी हैं। चीन के इस कदम की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीव्र प्रतिक्रिया हुई है। इस संदर्भ में चीन में चर्च का विस्तार करने के लिए पश्चिमी देशों ने किस तरह सुनियोजित प्रणाली बनाई थी, इस पर गौर करना बेहद आवश्यक है। सन् 2008 में अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने जब चीन का दौरा किया था, तब उन्होंने वहां चर्च के विस्तार का आह्वान किया था। आज उस आह्वान का बड़ा असर दिख रहा है। विश्व में जहां जहां पश्चिमी देशों का निवेश है, उन देशों में ऐसी घटनाओं पर नजर डालना आवश्यक हो जाता है।
अपने सिंक्यांग प्रांत, जो पूर्वी किनारे पर बसा है और जहां औद्योगिक क्षेत्र अधिक है, में चर्च की 400 इमारतें चीन ने गिराई हैं, जिसकी चर्चा फिलहाल विश्व के मीडिया में जोर-शोर से जारी है। चीन के इस फैसले का अर्थ केवल इमारतें गिराने तक सीमित नहीं है। वैसे नगरीय इलाकों में बड़े पैमाने पर नियमों का उल्लंघन कर बनाई जाने वाली इमारतें गिराई ही जाती हैं, लेकिन चर्च का मामला भावनाओं से जुड़ा होता है इसलिए उनको गिराने का विषय एकाएक महत्वपूर्ण बन जाता है। विश्व में भी चर्च की इमारतें गिराना ज्ञात इतिहास में बड़ी घटना मानी जाएगी। पश्चिमी देशों के मीडिया ने भी इस विषय को सामने रखते समय शीर्षक दिए-'चीन पर वैश्विक दबाव के चलते चर्च की इमारतें गिराने का काम रोका गया'। चीन में कुल 34 प्रांत हैं। सरकार ने सिंक्यांग में इस कार्रवाई के जरिए करीब 12 अन्य प्रांतों में स्थित चर्च की इमारतें ध्वस्त करने का एक तरह से संकेत दे दिया है। चीन की नजर से इस विषय की ओर देखें तो पिछले 10-12 वषोंर् में चीन में ईसाई समुदाय के संदर्भ में जितनी कार्रवाइयां की गई हैं उनमें यह सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। जहां-जहां बहुराष्ट्रीय कंपनियों को उनके औद्योगिक विस्तार के लिए अनुमति दी गई है ऐसे अधिकांश स्थानों पर यही स्थिति है। चीन सरकार ने इस बारे में जो स्पष्टीकरण दिया है उसमें कहा है कि 'चर्च की ये इमारतें ध्वस्त करने की खबर बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई है। उसका कहना है कि किसी भी शहरी इलाके में गैरकानूनी निर्माण कार्य को ध्वस्त करने का काम किया ही जाता है। इस तरह की अनेक इमारतों पर कार्रवाई की गई है, जिनमें चर्च की ये इमारतें भी शामिल हैं।
वास्तव में पिछले एक वर्ष में चर्च की 400 इमारतें पूर्णत: अथवा आंशिक रूप से गिराई गई हैं और कुछ इमारतों पर से क्रॉस का निशान हटाया गया है। चीन में चर्च की इमारतें अनेक स्थानों पर 5 से 15 मंजिलों तक की हैं। ऐसी इमारतों में करीब 3000 लोग एकसाथ आसानी से बैठ सकते हैं। ऐसी कई इमारतें भूमिगत भी हैं और अनेक ऐसी हैं जो एक तरफ से चर्च लगती हैं तो दूसरी तरफ से कोई बहुमंजिला अपार्टमेंट दिखती हैं।
इमारतें ध्वस्त करने की इस कार्रवाई के पीछे मुख्य कारण यही दिखता है कि पिछले कुछ वर्षों से चीन में चर्च संगठन तथा वहां की सरकार में 'अघोषित युद्ध' जारी है। चीन में ईसाइयों की संख्या 10 करोड़ से ज्यादा होने पर यह मामला शुरू हुआ, क्योंकि चीन में कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों की संख्या 7.5 करोड़ बताते हुए कुछ ईसाई संगठनों ने कहना शुरू कर दिया था कि 'चीन में हम अधिक संख्या में हैं इसलिए हम ही यहां के असली सत्ताधीश हैं।' इस तरह की चर्चा स्थानीय स्तर पर अनौपचारिक वार्ताओं तथा वैश्विक स्तर पर मीडिया में भी शुरू हो चुकी थी। इस बारे में चीन सरकार की ओर से वहां की 'चाइनीज कैथोलिक पेट्रियोटिक एसोसिएशन' के अध्यक्ष बिशप पॉल मेंग क्विंग्लू ने वक्तव्य दिया है। उनके कथनानुसार सरकार ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए चर्च की इमारतें गिराने पर पाबंदी लगाई है। हांगकांग के मिंग पाओ नामक दैनिक में छपे बिशप के साक्षात्कार के आधार पर यह समाचार दिया गया है। चीन सरकार से जारी अपील में हालांकि यह कहा गया है कि यह 'आमतौर' पर की जाने वाली कार्रवाई है। लेकिन एम्नेस्टी इंटरनेशनल संगठन के अनुसार चर्च ध्वस्त करने की यह एक बड़ी कार्रवाई है।
चीन में चर्च की इमारतें ध्वस्त करने के बहाने इस विषय की ओर चीन तथा विश्व की जनता का भी ध्यान आकर्षित हुआ है। इन चर्चों को ध्वस्त न किया जाए, यह मांग करते हुए सैकड़ों लोगों ने 252 दिनों तक संघर्ष चलाए रखा था। लोगों ने चर्च के अंदर ही डेरा जमा रखा था। पिछले वर्ष अप्रैल में चर्च ध्वस्त करने की मुहिम सांजियांग मेगा चर्च इमारत ध्वस्त करने से शुरू हुई थी। इस चर्च के बाहर बड़े पैमाने पर लोग जमा हुए थे। सैकड़ों लोग कह रहे थे कि चर्च की इमारत गिराई तो वे उसके नीचे दब जाने के लिए तैयार हंै। फिर भी चीन सरकार ने यह मुहिम शुरू की एवं उस प्रांत में चर्च की सभी अनधिकृत इमारतें नेस्तोनाबूद करके ही दम लिया।
