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सबको एक साथ लेकर चलने का आह्वान
.अंक संदर्भ: 7 दिसम्बर, 2014
आवरण कथा 'हिन्दू धर्म मानवता मर्म' विश्व के सभी हिन्दुओं को एकजुट करने का एक आह्वान है। आज यह स्पष्ट हो चुका है कि हिन्दुत्व ही संपूर्ण विश्व को एक दिशा दिखा सकता है। धर्म संस्कार एवं मानवता को संजोए हिन्दुत्व विश्व के लिए एक उदाहरण के रूप में है। जिस प्रकार आज पूरे विश्व में कोहराम मचा हुआ है, ऐसे में इसका उपाय सिर्फ हिन्दुत्व और सनातन व्यवस्था में ही निहित है।
—हरिहर सिंह चौहान
जंबरीबाग नसिया(म.प्र.)
ङ्म दशकों तक सत्ता के सिंहासन पर विराजमान रहे दलों ने कभी भी हिन्दुत्व और हिन्दुओं को प्राथमिकता नहीं दी। जिसने जब पाया तब उसपर प्रहार किया और उसे नष्ट करने की कुचेष्ठा की। दलों ने हिन्दुओं को वोट बैंक के रूप में चिन्हित करके आपस में जात-पात में बांट दिया और आपस में लड़ाकर उसका राजनीतिक फायदा लिया। हिन्दुओं को संगठित करने का प्रयास किसी ने नहीं किया। लेकिन आज वह समय है, जब हम संपूर्ण देश के हिन्दुओं को संगठित करके उनको अधिकार दिला सकते हैं।
—शान्ति रानी साहा
कटिहार(बिहार)
ङ्म सम्मान-समानता,पवित्रता व हिन्दुत्व ही भारतीयता की पहचान रही है। इस तरह के सम्मेलन विश्व पटल पर भी आयोजित होने चाहिएं। दुख की बात है कि आज तक देश के नेताओं को स्वयं हिन्दू कहने में शर्म महसूस हुई है। अपने को सेकुलर दिखाना और देशविरोधी षड्यंत्रों में शामिल रहना यहां के दलीय नेताओं का भाव रहा है। लेकिन अब समय बदला है। आज जिस कामना को लेकर देश की जनता ने केन्द्र की सरकार बनाई है उसका असर पूरे देश में स्पष्ट तौर से देखा जा सकता है।
—जमालपुरकर गंगाधर
जियागुडा (तेलंगाना)
देश के लिए समस्या
आज विदेशों में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है,यह किसी से भी छिपा नहीं है। लेकिन देश के अंदर होती कुछ घटनाओं के चलते देश का मान अंदर और बाहर घटा है, जिसके कई हानिकारक परिणाम प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से देखने का मिले हैं। साथ ही सरकार के विकास की ओर बढ़ते कदम को मुसलमानों की दु्रतगति से बढ़ती हुई आबादी ने रोक रखा है। सरकार को चाहिए कि इस प्रकार की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करे क्योंकि यह समस्या छोटी नहीं हैं बल्कि आगे चलकर यह देश पर बोझ बनती है और विकास की गति को मंद करती हैं।
—विजय कृष्ण प्रकाश हरिपुर,वैशाली(बिहार)
जागरूक करने का कार्य
वैसे तो छत्रपति शिवाजी के बारे में पढ़ा था लेकिन उनके सुपुत्र संभाजी के बारे में कहीं भी नहीं पढ़ा था। पत्र ने संभाजी के जीवन संघर्ष तथा हिन्दू धर्म के लिए उनके बलिदान को समाज तक पहुंचाकर एक अद्वितीय कार्य किया है। इस प्रकार के प्रसंगों से पाठकों को अपने स्वर्णिम इतिहास के बारे में जानकारी होती रहती है, साथ ही गर्व भी होता है कि हमारे पूर्वजों ने देश और धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुती देनी स्वीकार की परंतु झुकना स्वीकार नहीं किया। ऐसे लेखों को स्थान देने के लिए पत्र को हृदय से धन्यवाद।
—नोजी देवी बेनीवाल वेडि़या,जालौर(राज.)
घर वापसी पर हंगामा क्यों ?
