| दिंनाक: 04 Apr 2015 13:57:36 |
|
किसानों को हर हाल में 30 अप्रैल तक मुआवजा देने के निर्देश
ल्ल पिछले 6 माह और आगामी 6 माह के दौरान बिजली के बिलों में मिलेगी छूट
हरियाणा में बेमौसम की बरसात एवं ओलावृष्टि से किसानों की चिंता बढ़ गई है। वे खेतों में लहलाती फसलों पर अचानक आई आपदा से मायूस हैं। उन्हें डर सता रहा है कि जिस प्रकार मौसम कहर बरपा रहा है, उससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान ही नहीं होगा, बल्कि पेट पालना भी मुश्किल हो जाएगा। इस बरसात से किसानों की गेंहू, जौ, सरसों की फसल व सब्जियां प्रभावित हुई हैं। हालांकि प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को राहत दी गई है। विधानसभा सत्र में भी सभी राजनीतिक दलों ने किसानों की फसलों पर बेमौसमी बरसात और ओलावृष्टि पर चिंता जताते हुए उन्हें पूरी राहत देने की बात कही और गेहूं ही नहीं खेतों में खड़ी सभी प्रकार की फसलों के नुकसान का आकलन करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भाजपा सरकार की किसान हितैषी नीतियों का खुलासा करते हुए कहा कि पूरे राज्य में बिना किसी भेदभाव व क्षेत्रवाद के नुकसान का आकलन किया जाएगा और 31 मार्च तक गिरदावरी पूरी करके 30 अप्रैल तक नुकसान प्रभावित किसानों को उनकी राहत राशि देने का भी वायदा पूरा किया जाएगा। बता दें प्रदेश में सवेर्ेक्षण कर रही अन्य एजेंसियों के साथ हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार एवं गेंहू अनुसंधान निदेशालय करनाल ने भी पूरे प्रदेश में नुकसान का जायजा लिया है। नुकसान के चलते करीब 20 से 25 फीसद तक गेंहू की पैदावार कम होने का अनुमान लगाया गया है।
16 लाख किसान आहत
राज्य में करीब 24़ 78 लाख हेक्टेयर भूमि में गेंहू, 6 लाख हेक्टेयर में सरसों, हजारों हेक्टेयर में सब्जियों की फसल लहलहा रही थी, लेकिन फरवरी से मार्च के बीच विभिन्न चरणों में हुई बरसात ने किसानों की कमर ही तोड़ दी है। इस बरसात व ओलावृष्टि से करीब 25 फीसद से भी अधिक फसलों पर कुप्रभाव पड़ा है और अभी भी मौसम खुशगवार नहीं हुआ है। मौसम विभाग आगामी दिनों में भी मौसम खराब रहने की आशंका जता रहा है और इससे गेंहू, चना सरसों व सब्जियों की फसलों को और भी नुकसान होने की संभावना है। कई जगह तो आहत किसानों द्वारा पूरी तरह खराब हुई फसलों पर ट्रैक्टर चलाने की बात भी सामने आई है, जिन्हें राहत देने की जरूरत है। रेवाड़ी कोसली के ये इलाके हैं, जहां गेंहू, जौ व सरसों की फसलें लगभग 90 फीसद बर्बाद हो चुकी हैं। कृषि विभाग के अनुसार राज्य में इस बार 24़ 78 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेंहू की फसल खड़ी है जिससे 114 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन अब यह अनुमान पूरा होना संभव नहीं है और अपेक्षा के अनुसार यह काफी घट सकता है। आंकड़ों के अनुसार हरियाणा में 35 लाख हेक्टेयर भूमि पर खेती होती है, और आपदा से राज्य में 19़ 20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों को नुकसान पहुंचा है। इससे राज्य के करीब 16 लाख किसान भयभीत हैं।
सरकार किसानों को हरसंभव मदद देगी
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा है कि उनकी सरकार किसानों को हरसंभव मदद देगी, जिसका प्रारूप तैयार है और किसानों को उनकी राहत राशि भी तय समय सीमा के अंदर पहुंचा दी जाएगी। प्रदेश सरकार ने संज्ञान लेते हुए पैमाना तैयार किया है, जिसके अनुसार जिन किसानों की फसलें खराब हुई हंै, उन्हें पिछले 6 माह और आगामी 6 माह के दौरान बिजली के बिलों में छूट मिलेगी। जो किसान पिछला बिल भर चुके हैं, उन्हें आगे के बिलों में राहत दी जाएगी। जिन किसानों की फसलों को 25 से 51 फीसद तक नुकसान हुआ है, उन्हें बिजली के बिलों में 50 फीसद और जिनकी फसलों में 51 से 100 फीसद नुकसान हुआ है, उन्हें बिल में सौ फीसद छूट दी जाएगी। इसके अलावा किसानों द्वारा लिए गए ऋण की अदायगी भी सुनिश्चित होगी। जिसके अनुसार लघु अवधि ऋण को अगले तीन साल के लिए पुन: लागू करते हुए ब्याज मुक्त कर दिया गया है। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से नुकसान की भरपाई के लिए 500 करोड़ रुपए की अंतरिम राहत मांगी है। उन्होंने राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, वित्त सहित सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को इसके लिए निर्देश दिए हैं, ताकि किसानों को हर हाल में 30 अप्रैल तक मुआवजा मिल जाए।
फसल बीमा योजना रहेगी लाभकारी
गत दिनों हरियाणा के गुड़गांव में तीन दिवसीय 'एग्रो लीडरशिप समिट -2015' का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि रहे राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने स्पष्ट किया कि हरियाणा दूसरे क्षेत्रों की तरह कृषि क्षेत्र में भी अग्रणी होगा और खुशहाल बनेगा। इस अवसर पर कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ ने बताया कि आगामी वर्ष से हरियाणा में जिलेवार कृषि सम्मेलन होंगे। ल्ल गणेश दत्त वत्स