(पाठकीय- अंक संदर्भ - 8 सितम्बर, 2013)भोजन सुरक्षा या वोट सुरक्षा?
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(पाठकीय- अंक संदर्भ – 8 सितम्बर, 2013)भोजन सुरक्षा या वोट सुरक्षा?

Written byArchiveArchive
Sep 28, 2013, 12:00 am IST
inArchive

दिंनाक: 28 Sep 2013 15:41:57

सत्य छिपता नहीं है
पिछले कुछ अंक पहले पाञ्चजन्य में 'न लाज न शर्म' शीर्षक में उन नामों की सूची प्रकाशित की गई थी, जिनका स्विस बैंक कारपोरेशन में 5 लाख करोड़ से अधिक धन जमा है। ये नाम हैं- राजीव गांधी (198356 करोड़), ए. राजा (7856 करोड़), हर्षद मेहता (135121  करोड़), शरद गोविन्द राव पवार (28956 करोड़), पी. चिदम्बरम (33451 करोड़), सुरेश कलमाड़ी (5560 करोड़), एम. करुणानिधि (35009 करोड़), केतन पारिख (8256 करोड़), सी.जे. मोहिनी (96455 करोड़), कलानिधि मारन (15090 करोड़)।
उपयुक्त सूची में अधिकांश केन्द्रीय मंत्री हैं। यद्यपि राजीव गांधी नहीं हैं अपितु उनकी पत्नी तो हैं। गत 5-6 वर्षों से स्वामी रामदेव का विदेशों में जमा धन के सम्बंध में आन्दोलन चल रहा है। क्या उपर्युक्त जमाकर्ताओं का यह कर्तव्य एवं नैतिकता नहीं थी कि सरलता से सत्य को स्वीकार करते हुए विदेशों से रुपया निकाल कर देश के बैंकों में जमा कर देते। वह नैतिकता तो दूर रही, उसके विपरीत स्वामी रामदेव के आन्दोलन को निष्फल करने के लिए अर्द्धरात्रि में निहत्थे सोते महिलाओं, बालकों एवं पुरुषों को जिनकी संख्या साठ हजार से अधिक होगी, पर बिजली गुल कर लाठियों के प्रहार से भगाने का राक्षसी प्रयास किया गया। परन्तु सत्य छिपता नहीं है।
अब राष्ट्रभक्त, प्रबुद्धजन, चुनाव आयुक्त, आयकर आयुक्त एवं आम जनता स्वयं यह विचार करें कि क्या उपर्युक्त व्यक्तियों ने देश एवं देशवासियों के साथ धोखा नहीं किया है?
क्या चुनाव के समय भरे गए आवेदन पत्र के साथ आय प्रमाण पत्र में उक्त धनराशि उनके द्वारा भरी गयी थी? यदि नहीं, तो क्या आय को छिपाने एवं असत्य शपथपत्र देने के लिए वे दण्ड के भागी नहीं हैं?
असत्य शपथपत्र देने के कारण क्या उनकी संसद या विधानसभा की सदस्यता समाप्त नहीं कर देनी चाहिए?
क्या राष्ट्रभक्ति संदिग्ध हो जाने पर उन्हें सदैव के लिए चुनाव लड़ने हेतु आयोग्य घोषित नहीं कर देना चाहिए?
-रमाकान्त शुक्ल
117/के/60, सर्वोदय नगर कानपुर-208005 (उ.प्र.)
आवरण कथा 'रिझाने की डुग्गी, डुबाने का खेल' में सही लिखा गया है कि खाली खजाने के बावजूद जब खाद्य सुरक्षा योजना को तुरुप के पत्ते की तरह लहराया जाता है तो तरस आता है। गरीबों को मुफ्त भोजन की जगह रोजगार देना चाहिए। रोजगार होने पर लोग खुद ही कमा-खा लेंगे।
-गणेश कुमार
कंकड़बाग, पटना (बिहार)
० देश में कोई भूखा न रहे, इसका भला कोई विरोध क्यों करेगा? किन्तु भोजन सुरक्षा योजना को जिस तरह लागू किया जा रहा है उससे तो यह कहा जा सकता है कि यह योजना वोट सुरक्षा के लिए बनाई गई है।
-विकास कुमार
शिवाजी नगर, वडा, जिला-थाणे (महाराष्ट्र)
० एक परिवार का मुखिया भी पेट काटकर अपने खर्चो में कटौती करता है, ताकि घर की अर्थव्यवस्था सुचारू रूप से चल सके । परंतु देश की सरकार भ्रष्टाचार और कालेधन से पेट भर कर भारी-भरकम खाद्य सुरक्षा कानून बनवाती है, ताकि आने वाले लोकसभा चुनाव में वोट हासिल किया जा सके।
-हरिओम जोशी
चतुर्वेदी नगर, भिण्ड (म.प्र.)
० अर्थशास्त्र के विशेषज्ञ कहे जाने वाले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गलत नीतियों को लागू कर रुपए की कमर तोड़ दी है। भारत पर तेजी से बढ़ता विदेशी कर्ज,और उस कर्ज के भुगतान में कंेन्द्र सरकार की शिथिलता के कारण विदेशी निवेशक विदेशी मुद्रा यहां निवेश करने के बजाए  भारत से निकाल रहे हैं।
