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बिखरता कुनबा, सिमटती चौसर

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Feb 1, 2014, 12:00 am IST
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दिंनाक: 01 Feb 2014 13:48:51

आवरण कथा 'घर में घबराहट' कांग्रेस व उसके सहयोगी दलों के अंदर मची बेचैनी को उजागर करती है। लोकसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे कांग्रेस व उसके सहयोगी दलों में घबराहट होने लगी है, होगी भी क्यों नहीं, क्योंकि उन्हें अपने अन्त का समय जो दिखाई देने लगा है। जनता ने पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में दिखा दिया कि वे कहां हंै और वह उन्हें कितना पसंद करती है।
-हरिओम जोशी
चतुर्वेदी नगर, भिण्ड (म.प्र.)
० कांग्रेस पार्टी आने वाले चुनाव के लिए ज्यादा उत्सुक नहीं दिखाई दे रही है। ऐसा लग रहा है कि जैसे उसने लड़ने से पहले ही हार मान ली हो। दरअसल नया साल कांग्रेस व उसके सहयोगियों के लिए केवल चुनौतियां ही नहीं कई सवाल लेकर आया है। अगर बात केवल चुनौतियों तक होती तो उनके भ्रष्टाचारी सहयोगी उसको हल करने की तरकीब खोज निकालते, लेकिन बात इतनी ही नहीं है। जनता उनके काले कारनामों से पूरी तरीके से अवगत है, इसलिए उनके सहयोगी भी इसका रास्ता निकालने में असमर्थ हैं। कांग्रेस ने अपने शासनकाल में देश और जनता को लूटने के सिवा और कोई काम नहीं किया है।
-उमेदु लाल
ग्राम-पटूडी, जिला-टिहरी गढ़वाल (उत्तराखंड)
० कांग्रेस के लिए मौजूदा हालात बेहद खराब है। पिछले दस वर्षों से सत्तारूढ़ कांग्रेस ने भ्रष्टाचार और महंगाई के अलावा देश को कुछ नहीं दिया है। उसके शासनकाल में राजनीतिक-प्रशासनिक अराजकता अपने चरम पर रही है। लेकिन देश की आम जनता ने अब उसके वास्तविक स्वरूप को भली-भांति पहचान लिया है। इसमें कोई शक नहीं कि कांग्रेस का जहाज अब डूबने की कगार पर है। इसका एक छोटा सा उदाहरण भी जनता ने विधानसभा चुनाव के माध्यम से प्रस्तुत कर दिया है।
-मनोहर मंजुल
पिपल्या-बुजुर्ग, प़. निमाड (म.प्र.)
० भ्रष्टाचार में सिर से पैर तक डूबी कांग्र्रेस पार्टी की बौखलाहट दिनांे-दिन बढ़ती जा रही है। हाल ही में मनमोहन सिंह ने पत्रकार सम्मेलन में श्री नरेन्द्र मोदी पर अपनी भड़ास निकालते हुए तरह-तरह के बेबुनियाद अरोप लगाए। इससे मोदी की छवि को तो कुछ भी नुकसान नहीं पहंुचा खुद प्रधानमंत्री सवालों के घेरों में आ गए। सीमा सुरक्षा, महंगाई, बलात्कार, भ्रष्टाचार जैसे गंभीर से गंभीर मुद्दों पर अपने मंुह को बंद रखने वाले मनमोहन सिंह को मोदी इतने गंभीर लगे कि उन्होंने उनके प्रधानमंत्री बनने से देश को खतरा हो सकता है,तक घोषित कर दिया। मनमोहन सिंह को पता होना चाहिए कि आज देश उनकी हकीकत को जान चुकी है और वह अब उनके झांसे में नहीं आने वाली ।
-राममोहन चन्द्रवंशी
विट्ठल नगर, स्टेशन रोड टिमरनी, जिला-हरदा (म.प्र.)
