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आवरण कथा 'नर्क का नाम पाकिस्तान' में पाकिस्तानी हिन्दुओं की दुर्दशा जिस प्रकार बताई गई है वह हृदय-विदारक है। पाकिस्तान में हिन्दुओं का जो हाल है वह समस्त हिन्दू समाज के लिए चेतावनी है कि समय रहते संभल जाओ, अन्यथा बुरे दिन आने वाले हैं। पाकिस्तान और बंगलादेश में हिन्दुओं की संख्या गिनने लायक भी नहीं रह गई है। ऐसा क्यों हो रहा है, इस पर हिन्दू चिन्तर करें।
–विशाल कुमार
शिवाजी नगर, वडा, जिला–थाणे (महाराष्ट्र)
पाकिस्तान से ज्यादा मुसलमान भारत में हैं। भारतीय मुसलमान मजे में हैं। सरकारों को हिन्दुओं से अधिक मुसलमानों की चिन्ता होती है। चूंकि सरकार चलाने वाले ज्यादातर लोग भारतीय विचारधारा में पले-बढ़े हैं। इसलिए उनमें किसी के साथ भेदभाव करने की भावना नहीं है। पर पाकिस्तान में जो विचारधारा हावी है वह गैर-मुस्लिमों के साथ भेदभाव करने वाली है। इसलिए पाकिस्तानी हिन्दू भारत से वापस नहीं जाना चाहते हैं। उन्हें भारत की नागरिकता दी जाए।
–सूर्यप्रताप सिंह 'सोनगरा'
कांडरवासा, रतलाम-457222 (म.प्र.)
जो भी पाकिस्तानी हिन्दुओं के बारे में पढ़ता या सुनता है वह उनसे सहानुभूति रखने लगता है। किन्तु सेकुलर भारत सरकार पाकिस्तानी हिन्दुओं के दु:ख-दर्द देखकर भी उन्हें 'नर्क' में वापस जाने को कहती है। यही भारत सरकार बंगलादेशी मुस्लिम घुसपैठियों का स्वागत कालीन बिछाकर कर रही है। उन्हें भारत की नागरिकता दी जा रही है, उन्हें मतदान का अधिकार दिया जा रहा है। क्या पाकिस्तानी हिन्दुओं को मौत के मुंह में सिर्फ इसलिए धकेला जाए कि वे हिन्दू हैं?
–सुहासिनी प्रमोद वालसंगकर
द्वारकापुरम, दिलसुखनगर
हैदराबाद-60 (आं.प्र.)
पाकिस्तान में न तो भाईचारा है और न ही इनसानियत। इनसानियत होती तो वहां के अल्पसंख्यक हिन्दू, ईसाई वहां से पलायन नहीं करते। जिस देश की नींव ही नफरत पर है उससे अच्छे व्यवहार की अपेक्षा करना तो अपने आपको ही ठगना है। भारत पाकिस्तान को कड़ाई से कहे कि अपने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा करो वर्ना परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहो।
–हरिहर सिंह चैहान
जंवरीबाग नसिया
इन्दौर-452001 (म.प्र.)
पीड़ित पाकिस्तानी हिन्दू भारत इसलिए आ रहे हैं कि वे भारत को अपना मानते हैं। वे ठीक कह रहे हैं यदि उनके बाप-दादा 1947 में भारत आते तो उन्हें यहां की नागरिकता मिलती। अब पाकिस्तान में हिन्दुओं का जीना दूभर हो गया है। यदि इस हालत में भी भारत उन्हें नहीं अपनाएगा तो यह उनके साथ धोखा होगा। इसलिए भारत पाकिस्तानी हिन्दुओं को अपनाए।
–देवराज
टिहरी गढ़वाल (उत्तराखण्ड)
पाकिस्तान केवल हिन्दुओं के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए नर्क बन चुका है। कहीं भी बम विस्फोट होता है उसके तार किसी न किसी रूप में पाकिस्तान से जुड़े रहते हैं। विश्व समुदाय पाकिस्तान पर दबाव डाले कि वह अपने को ठीक कर ले, अन्यथा तुम्हारा बहिष्कार किया जाएगा। जब तक पाकिस्तान की स्थिति ठीक नहीं होती है तब तक वहां के हिन्दुओं को भारत हर तरह से मदद दे। उन्हें बचाने के लिए भारत लाया जाए।
–राममोहन चंद्रवंशी
अभिलाषा निवास, विट्ठल नगर टिमरनी, जिला–हरदा (म.प्र.)