-निमित जायसवाल
ग-39, ई. डब्ल्यू एस
रामगंगा विहार, फेस प्रथम
मुरादाबाद-244001 (उ.प्र.)
० जनमानस को गरीबी, महंगाई का बोझ देने के बाद केन्द्र सरकार मलहम के तौर पर खाद्य सुरक्षा को आम लोगों कें समक्ष लेकर प्रस्तुत हुई है ,पर उसकी नीयत में ही खोट नजर आ रही है। अगर इस सरकार को आम जनता की इतनी ही चिंता थी तो उसे इस कानून को पहले ही बना देना चाहिए था ?
-नितिन बाजपेई
ग्राम-पो-तेरिया, तहसील-सण्डीला
जिला-हरदोई (उ.प्र.)
० आज महंगाई की आग में देश जल रहा है और विश्व में हमारे रुपए की हालत पलती हो रहीं है। ऐसे में भोजन कानून बनाना अपने आप में प्रश्न चिन्ह खड़े करता है। इस कानून के लागू होने में बजट पर करोड़ों रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा। इस कानून की जरूरत अभी नहीं थी। अगर सरकार को असल में किसानों और आमजन की चिन्ता होती तो वह अनाज के भण्डारण पर घ्यान देती।
-हरिहर सिंह चौहान
जंबरी बाग नसिया,  इन्दौर (म.प्र.)
यह थी सपा की मंशा
 उत्तर प्रदेश सरकार ने जिस प्रकार चौरासी कोशी परिक्रमा को रोककर हिंदुत्व पर कुठाराघात किया है, उससे समाजवादी पार्टी की मानसिकता साफ हो गई है।  वह शायद एक ऐसा प्रदेश चाहती है, जहां सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम निवास करें, पर इस प्रकार की मानसिकता को हिन्दू जनमानस कभी भी पूरा नही होने देगा।
– आशुतोष कुमार मिश्र
ग्र्राम व पो-बावन, जिला-हरदोई(उ.प्र.)
० 84 कोशी परिक्रमा यात्रा को रोककर जिस तरीके से मुल्ला मुलायम ने पूरे हिन्दू समाज का अपमान किया है,वह घोर निंदनीय है। आज समाजवादी सरकार पूरे तरीके से मुस्लिम तुष्टीकरण पर अमादा है। ऐसें मंे सभी राष्ट्रवादी शक्तियां एकजुट होकर हिंदू विरोधी दलों का विरोध करेंऔर चुनावों में उन्हें मात देने की कोशिश करें। 
-ठाकुर सूर्य प्रताप सिंह सोनगरा
कांडरवासा, जिला-रतलाम (म.़प्र.)
० विश्व हिंदू परिषद के द्वारा आयोजित 84 कोशी परिक्रमा का अखिलेश सरकार ने जिस तरीके से बल प्रयोग करके दमन किया है, वह हिंदुओं के लिए घोर चिंता का विषय है। कुछ मुसलमानों के वोट के लिए यह सरकार हमारी यात्रा, पूजा, हवन पर रोक लगाने लगी है। पर हिन्दू ऐसा नही होने देंगे। आने वाले लोकसभा चुनाव मंे हिंदू समाज इसका मुंहतोड़़ जवाब देगा।
-पवन कुमार सिंघल
दिल्ली
० उत्तर प्रदेश सरकार ने 84 कोशी पद यात्रा पर प्रतिबन्ध लगाया, पर हिन्दू समाज ने इस यात्रा को पूरा कर सपा सरकार को  करारा जवाब दिया। उत्तर प्रदेश के हालात दिन-प्रतिदिन बिगड़ते जा रहे हैं,पर मुल्ला मुलायम चुप हैं।
-वीरेन्द्र सिंह जरयाल
28 ए, शिवपुरी,कृष्ण नगर, दिल्ली
प्रेरणादायक कविता
पिछले अंक में कविता 'नायक तुम्हीं हो' छपी थी। वह अति सुन्दर व प्रेरणा दायक थी। एक-एक शब्द अति प्रभावशाली था,लेखक महोदय को हमारी ओर से बधाई एवं धन्यवाद।
-सत्यभान अग्रवाल
कछला रोड, उझानी
जिला-बदायूं-243639 (उ.प्र.)
सेकुलरी सोच
पिछले दिनों पाञ्चजन्य में मेवात की स्थिति पर एक रपट पढ़ने को मिली। इसे पढ़कर लगा कि हम भारत नहीं अपितु पाकिस्तान के हिंदुओं के बारे में पढ़ रहे हैं। आज मुस्लिम कट्टरवाद पूरे विश्व में चरम पर है। अब भारत भी इस मुस्लिम आतंकवाद की जद में पूरी तरीके से आ चुका है। नि:सन्देह सेकुलरवादी राजनेता हिंदुओं को भारत में ही दोहरे दर्जे का नागरिक बना देना चाहते हैं। यदि समय रहते हिंदू समाज नहीं चेता तो वह दिन दूर नहीं जब ये सेकुलरवादी भारत को 'इस्लामी गणतंत्र' घोषित करवा देंगे।
-धीरज भार्गव
32, पुरुषोतम नगर, मालीखेड़ी रोड आगर-मालवा-465441 (म.प्र.)