० दिनों-दिन घटता जनाधार कांग्रेस व उसके सहयोगी दलों को परेशान कर रहा है। पार्टी में  वंशवाद के चलते लोगों में उसके प्रति विश्वास समाप्त हो गया है। प्रत्येक पार्टी बिना आम जनता के सहयोग के नहीं चलती। हर वर्ग, हर क्षेत्र, हर जाति का सहयोग ही उसको मजबूती प्रदान करता है। लेकिन कांग्रेस पार्टी में सिर्फ वंशवाद की ही जड़ें मजबूत हैं। उसी का परिणाम है कि आज पार्टी का जहाज डूबने जा रहा है।
-वंशलोचन सिंह भदौरिया
इन्दौर (म.प्र.)
धरना या ड्रामा
केजरीवाल के धरने की समाप्ति के बाद कांग्रेस के मीडिया प्रमुख अजय माकन ने उसे परोक्ष समर्थन देते हुए कहा कि नरेन्द्र मोदी भी नर्मदा बांध के लिए धरने पर बैठे थे। माकन जी आप को यह नहीं पता कि दोनों धरनों में कितना अंतर है। मोदी ने धारा 144 नहीं तोड़ी, उन्होंने सड़कों को घेर कर असुविधा पैदा करने की कोशिश नहीं की, वे प्रदेश के विकास का महत्वपूर्ण मुद्दा उठा रहे थे (पुलिस वालों के निलम्बन जैसा महत्वहीन मुद्दा नहीं), उनका धरना अनुशासित था,उसमें किसी के प्रति असभ्य भाषा का प्रयोग नहीं हुआ था। सबसे बड़ी बात-धरने पर जाने से पहले केन्द्र के साथ वार्ता एवं पत्र व्यवहार के तरीके अपना कर के श्री मोदी देख चुके थे, जिसके बाद उन्होंने यह कदम उठाया था। केजरीवाल का धरना न तो देश और न ही दिल्ली के हित में था, जिस प्रकार उनकी पार्टी की फजीहत हो रही थी उससे ध्यान भटकाने के लिए उन्होंने यह धरना दिया।
-अजय मित्तल
खंदक, मेरठ
मंुह की खाई
गुजरात के मुख्यमंत्री व भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार श्री नरेन्द्र मोदी को अमदाबाद की मैट्रोपोलिटन कोर्ट द्वारा गुजरात दंगों के मामलों में क्लीनचिट मिलने पर कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ गई है।  कांग्रेस को मोदी से मांफी मांगनी चाहिए, क्योंकि उसने ही उनको दंगो के पीछे आरोपी ठहराया था और पूरे देशभर में अमर्यादित टिप्पणियां की थी। वहीं इस फैसले के आने से नरेन्द्र मोदी की नैतिक व वास्तविक जीत हुई है।
– रामचन्द्र ठोके
भिलाई नगर, जिला-दुर्ग (छत्तीसगढ़)
मोदी का भय
नरेन्द्र मोदी की बढ़ती प्रतिष्ठा और भाजपा के पक्ष में आम जनता का बढ़ता रुझान वर्तमान समय में कांग्रेस की सबसे प्रमुख समस्या बन गयी है। चारों राज्यों के चुनाव परिणाम में सर्वाधिक सीटें भाजपा के पक्ष में आने से सभी कांग्रेसी घबरा गये हैं और मोदी के खिलाफ दुष्प्रचार करने लगे हैं। लेकिन उनको पता होना चाहिए कि जनता को सच और झूठ में फर्क समझना आता है। आने वाला समय भाजपा का है, पूरा देश मोदीमय हो चुका है।
-राम पाण्डेय
ग्राम व पो़  शिवगढ़
जिला-बछरांवा (उ.प्ऱ)
जनता का प्रेम
गुजरात जैसा विकास पूरे देश में हो यह संपूर्ण जनता चाह रही है। प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठ कर मोदी देश की जनता को भ्रष्टाचार मुक्त शासन देंगे व महंगाईं से छुटाकरा दिलाएंगे। आज के समय वही एक ऐसे व्यक्ति हैं, जो आमजनता को सुरक्षा, सुशासन, विकास, स्थिरता दे सकते हैं। इसमें कोई संन्देह नहीं कि आजादी के बाद सबसे ज्यादा राज अगर किसी पार्टी ने किया है तो वह कांग्रेस है, इसलिये आज जो देश की दुर्दशा है उसके लिये अगर कोई जिम्मेदार है तो वह सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस ही है।
-सुहासिनी प्रमोद वालसंगकर
दिलसुखनगर, हैदराबाद (आं.प्र.)