पाकिस्तानी हिन्दुओं का कहना है कि पाकिस्तान में हिन्दू मजदूरों से सारे दिन कड़ाई से काम लिया जाता है और शाम को कइयों को मुस्लिम लोग बड़ी-बड़ी जंजीरों में बांध लेते हैं, ताकि वे कहीं भाग न जायें और अगले दिन उन्हें मजदूरों के लिए घूमना न पड़े। उनका यह भी कहना था कि वे पाकिस्तान स्थित अपनी जमीन-जायदाद की लाखों करोड़ों की कीमत के बदले हजारों में कीमत लेकर वहां से चल देते हैं कि किसी प्रकार भारत तो पहुंच जाएं। पाकिस्तानी हिन्दुओं को पहले मोहब्बत से, फिर दौलत से और फिर दहशत से अपना धर्म छोड़ने और इज्जत बेचने के लिए मजबूर किया जाता है। अगर भारत उनकी मदद नहीं करेगा तो कौन करेगा?
–विनोद कुमार सर्वोदय
नयागंज, गाजियाबाद (उ.प्र.)
'दर्द के सागर में पाकिस्तानी हिन्दू' रपट पढ़कर आंखें भर आईं। क्या कसूर है उन हिन्दुओं का? यदि भारतीय हिन्दुओं ने पाकिस्तानी हिन्दुओं को बचाने का प्रयास नहीं किया, उनकी मदद नहीं की तो कल हम हिन्दुओं के साथ भी ऐसी स्थिति हो सकती है। अपने धर्म भाइयों की रक्षा के लिए हमें आगे आना ही पड़ेगा।
–प्रिन्स वर्मा
457, इन्द्रा कालोनी मुजफ्फरनगर-251001 (उ.प्र.)
विभाजन के वक्त पाक में हिन्दू आबादी 15 प्रतिशत थी आज 2 प्रतिशत से भी कम रह गयी है। अब शेष बचे हिन्दुओं को भारत में बसाकर ही उनके जीवन को सुरक्षा-प्रदान की जा सकती है। भारत आने के लिए उनके पास पैसा नहीं है तो भारतवासी हिन्दुओं को उनके लिए चंदा एकत्रित करना चाहिए। भारत सरकार के भरोसे रहे तो पाकिस्तानी हिन्दू समूल नष्ट हो जाएंगे।
–हरिओम जोशी
चतुर्वेदी नगर, भिण्ड (म.प्र.)
पाकिस्तानी हिन्दुओं की दुर्दशा का जो चित्रण प्राप्त हुआ उससे मन अत्यन्त खिन्न हो गया। आजादी के बाद पाकिस्तानी क्षेत्र में रह रहे हिन्दुओं की समस्या इतनी विकट बन गई कि आज वहां से भारत आ रहे हिन्दुओं के माध्यम से जो जानकारी मिल रही है वह बहुत अधिक चिन्तित कर रही है। ऐसे में भारत सरकार को बाध्य करना चाहिए कि पाकिस्तानी हिन्दुओं को सरकार शरणार्थी का दर्जा देकर उन्हें सुरक्षा प्रदान करे तथा अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर इस विषय को गंभीरता से रखे। साथ ही हिन्दू संगठनों को अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय में उनको पक्षकार बनाकर पाकिस्तान सरकार पर मुकदमा चलाना चाहिए, ताकि वहां रह रहे अल्पसंख्यकों को पूर्ण सुरक्षा व सम्मान देने को वह विवश हो।
–सत्येन्द्र प्रसाद जैन
सी-2/303, यमुना विहार, दिल्ली-53
अब जुबान क्यों नहीं चलती?
पिछले दिनों सऊदी अरब की ऐतिहासिक अलहरम मस्जिद के कुछ हिस्सों को मॉल बनाने के लिए तोड़ा गया। इस समाचार को पढ़कर मुझे कोलकाता की एक घटना याद आ गई। कोलकाता हवाई अड्डे के परिसर में एक मस्जिद है। कुछ वर्ष पूर्व हवाई अड्डे के विस्तार के लिए उस मस्जिद को हटाने की बात सामने आई। उस समय कुछ मौलवियों ने कहा था, 'अपनी जगह से हिमालय हट सकता है, मस्जिद और मजार नहीं।' ये लोग अब सऊदी सरकार से ऐसी बातें क्यों नहीं कर रहे हैं?