पिछले कुछ वर्षों में चीन और अमरीका के बीच एक तरफ संबंधों में सुधार हो रहा है तो दूसरी तरफ तनाव भी पैदा हो रहे हैं। 45 वर्ष पूर्व अमरीका के तत्कालीन विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर ने पाकिस्तान से अचानक भूमिगत होकर चीन की मुलाकात की। उसके बाद अमरीका ने बड़े पैमाने पर चीन में आर्थिक निवेश किया। चीन ने इसका पूरा फायदा उठाया। 45 वर्ष पहले विश्व में शीतयुद्ध के चलते सोवियत संघ बनाम अमरीका की स्थिति थी। अमरीका चाहता था कि सोवियत संघ को तोड़ा जाए और विश्व में उसका दूसरा कम्युनिस्ट मित्र देश हो, वहीं चीन को अपनी विशाल दीवार लांघकर दुनिया में एक मित्र देश चाहिए था। खुद माओ त्से तुंग और पूर्व प्रधानमंत्री चाउ एन लाई के समय में उन्होंने अमरीका से मित्रता की और कुछ शुरुआती वर्ष अच्छे भी गए। लेकिन धीरे-धीरे बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रतिनिधि भी चीन में आने लगे। उन कर्मचारियों की सुविधा के लिए छोटे-छोटे चर्च बने और अब 45 वर्ष बाद वहां की सत्ता पर दावा ठोकने का प्रयास जारी है।
चीन को बड़ी तादाद में विदेशी निवेश की आवश्यकता थी। अमरीका के राष्ट्रपति जब भी चीन आते थे तब हर बार वहां चर्च की स्थिति पर चर्चा होती थी। साथ ही यह सलाह भी दी जाती थी कि 'यदि उन्हें उपासना की स्वतंत्रता प्राप्त हो तो चीन की वैश्विक छवि निखारने में वह सहायक होगा। पिछले 25 वर्ष में स्थिति धीरे-धीरे विस्फोटक बनती गई। सन् 2008 में अमरीका के राष्ट्रपति बुश के चीन दौरे के समय चीन सरकार एवं चर्च संगठनों के बीच संघर्ष सड़क तक पहुंच चुका था।
सरकार में पंजीकरण न कराने वाले चचार्ें और भूमिगत चर्च के 700 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था। फिर भी चीन आने पर बुश ने एक अपंजीकृत चर्च में जाने की इच्छा व्यक्त की। वहां की सरकार ने उसे मान्य नहीं किय् ाा इसलिए उन्हें पंजीकृत चर्च में ही जाना पड़ा। लेकिन दो बड़े देशों के प्रमुखों की जब निवेश और आयात-निर्यात पर चर्चा समाप्त हुई तब उन्होंने चीन के तत्कालीन राष्ट्रपति हू जिंताओ से कहा कि चीन में अगर उपासना की स्वतंत्रता हो तो बेहतर होगा। तब जिंताओ ने आश्वासन दिया था कि चीन में स्वतंत्र पांथिक माहौल है। शीघ्र ही उपासना करने वालों को और अधिक खुलापन मिलेगा। चीन सरकार से इतना अच्छा प्रतिसाद मिलने के बाद बुश ने चीन से और एक अपील की और वह यह कि वहां गैर पंजीकृत तथा भूमिगत समझी जाने वाली संस्थाओं का शीघ्रातिशीघ्र पंजीकरण करवाया जाए। इस पर चीन ने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की और अनुमति भी नहीं दी। इसलिए बाद में ओलंपिक्स के उपलक्ष्य में जब बुश का पुन: पूर्व एशिया का दौरा हुआ, तब थाईलैंड में बोलते हुए उन्होंने कहा कि चीन में मौलिक स्वतंत्रता की आवश्यकता है। तथापि, इस पर चीन ने तीव्र प्रतिक्रिया व्यक्त की- 'यह अमरीका द्वारा हमारे अंदरूनी मामलों में दखल है।' फिर भी एक तरफ प्रत्यक्ष व्यवहार में निवेश और बाजार का विस्तार हो रहा था तो वहीं चीन में चर्च संगठनों ने बड़े पैमाने पर काम शुरू कर दिया था। अमरीकी राष्ट्रपतियों ने भी कुछ आंकड़ों के सहारे आलोचना करनी शुरू कर दी कि 'चीन में हर कदम पर मानवाधिकार कानून का हनन हो रहा है'।
पिछले 25 वर्ष में चीन में तेजी से घटने वाली घटनाएं और उनमें अमरीका की भूमिका फिलहाल विश्व में ज्वलंत विषय बना हुआ है। फिर भी पश्चिमी महासत्ताओं ने दुनिया में जहां-जहां निवेश किया है, ऐसे स्थानों पर तथा अन्य स्थानों पर भी चीन में आज घट रहीं घटनाओं जैसा ही माहौल है। जिस देश ने इस बारे में सावधानी बरतने में कोताही की उसे परिणाम भुगतने पड़ते हैं। फिलहाल चीन को अमरीका का बाजार चाहिए, बहुराष्ट्रीय कंपनियों का सहयोग चाहिए इसलिए उसे कभी नरम तो कभी गरम की नीति अपनानी पड़ रही है। जिस कम्युनिस्ट चीन को आज पश्चिमी महासत्ताओं के खाने और दिखाने के अलग अलग दांत दिखने लगे हैं, उसी चीन ने भारत में नागालैंड में चर्च संगठनों की ईसाईकरण करने में मदद की थी। यह बात भी भुलाई नहीं जा सकती।
आमतौर पर विश्व के प्रत्येक देश में ईसाई कन्वर्जन का खतरा बढ़ चुका है। कन्वर्जन से शुरू होने वाला दुष्चक्र राष्ट्रांतरण पर ही पूर्ण होता है। किसी भी देश के राजनीतिज्ञों की एक समान समस्या यह है कि कोई अपने आपको इस मामले में उलझाना नहीं चाहता। लेकिन कोई भी देश ऐसे मामलों की अनदेखी भी नहीं कर सकता। पिछले 60-70 वर्ष में जिन्हें स्वतंत्रता मिली है, ऐसे देशों को भी अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि इस विषय पर किस तरह प्रतिक्रिया करनी है। फिर भी उन्हें इसके परिणामों से तो अवगत होना ही पड़ेगा। इसलिए अगर वे इस समस्या से जूझने वाले अन्य देशों को साथ लेकर इस विषय पर मिलकर काम करें तो तुलनात्मक रूप से मार्ग थोड़ा आसान हो सकता है। -मोरेश्वर जोशी

Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

विभाजन विभीषिका: सिन्धु की भूमि हम क्यों नहीं बचा पाए? भविष्य के लिए क्या सीखना चाहिए?

AI generated image

राशन कार्ड वालों के लिए बड़ी खबर! अब इस तरह मिलेगा राशन का पैसा, eKYC नहीं कराई तो हो सकती है परेशानी

चीनी सैनिकों के भारतीय सीमा में घुसपैठ का वीडियो वायरल: PIB फैक्ट चेक ने बता दी सच्चाई

UP Weather: आने वाले 7 दिनों में ऐसा रहेगा यूपी का मौसम, तेज बारिश-गरज का अलर्ट

AI generated image

क्या रक्षाबंधन सिर्फ भाई-बहन का त्योहार है? जानिए इस पवित्र धागे का असली अर्थ

वंदे मातरम् विवाद: गांधी परिवार और कांग्रेस पार्टी की मुश्किलें बढ़ी

Load More

ताज़ा समाचार

विभाजन विभीषिका: सिन्धु की भूमि हम क्यों नहीं बचा पाए? भविष्य के लिए क्या सीखना चाहिए?

AI generated image

राशन कार्ड वालों के लिए बड़ी खबर! अब इस तरह मिलेगा राशन का पैसा, eKYC नहीं कराई तो हो सकती है परेशानी

चीनी सैनिकों के भारतीय सीमा में घुसपैठ का वीडियो वायरल: PIB फैक्ट चेक ने बता दी सच्चाई

UP Weather: आने वाले 7 दिनों में ऐसा रहेगा यूपी का मौसम, तेज बारिश-गरज का अलर्ट

AI generated image

क्या रक्षाबंधन सिर्फ भाई-बहन का त्योहार है? जानिए इस पवित्र धागे का असली अर्थ

वंदे मातरम् विवाद: गांधी परिवार और कांग्रेस पार्टी की मुश्किलें बढ़ी

UNSC

Explainer: क्यों मायने रखती है UNSC सदस्यता? भारत का अभियान और वैश्विक कूटनीति

उत्तराखंड : अलकनंदा-मंदाकिनी चेतावनी निशान के करीब, गंगा का जलस्तर भी बढ़ा

MP Weather Today

MP Weather: मध्य प्रदेश में फिर बदला मौसम, 3 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी

राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला: स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक, CJP के अभियान के बाद आया आदेश

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies