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श्री दीनदयाल उपाध्याय का उद्घाटन भाषण
पिलानी। 'शायद कुछ लोग कहें कि मैं संकट को अनावश्यक रूप से बढ़ा रहा हूं, किन्तु मुझे विश्वास है कि मेरे इन शब्दों में सभी राष्ट्रहितैषियों की भावनाएं व्यक्त हो रही हैं। राज्य पुनर्गठन आयोग की जो प्रतिक्रिया आज देशभर में प्रकट हुई है, उसमें भारत के पूर्ण विघटन के, खंड-खंड होने के विष बीज विद्यमान हैं जिनकी उपेक्षा नहीं की जा सकती।' ये शब्द शेखावाटी जनपद जनसंघ के द्विदिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए अखिल भारतीय जनसंघ के महामंत्री पं. दीनदयालजी उपाध्याय ने कहे। शेखावाटी, सीकर व झुनझुनू जिले की तहसीलों के सभी प्रतिनिधि इस कार्यक्रम में उपस्थित थे। इस अवसर पर जनसंघ नेता का भव्य स्वागत किया गया और एक विशाल जुलूस का भी आयोजन किया गया।
पं. उपाध्याय ने आगे कहा- 'ढाई वर्ष पूर्व श्रीनगर में एक आवाज उठी, कश्मीर कश्मीरियों के लिए, सारे देश ने उस राष्ट्रविरोधी नारे का विरोध किया और उस नारे को बुलन्द करने वाला शेख अब्दुल्ला सीखचों के पीछे बन्द कर दिया गया। आज जनता के तथाकथित नेता ही, बंगाल बंगालियों का है, बिहार बिहारियों का है, उड़ीसा में उडि़या लोग ही रहें आदि नारे लगाते दिखाई दे रहे हैं। राज्य पुनर्गठन आयोग की रिपोर्ट क्या आई, उसने देश के अनेकानेक जननेताओं को चौराहे पर नंगा लाकर खड़ा कर दिया है और प्रकट कर दिया है कि राष्ट्रीयता के बाह्य आवरण में अधिकांश स्थानों पर घोर संकुचित प्रांतीयता और क्षेत्रीयता ही वास कर रही है। राजाओं – महाराजाओं को प्रतिक्रियावादी कहा जाता था, किन्तु एक ओर तो इन राजाओं ने पीढ़ी दर पीढ़ी से प्राप्त अपने शासनाधिकार को युग की आवश्यकताओं को समझकर त्याग दिया और दूसरी ओर 7-8 वर्षों के रसास्वादन से ही आज के नेताओं में इतना मोह पैदा हो गया है कि वे अपनी कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं। दिल्ली व हिमाचल प्रदेश में आह्वान हो रहा है कि अपने राज्यों की रक्षा के लिए खड़े हो जाओ। कैसी विडंबना है। एक अजीब जोश व खरोश चारों ओर दिखाई दे रहा है। बंबई व रीवा की शर्मनाक घटनाओं की ओर कोई भी विचारशील व्यक्ति दुर्लक्ष्य नहीं कर सकता।' भारतीय जनसंघ का यह निश्चित मत है कि भारत की आंतरिक एकता की अभिव्यक्ति राजनीतिक क्षेत्र में भी होनी आवश्यक है और देश में वर्तमान संघात्मक राज्य-पद्धति के स्थान पर एकात्मक शासन व्यवस्था होनी चाहिए।…
छल-बल से कश्मीर हड़पने की पाक-योजनाएं
कश्मीरियों के प्रश्न को लेकर कराची में एक सर्वदलीय सम्मेलन का आयोजन हुआ था। इस सम्मेलन के निमित्त विभिन्न क्षेत्रों से पाक-सरकार को पत्र प्राप्त हुए थे, जिनमें कश्मीर की स्वतंत्रता के लिए हमला कर देने की सलाह दी गयी थी और उस निमित्त सेवाएं भी अर्पित की गयी थीं। पत्र गुप्त थे। किन्तु पाक-सरकार जनभावना का हनन क्यों करने लगी इसलिए उन्होंने पत्रों में प्रकाशित भी करा दिया।
सम्मेलन के अन्त में पाक-प्रधानमंत्री चौधरी मोहम्मद अली ने जोरदार शब्दों में कहा, 'पाक-सरकार सम्पूर्ण कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाने के लिए कोई कदम उठा न रखेगी।' विश्वस्त सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि पाक-सरकार ने भारत के प्रति जो लड़ाकू रुख अपनाया है उसका कारण विदेशी शक्तियों का प्रोत्साहन है। इस प्रकार को भी खबर है कि पाकिस्तान कश्मीर में आक्रमण करने की अंदर ही अंदर तैयारी कर रहा है।
