| दिंनाक: 10 May 2014 16:28:44 |
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गत 4 मई को मध्य प्रदेश के सागर में महाराजा छत्रसाल जयन्ती पर अनेक कार्यक्रम हुए। सबसे पहले विजय टॉकीज चौराहा स्थित महाराजा छत्रसाल की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। इसके बाद मांं सिंहवाहिनी मंदिर में विचार गोष्ठी का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता पार्षद संजीव पांडे ने की। मुख्य अतिथि थे लोकनाथ मिश्र। विचार गोष्ठी में बलराम पचौरी, ओमप्रकाश दुबे, विकास सेन और दामोदर प्रजापति ने महाराजा छत्रसाल के जीवन एवं बुंदेली परम्पराओं पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। कार्यक्रम के संयोजक वीरेन्द्र ओमरे ने बताया कि कैसा आश्चर्य है कि इतिहास की पुस्तकों के अनुसार मराठा, सिख, बंुदेली एवं जाट स्वतंत्र राज्य थे और इनकी वजह से औरंगजेब जीवन के अन्तिम 24 वर्षों में दक्षिण से दिल्ली न आ सका। वह शासक न कहलाकर, ऐतिहासिक भूलवश बादशाह कहलाया। जबकि महाराजा छत्रसाल, जो अपने जीवनकाल में अपराजेय रहकर विस्तृत राज्य स्थापित करने में सफल रहे, इतिहास की पुस्तकों में समुचित स्थान न पा सके। कार्यक्रम में अरविंद राजपूत, डॉ. प्रीतम कश्यप, मनोहर तिवारी, नारायण सिंह ठाकुर, जिनेश जैन, कमल कृष्ण अग्रवाल एवं लक्ष्मण सिंंह विशेष रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन दीपक भंडारी ने किया। इसका आयोजन बुंदेलखण्ड प्रतिष्ठा मंच ने किया था। प्रतिनिधि