–हरेन्द्र प्रसाद साहा
नया टोला, कटिहार-853105 (बिहार)
देश को दांव पर मत लगाओ
गत 9 अप्रैल को उ.प्र. के सलेमपुर (देवरिया) में शहीद डीएसपी जियाउल हक के चालीसवां पर एक जलसा हुआ। उसको सम्बोधित करते हुए उलेमा काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष आमिर रसाड़ी ने कहा, 'अखिलेश यादव मुझे अपने दोनों बेटों को दे दें। मैं एक करोड़ दूंगा और पूरे खानदान को जिन्दगीभर बैठाकर खिलाऊंगा।' मालूम हो कि डीएसपी की पत्नी और पिता को 25-25 लाख रु. मुआवजा राशि दी गई है। जिन मुस्लिमों के वोट के लिए अखिलेश सरकार उ.प्र. का खजाना खाली कर रही है वही मुस्लिम अब उन्हें चुनौती दे रहे हैं। अखिलेश यादव से मेरी विनती है कि राज चलाने के लिए अपनी मातृभूमि को ही दांव पर मत लगाओ। देश रहेगा तो आप रहेंगे, राज भी करेंगे।
–राजकुमार यादव
6244, जनता रोड, सहारनपुर (उ.प्र.)
विशेषांक के शेष पत्र
अच्छी पहल
वर्ष प्रतिपदा विशेषांक सामग्री की दृष्टि से अच्छा लगा। आज मीडिया में नकारात्मक खबरें ज्यादा होती हैं। आज के दौर में सकारात्मक सोच पैदा करने वाले समाचारों की बड़ी आवश्यकता है। इस दिशा में पाञ्चजन्य की पहल सुखद लगी।
–काली मोहन सिंह
गायत्री मन्दिर, मंगलबाग, आरा, भोजपुर (बिहार)
अच्छी सामग्री चयन के लिए पाञ्चजन्य की टोली को बधाई! बड़ा अच्छा लगा कि कुछ लोग धारा के विपरीत चलकर सफलता के झण्डे गाड़ रहे हैं। यह अंक लोगों को कुछ विशेष करने के लिए प्रेरित कर रहा है।
–उदय कमल मिश्र
गांधी विद्यालय के समीप
सीधी-486661 (म.प्र.)
गोभक्त अनिल दुबे के बारे में पढ़कर मन को बड़ी शान्ति मिली। इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने बाद अनिल दुबे गो-सेवा में लगे हैं, यह कोई साधारण बात नहीं है।
–निमित जायसवाल
ग-39, ई. डब्ल्यू एस, रामगंगा, विहार
फेस प्रथम, मुरादाबाद-244001 (उ.प्र.)
कपड़ा मंत्री के नाम एक पाती
मैं हाल ही में पुणे के एक मॉल में अपने नाती के लिए एक 'टी-शर्ट' खरीदने पहुंचा था। वहां मुझे कई 'टी-शर्ट' दिखाई गईं। सबमें छाती पर यूनियन जैक (अंग्रेजों का झंडा) अंकित था। मुश्किल से बिना झंडे की 'टी-शर्ट' मिली। मैं आठ वर्षों तक अंग्रेजों का कारागार भोगने वाले परिवार का सदस्य हूं। हजारों लोगों के बलिदान से 'यूनियन जैक' भारत की जमीन से उखड़ सका था। इस बात को मैं आपत्तिजनक मानता हूं कि ऐसा वातावरण बनाया जाए कि हमारे नौजवान छाती से 'यूनियन जैक' चस्पा कर घूमें। हमारा कपड़ा मंत्रालय किस बात के लिए है? ऐसे उत्पादनों पर अंकुश लगाने की जिम्मेदारी किस पर है? कुछ कपड़ों पर कई आपत्तिजनक बातें लिखी रहती हैं। अगर कुछ लिखना ही है तो कुछ अच्छे वाक्य क्यों नहीं लिखे जाते हैं? क्या वस्त्र उत्पादकों को देश को बिगाड़ने की पूरी छूट है? मंत्रालय को इस पर गंभीर होना चाहिए।
–डा. प्रणव कुमार बनर्जी
विप्रनाथ औषधालय, मंडी मार्ग विद्यानगर, पेण्ड्रा
बिलासपुर-495119
शर्म इनको ना आती
पता सभी को लग गया, बंसल जी की रेल
रिश्वत का है पड़ रहा, उसमें सारा तेल।
उसमें सारा तेल, मजे में सभी सवारी
मैडम से मनमोहन तक हल्की या भारी।
कह 'प्रशांत' क्या कहें शर्म इनको ना आती
रिश्वत खाकर फुला रहे हैं अपनी छाती।।
–प्रशांत
पञ्चांग
वि.सं.2069 तिथि वार ई. सन् 2013
वैशाख शुक्ल 9 रवि 19 मई, 2013
” ” 10 सोम 20 ” “
” ” 11 मंगल 21 ” “
” ” 12 बुध 22 ” “
” ” 13 गुरु 23 ” “
” ” 14 शुक्र 24 ” “
वैशाख अमावस्या शनि 25 ” “