धार्मिक भावना को ठेस
पाञ्चजन्य की विशेषता यही है कि जो समाचार और कहीं नहीं मिलता है वह पाञ्चजन्य में मिलता है। 'शाकाहारी उत्पादों में भी मिला हुआ मांस' यह समाचार और किसी पत्र में न पढ़ने को मिला और न ही किसी चैनल में सुनने को मिला। इस विशेष समाचार को पाठकों तक पहुंचाने के लिए आपको धन्यवाद। लोटा-चोको पाई में गाय का मांस मिला हुआ है,यह जानकर बड़ा आश्चर्य हुआ। इसके डब्बे पर बहुत ही महीन अक्षरों में लिखा हुआ है कि इसमें गो मांस मिला हुआ है।
-बी एल सचदेवा
263,आई एन ए मार्केट, नई दिल्ली-23
० लोटो चोको पाई के प्रति बच्चे बड़े आकर्षित रहते हैं। प्राय:हर घर के बच्चे इसको खाते हैं। यह जानकर बड़ा दु:ख हुआ कि इसमें गो-मांस मिला हुआ है। इस तरह  हमारी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई जा रही है। भारत सरकार और अन्य राज्य सरकारों को लोटो चोको पाई बनाने वाली कम्पनी से पूछताछ करनी चाहिए कि उसने ऐसा क्यों किया है? सरकार उस कम्पनी को हिदायत दे कि वह बड़े-बड़े अक्षरों में डब्बे पर लिखे कि इसमें गो मांस भी मिलाया गया है।
-गोपाल
विवेकानन्द मिशन,गांधीग्राम
जिला-गोड्डा(झारखण्ड)
धर्मरक्षक जूदेव जी
पिछले दिनों श्री दिलीप सिंह जूदेव के निधन का समाचार पढ़ा। उनके जाने से हिन्दू समाज की अपूरणीय क्षति हुई है। जूदेव जी का जीवन हिन्दू समाज को समर्पित था। छत्तीसगढ़ में उन्होंने मिशनरियों के मतान्तरण अभियान को रोका था। उन्होंने ईसाई बन गए हजारों हिन्दुओं की घर-वापसी भी कराई थी। वनवासी क्षेत्रों में उनकी बड़ी पूछ थी। लोग उनके साथ बड़ी श्रद्घा के साथ जुड़ते थे।  उनके सम्पर्क में जो एक बार आ जाता था वह उन्हीं का हो जाता था। सच में वे धर्म-रक्षक थे।
-भवानी सिंह
सरगुजा (छत्तीसगढ़)
काश, ऐसा होता
कुछ अंक पहले 'गई पढ़ाई गड्ढे में' शीर्षक से एक लेख पढ़ा था। उस लेख में तथ्यों के आधार पर कहा गया है कि यदि हमने अंग्रेजों के जाने के बाद ही बच्चों को भारतीय पद्घति के अनुसार शिक्षा दी होती तो आज ऐसी हालत नहीं होती। भारतीय परम्परा के अनुसार नहीं चलने के कारण ही आज हमारे सामने अनेक तरह की समस्याएं खड़ी हो रही हैं। हमने अपनी हजारो वर्ष पुरानी संस्कृति और परम्परा को छोड़ दिया है। इसका परिणाम भी हम भुगतने लगे हैं।
-लक्ष्मीचंद
गांव-बांध,डाक-भावगड़ी
जिला-सोलन (हि.प्र.)
झूठ का पुलिंदा
पन्द्रह अगस्त के अवसर पर राष्ट्र को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने जो कुछ कहा उसे झूठ का पुलिंदा ही कहा जा सकता है। लोग यह मानकर उनके भाषण को सुन रहे थे कि शायद वे महंगाई कम करने की बात करेंगे और घोटालेबाजों को जेल की हवा खिलाएंगे पर उन्होंने कुछ भी ऐसा नहीं कहा। पाञ्चजन्य ने सही लिखा था कि उन्होंने सच छिपाया और केवल सपना दिखाया। ऐसा लगता है कि यह सरकार झूठ बोलने में पूरी तरह निपुण हो गई है।
-तारिक हुसैन ताशनी
ग्राम-ओल्हनपुर, डाक-खोदाईबाग
जिला-छपरा (बिहार)
 

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