बताया जाता है कि भूतपूर्व पाक-सरकार द्वारा कश्मीर के संबंध जो नीति अपनायी गयी थी उसे अमरीका मान्यता प्रदान नहीं कर रहा है। इस आशय का दबाव पाकिस्तान पर डाला जा रहा है कि वह कश्मीर के संबंध में कोई कठोर कदम उठाए। सुनते हैं कि इस प्रकार की कोई योजना बन भी गयी है।
मतसंग्रह की मांग
पाकिस्तान भारत सरकार से मांग करने वाला है कि भारत अधिकृत कश्मीर से भारतीय सेनाएं हटाई जाएं और मतसंग्रह कराया जाए। इस योजना से पाकिस्तान को कोई नुकसान होने वाला नहीं। यदि भारत अधिकृत कश्मीर में पाकिस्तान के पक्ष में मतसंग्रह का परिणाम निकला तो उसका सम्पूर्ण कश्मीर पर अधिकार हो ही जाएगा और यदि तथाकथित 'आजाद कश्मीर' में भारत के पक्ष में मतसंग्रह हुआ तो शस्त्रों के बल पर उसे पाकिस्तान में रखा जाएगा। पाकिस्तान को इस रूप में भी उकसाया जा रहा है कि वह कश्मीर समस्या को सुरक्षा परिषद में ले जाए। वहां विदेशी राष्ट्र उसका समर्थन करेंगे। इस प्रकार का विश्वास भी दिलाया गया है।
हिन्दू समाज के पतन का कारण-आत्मविस्मृति
पंजाब भ्रमण के समय श्रीगुरुजी के उद्गार
गुड़गांव। हमारे पुण्य पूर्वजों ने सत्यमेव जयते का महान सिद्धांत विश्व को प्रदान किया था। किसी अन्य देश या परकीय लोगों से उसे हमने उधार नहीं लिया था। अहिंसा परमो धर्म: हिन्दुओं का घोष है, किसी अन्य के घोष की प्रतिध्वनि नहीं है। आज हमने अपने इन पुराने सिद्धांतों को राष्ट्रीय मान्यताओं के रूप में स्वीकार कर लिया है। यह ठीक भी है। परन्तु क्या आपको यहां व्यवहार में 'सत्य और अहिंसा के दर्शन होते हैं? तनिक इमानदारी से मुझे बताइयेगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्रीगुरुजी ने अपने पंजाब प्रांत के दौरे के सिलसिले में यहां आयोजित स्वयंसेवक तथा संघप्रेमी जनता के एक वृहद सम्मेलन में भाषण देते हुए ये उद्बोधक शब्द कहे।
असत्य आरोप
आपने आगे कहा कि सत्य और अहिंसा के दर्शन तो केवल वर्तमान शासकों की जिह्वा पर ही होते हैं, प्रत्यक्ष कृति में नहीं। यदि आपको इसका प्रमाण चाहिए तो सुनिये। शासक वर्ग हिन्दुओं के संगठन के इस महान राष्ट्रीय कार्य (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्य) को बंद कर देना चाहता था और उन्होंने क्या किया? उन्होंने संघ पर स्त्रास्त्र संग्रह तथा अनुचित धनराशि के संग्रह का आरोप लगाया। और मुझे जेल में डाल दिया गया था, उस वक्त एक बड़े अधिकारी आए और बोले, संघ कार्य के लिए यह करोड़ों रुपया कहां से मिलता है यदि विदेशों से नहीं आता? मैंने कहा कि मुझे पता नहीं कि संघ कार्य के लिए विदेशों से कोई पैसा भेजा गया है किन्तु यदि वास्तव में ऐसा है और मुझे इसमें संदेह नहीं करना चाहिए क्योंकि आप स्वयं इस बात का दावा कर रहे हैं तो फिर नि:संदेह यह प्रतीत होता है कि संघ कार्य के निमित्त भेजी गयी धनराशि को आपके प्रशासन ने रास्ते में ही हड़प कर लिया होगा क्योंकि वह मेरे पास आज तक नहीं पहुंची है। मेरे इस प्रत्यारोप से उन अधिकारी महोदय का मुंह बंद हो गया और मजेदार बात यह है कि फिर उस आरोप को दोहराया नहीं गया। जो बात धनराशि संग्रह पर घटित होती है, वही अपार शस्त्रास्त्र-संग्रह के आरोप पर भी। वास्तव में यह बड़े दुख की बात है कि हमारे जो लोग सत्य और अहिंसा की रट लगाते हैं वे इतने पतित हैं कि उनका सम्पूर्ण अधिष्ठान ही असत्य और हिंसा पर आधारित है।…