बेचारे राहुल
हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव के बाद से कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी की साख पर पार्टी के लोगों ने ही प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया है। पार्टी के लोगों की माने तो जिन राहुल को श्री मोदी की टक्कर में खड़ा किया जा रहा है वे उनके सामने कहीं भी नहीं टिकते हैं। राहुल और मोदी की सभा का औसत देखें तो पता चल जाता है कि जहां-जहां राहुल ने सभायें की वहां कांग्रेस बुरी तरह पराजित हुई है और जहां-जहां मोदी ने जनसभायें कीं वहां-वहां भाजपा की धमाकेदार जीत हुई है। इससे पता चलता है कि आम जनता किसे पसन्द कर रही है।
-सूर्य प्रताप सिंह ह्यसोनगराह्ण
कांडरवासा (म.प्ऱ)
० कांग्रेस की एक छोटी सी सफलता भी राहुल के साथ जोड़ दी जाती है पर वहीं राहुल गांधी की असफलता का ठीकरा पार्टी के सिर फोड़ दिया जाता है। उ.प्र.,दिल्ली,राजस्थान,मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़, बिहार में आमजनता ने राहुल को पूरी तरीके से खारिज कर दिखा दिया है कि वह उन्हें बिल्कुल भी पसंद नहीं करती है। सोनिया बार-बार राहुल को चुनाव मैदान में नेतृत्व की कमान थमा देती हैं। लेकिन यहां पर सवाल यह है कि अगर इसी स्थान पर और कोई कार्यकर्ता या नेता होता तो उसको भी सोनिया गांधी इतना ही मौका देती,जितना राहुल को दे रही हैं ?
-व़ दा़ सप्रे
विवेकानंद नगर, जबलपुर (म.प्र.)
महात्मा गंाधी की गलती
सरदार वल्लभ भाई पटेल की बात को महात्मा गंाधी अगर नजर अंदाज नहीं करते और नेहरू को बढ़ावा व उनकी गलतियों पर पर्दा नहीं डालते तो शायद इस देश का वर्तमान में स्वरूप कुछ  भिन्न होता । जवाहर लाल नेहरू को सत्ता का लालच था और पटेल जी ने अपना सारा जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित कर दिया था। उन्हें किसी भी पद व कुर्सी का मोह नहीं था। भारत के सुन्दर भविष्य का जो सपना श्री पटेल ने देखा था वह विभाजन के साथ टूट गया। देश का विभाजन नेहरू की इच्छा से हुआ था। नेहरू की गलती का ही परिणाम है कि आज तक कश्मीर की समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।                     
-निमित जायसवाल
मुरादाबाद, (उ़ प्ऱ)
चिंतन की आवश्यकता
जिन राजनीतिक दलों को चुनाव में विजयश्री प्राप्त हुई है, उन्हें  प्रसन्नता व्यक्त करने का अधिकार है, किन्तु उसके साथ चिन्तन की भी आवश्यकता है। जो दल और व्यक्ति विजय हुए हैं, वे इस भ्रम में न रहे कि वे बहुत प्रभावशाली हैं,युवा है,सुन्दर है,बुद्घिमान है या जनता ने उन्हें डर कर वोट दिया है । जनता ने उनके कथनों को महत्व दिया है, उन्होंेने चुनाव पूर्व लोगों से अनेक वायदे किये थे, दिलचस्प अब यह है कि वह इन वायदों को पूरा करेंगे या दूसरे नेताओं की तरह लालीपॉप दिखा देंगे।
-लक्ष्मीनारायण हमरोदिया
स्ेाजपुरिया, मन्दसौर (म़ प्ऱ)

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