आगरा में हुई घर वापसी पर विपक्ष जिस प्रकार से निरर्थक हंगामा खड़ा कर रहा है, वह एक षड्यंत्र से प्रेरित है। विपक्ष चाहता है कि इस शोरगुल में इस कुचक्र का जो सच है वह देश व जनता के सामने न आ पाए। दशकों से देश के कई राज्यों में हिन्दुओं को लालच और हथियार के बल पर मतांतरण कराया गया , लेकिन तब किसी का भी ध्यान उस ओर क्यों नहीं गया? लेकिन जब उन्हीं में से कुछ हिन्दुओं को अपने मूल गृह में वापस लाने के प्रयास हो रहे हैं तो इनको दर्द हो रहा है। असल में सेकुलर दल जनता को दिग्भ्रमित करना चाहते हैं, जो इनका प्रमुख उद्देश्य है।
—उमेदुलाल 'उमंग'
ग्राम पटूडी, टिहरी गढ़वाल(उत्तराखंड)
सुरक्षा नीति की ओर हो ध्यान
देश की दूरगामी बाह्य एवं आंतरिक सुरक्षा हेतु अफगानिस्तान में सतत सकारात्मक भूमिका की अति आवश्यकता है। भूमिका निर्वहन में सुगमता के लिए भारत का समुद्री मार्ग से होते हुए थल मार्ग द्वारा अफगानिस्तान में परिवहन महत्वपूर्ण है। इसके लिए भारत को पाकिस्तान के बलूचिस्तान या ईरान के बलूच बाहुल्य क्षेत्र से सड़क मार्ग का प्रयत्न अवश्यमभावी है। क्योंकि चीन के रेल मार्ग द्वारा काबुल पहुंचने से पहले भारत को सड़क मार्ग द्वारा काबुल पहुंचना दूरदर्शिता पूर्ण कदम होगा।
—प्रो.शिव प्रताप सिंह
पन्ना लाल पार्क,उन्नाव(उ.प्र.)
उन्मादियों का आतंक
वर्तमान में दिल्ली के कई सार्वजनिक स्थानों पर मुसलमानों द्वारा जबरन कब्जा कर लिया गया है। उन्होंने यहां रह रहे हिन्दुओं को प्रताडि़त कर इन स्थानों से खदेड़ दिया और जो यहां किसी प्रकार रह भी रहे हैं वे बड़ी ही कठिन परिस्थिति में रह रहे हैं। प्रत्येक समय तनाव बना रहता है। बच्चों के खेलने वाले मैदानों में उन्मादी जबरन नमाज अदा करने लगते हैं। सरकार व स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि वह इस प्रकार की गतिविधियों पर तत्काल लगाम लगाये क्योंकि कभी-कभी इस प्रकार की घटनाएं बड़ा रूप ले लेती हैं।
—बी.एल.सचदेवा
आईएनए बाजार(दिल्ली)
कब मिलेगी मुक्ति!
आज हम देखते हैं कि देश में सिर्फ एक ही खेल को महत्ता दी जाती है। उसके सामने सभी दोयम दर्जे के हो जाते हैं। जबकि सभी को पता है कि यह हमारा खेल नहीं है। फिर भी हम उसी के पीछे भागते हैं। असल में उसके पीछे एक षड्यंत्र काम कर रहा होता है। विदेशी कंपनी इसकी आड़ में देश में पता नहीं क्या-क्या बेच जाती हैं और हम उसे बड़े चाव से अपनाते और प्रयोग करते हैं। यह सिर्फ इसलिए क्योंकि हमारे चहेते क्रिकेटर इसका प्रचार-प्रसार कर रहे होते हैं। केन्द्र सरकार को चाहिए कि देश के सुदूर क्षेत्रों में खेले जाने वाले खेलों को मंच उपलब्ध कराये ताकि उन स्थानों से भी वही प्रतिभा निकलकर आए जो आज क्रिकेट में है। क्योंकि उचित मंच के अभाव में इन प्रतिभाशाली खिलाडि़यों की प्रतिभा निखर ही नहीं पाती और वहीं पर कुंठित होकर समाप्त हो जाती है।
—राम प्रताप सक्सेना
खटीमा,ऊधमसिंह नगर(उत्तराखंड)
राहुल की खीज
आज जब पूरा देश भगवा रंग में रंगा है तो राहुल गांधी की खीज स्वाभाविक है। अपने भाषणों में वह इस खीज को जाहिर भी कर रहे हैं। आज तक ईसाई मिशनरियों के लिए अमृत का कलश रहे राहुल जब कुछ नहीं कर पा रहे हैं तो देश के हिन्दुओं को तोड़ने के लिए बरगला रहे हैं। लेकिन देश के हिन्दुओं को अब सब समझ में आने लगा है कि कौन इस देश का रक्षक है और कौन भक्षक।
—डॉ. रजनीश दीक्षित
राजाजीपुरम,लखनऊ (उ.प्र.)
वामपंथियों की असलियत
देश के लोग वामपंथियों की असलियत को देख रहे हैं। इनके लिए हिन्दुओं का अपमान और मानमर्दन करना इनकी राजनीतिक यात्रा का उद्देश्य है। भारतीय अस्मिताओं और संस्कृति को झूठा सिद्ध करना और इसके बदले वोट की राजनीति करना इनका मकसद है।
—भवेश मरोलिया
दुर्गा कॉलोनी,सादुलपुर-चूरू(राज.)
लूट जारी है…
ईसाई मिशनरियों द्वारा पूरे भारत में छल,कपट,भय,लोभ-लालच द्वारा हिन्दुओं का मतांतरण किया जाता हैं। जिस बल पर वह हिन्दुओं को ईसाई बनाते है,उसके कुुछ दिन बाद ही वह हिन्दू से ईसाई बने परिवारों को उनके हाल में छोड़ देते हैं। जिसके बाद वह न तो हिन्दू रहते हैं और न ही ईसाई बनने से उन्हें कोई फायदा होता है। उ.प्र. के सहारनपुर में इस प्रकार का खेल ईसाई मिशनरियों द्वारा खूब खेला जा रहा है।
—डॉ. सुशील गुप्ता, सहारनपुर(उ.प्र.)
