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सैनिकों के लिए राह बनाई स्वयंसेवकों ने
सैनिक और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक आपदाग्रस्त क्षेत्रों में स्थानीय लोगों के साथ मिलकर लोगों को बचाने में लगे हैं, उन्हें खाना और पानी उपलब्ध करा रहे हैं। 18 जून को जो पहला हेलिकॉप्टर केदारनाथ गया, उसमें संघ के दो स्वयंसेवक बिजोन बिष्ट और योगेन्द्र राणा गए। रस्से से नीचे उतरकर उन्होंने ही पहला हैलीपैड बनाया। 50 स्वयंसेवकों की एक टोली दिन-रात राहत और बचाव कार्य में लगी रही। राष्ट्रीय स्वंसेवक से जुड़े अनेक संगठनों के कार्यकर्ता भी पीड़ितों के लिए पूरे देश से राहत सामग्री इकट्ठा कर भेज रहे हैं।
संघ के स्वयंसेवक ही थे जिन्होंने दूर दराज से प्रान्त कार्यालय को सूचना भेजनी शुरू की। आनन-फानन में देहरादून स्थित प्रान्त कार्यालय को सहायता केंद्र बना दिया गया। उत्तरांचल दैवी आपदा पीड़ित सहायता समिति के बैनर तले सूचनाओं के आदान-प्रदान के अलावा देश भर से आ रही राहत सामग्री के रख-रखाव और उन्हें आगे भेजने के लिए कार्यकर्ताओं के दल गठित कर दिए गए। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक श्री शिव प्रकाश लगातार कार्यकर्ताओं को निर्देश दे रहे थे, तो प्रान्त प्रचारक डाक्टर हरीश भी देशभर से वहां फंसे लोगों के परिजनों को उनकी जानकारी देने का प्रयास कर रहे थे। प्रान्त के व्यवस्था प्रमुख श्री सुरेन्द्र ने बताया कि अब और राहत सामग्री की आवश्यकता नहीं है। देहरादून के महानगर कार्यवाह अनिल नंदा राहत सामग्री के संग्रहण और जहां जैसी जरूरत है वहां उसी प्रकार की सामग्री भेजने का काम देख रहे थे। हरिद्वार, ऋषिकेश, श्रीनगर , रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग, चमोली, जोशीमठ, चंबा, मयाली, चिन्यालीसौड और उत्तरकाशी जहां-जहां भी सड़क मार्ग से पहुंच पाना संभव था, वहां तक सहायता सामग्री भेजी गयी। क्षेत्र प्रचार प्रमुख श्री कृपाशंकर ने 3-3 लोगो के दो दल बनाकर प्रभावित क्षेत्रों में भेजे ताकि स्थिति की सही तस्वीर सामने आ सके ।
दैवी आपदा पीड़ित सहायता समिति के प्रमुख कार्यकर्त्ता श्री प्रेम बड़ाकोटी अगले ही दिन उत्तरकाशी के लिए चल दिए और कई किलोमीटर पैदल चलकर मनेरी स्थित सेवा आश्रम जाकर वहां चल रहे सहायता केंद्र का काम संभाला। उन्होंने फोन पर बताया कि गंगोत्री से आने वालों के लिए मनेरी का सेवा आश्रम ही एकमात्र राहत केंद्र था। यहां लगभग 7500 लोगों को भोजन उपलब्ध कराया गया और 12 दिन में लगभग 10000 लोगों ने रात्रि विश्राम भी किया।
इसके साथ ही कर्मवीर सैनिक मुसीबत में फंसे लोगों को बड़ी मुस्तैदी के साथ निकालने में लगे हैं। स्वयंसेवकों और सैनिकों ने हजारों लोगों की जान बचाई।
विभिन्न राज्य सरकारें भी दिल खोलकर पीड़ितों की मदद के लिए राहत राशि भेज रही हैं। सबसे ज्यादा राशि 25 करोड़ उत्तर प्रदेश सरकार ने भेजी है। दिल्ली सरकार ने 10 करोड़, हरियाणा सरकार ने 10 करोड़, मध्य प्रदेश सरकार ने 5 करोड़, महाराष्ट्र सरकार ने 10 करोड़, गुजरात सरकार ने 2 करोड़ इस तरह कई राज्य सरकारों ने राहत राशि दी है।
घिरी कांग्रेस बहकी बातें
राष्ट्रीय आपदा के समय राहुल की गैर-मौजूदगी पर सवालों की बौछार से कांग्रेसी चिढ़ गए। ऊपर से उनके 'युवराज' से पहले ही गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी उत्तराखण्ड के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर आये। पहले से ही चिढ़े कांग्रेसियों को मोदी का यह दौरा हजम नहीं हुआ। पार्टी प्रवक्ता रेणुका चौधरी ने कहा कि मोदी शक्की, नौटंकीबाज, घटिया और आसान रास्ता अपनाने वाले और कम अक्ल वाले रेम्बो हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी ने गुजरात से बाहर का विकास देखा ही नहीं है। इससे पहले सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने कहा था कि मोदी 'आपदा पर्यटन' में गए हैं। वे इस तरह के छिछोरेपन से बाज आएं। फेसबुक पर राहुल को पप्पू कहने पर दिग्विजय सिंह इतने बौखला गए कि उन्होंने अपना गुस्सा नरेन्द्र मोदी पर उतारा और उन्हें फेंकू तक कह दिया।
विहिप ने दिया 3000 लोगों को रेल टिकट
विश्व हिन्दू परिषद् के कार्यकर्ता भी पीड़ितों की मदद करने में पीछे नहीं हैं। विश्व हिन्दू परिषद की ओर ऋषिकेश में 20,150, हरिद्वार में 8000, देहरादून में 1000, कोटद्वार में 6600 और लक्षमौली में 3000 पीड़ितों को भोजन और दवा उपलब्ध कराई गई। 3000 लोगों को घर जाने के लिए रेल टिकट भी दिया गया। इन टिकटों का खर्च विश्व हिन्दू परिषद् ने उठाया।