कब मिलेगी मुक्ति
एलोपैथी दवाओं की विषाक्तता से असंख्य लोग प्रतिदिन बेहाल हो रहे हैं। जिसके उदाहरण हम समय-समय पर देखते रहे हैं। सवाल है कि जिस देश की प्रमुख चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद है वहां इस पद्धति को क्यों पालापोसा जा रहा है। आखिर कब जनता को इस विषाक्तता से मुक्ति मिलेगी?
—डॉ. प्रणव कुमार बनर्जी
मंडी मार्ग,पेण्ड्रा, बिलासपुर(छ.ग.)
वामपंथी कुचक्र
देश के कई राज्यों में वामपंथी अपने षड्यंत्रों से भारतमाता के आंचल को रक्तरंजित कर रहे हैं। राष्ट्र व समाज में यह खुलेआम जहर घोलने का काम करते हैं। पूर्वोत्तर के राज्यों में इनका आतंक खुलेआम देखा जा सकता है। आए दिन कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा इन राज्यों में आतंक मचाया जाता है और यहां तक कि उन लोगों की हत्या कर दी जाती है जो देश व समाज प्रेम की बात करते हैं।
—हरिओम जोशी चतुर्वेदी नगर,भिण्ड(म.प्र.)
गोहत्या बंद हो
उत्तर प्रदेश में देखा जाए तो शायद ही ऐसा कोई जिला होगा जहां गोतस्करी या गोहत्या नहीं होती हो। जब से समाजवादी पार्टी की सरकार प्रदेश में बनी है तब से इस कार्य में बढ़ोतरी हुई है। पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाकर यह इस प्रकार के कार्यों को करवाते हैं और पुलिस सब जानकर भी मूक दर्शक बनी रहती है।
—निशीत कुमार वर्मा
मोहनलालगंज, लखनऊ(उ.प्र.)
इसके पीछे कहीं न कहीं मुसलमानों को सपा के नेताओं का घोषित या अघोषित वरदहस्त रहता है। जिसके चलते वह खुलेआम गोतस्करी के कार्यों को अंजाम देते हैं।
प्राणपण से प्रयासरत मोदी
आज का वातावरण स्वत: ही सुखद प्रतीत होने लगा है क्योंकि हमारे पूर्वजों की दृष्टि के अनुरूप परिवर्तन एवं समर्पण भाव से उसे पूर्ण करने की लालसा लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी प्राणपण से प्रयासरत हैं। सम्पूर्ण विश्व जानता है कि भारतवर्ष विश्वगुरु एवं सोेने की चिडि़या था। समय-काल एवं कुछ कुचक्रों के चलते भारत उस स्थिति में नहीं है,जिस स्थिति में आज उसको होना चाहिए था। स्वतंत्रता के पूर्व एवं बाद में बड़ी संख्या में ऐसे तथाकथित देशद्रोही लोग तैयार हो गए जिनका केवल और केवल कार्य भारतीय संस्कृति को विकृत करना एवं विदेशी सभ्यता को यहां थोपना था। यहां की सदियों से चली आ रही परम्पराओं और धार्मिक रीति-रिवाजों को ढकोसला साबित कर बदनाम करना इनका प्रमुख उद्देश्य था और काफी हद तक वे इस कार्य में सफल भी हुए। इस कार्य में इनका साथ दूसरे देश के लोग नहीं बल्कि अपने ही देश के कुछ देशद्रोही लोग दे रहे थे। साथ ही यहां की पिछली सरकारें इनके कुचक्रों को हवा देती रहीं। पर अब समय बदला है। भारत के लोगों को इस समय की लंबे समय से प्रतीक्षा थी। नई सरकार को इस महत्वपूर्ण समय में भारत का उत्थान कर उसको पुन: उसी स्थान पर आरूढ़ करने का प्रयास करना होगा जहां पर यह कभी हुआ करता था। भारत की प्रमुख पहचान हिन्दू है और इसका पूरा ध्यान रखना इस सरकार का प्रमुख दायित्व है,क्योंकि इसको सहेजने से भारत की सांस्कृतिक,सामाजिक,पौराणिक व्यवस्था अपने आप में मजबूत होगी और विश्व में भारत का सम्मान स्वत: ही बढ़ेगा।
—ओमहरित
ग्राम व पोस्ट-फागी,
जिला-जयपुर(राज.)
घोटाले की आंच
दरवाजे तक आ गयी, घोटाले की आंच
ममता दीदी हैं दुखी, कैसे रोकें जांच।
कैसे रोकें जांच, न जाने किसका नंबर
आये अबकी बार और हो जाए अंदर।
कह 'प्रशांत' तृणमूलों की बाजी पलटेगी
ममता की दीदीगिरी जल्दी निबटेगी॥
—प्रशांत











