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'आज मनुष्य प्रगति की आस में दौड़ रहा है, पर वह धर्म को छोड़कर दौड़ रहा है। इसलिए यह दौड़ अंधी दौड़ हो जाती है। साहित्यकार का काम है कि वह लोगों को सही मार्ग दिखाने वाला साहित्य तैयार करें। हमेशा से साहित्यकारों का यही काम रहा है'। उक्त उद्गार रा.स्व.संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने गत दिनों भोपाल (म.प्र.) में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के तत्वावधान में सम्पन्न हुए तीन दिवसीय कार्यकर्ता प्रशिक्षण वर्ग तथा सर्वभाषा साहित्यकार सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। समारोह में साहित्य के उन्नयन के लिये किये गये विशिष्ट कार्य के लिये मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को श्री भागवत द्वारा 'संस्कृति वत्सल अलंकरण' सम्मान से सम्मानित किया गया। साहित्य परषिद के इस तीन दिवसीय आयोजन में देशभर से विभिन्न भाषाओं के 206 साहित्यकारों ने भाग लिया।
समारोह का शुभारम्भ प्रशिक्षण वर्ग से हुआ। वर्ग का उद्घाटन परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. बलवन्त जानी, कार्यकारी अध्यक्ष डा. यतीन्द्र तिवारी तथा संगठन मंत्री श्री श्रीधर पराड़कर द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। तत्पश्चात पारंपरिक रीति से मंचस्थ अतिथियों का पुष्पगुच्छ, श्रीफल तथा अंगवस्त्र से स्वागत किया गया। इसके बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के निवर्तमान सरसंघचालक स्व. कुप्.सी.सुदर्शन को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। श्री सुदर्शन का हाल ही में देहावसान हुआ था। उद्घाटन कार्यक्रम में डा. यतीन्द्र तिवारी ने परिषद् के राष्ट्रीय मंत्री के रूप में कार्यरत श्री ऋषि कुमार मिश्र की महामंत्री के रूप में नियुक्ति की घोषणा की। साथ ही परिषद की त्रैमासिक पत्रिका 'साहित्य परिक्रमा' के सम्पादक का दायित्व श्रीमती क्रांति कनाटे को सौंपा गया।
सर्वभाषा साहित्यकार सम्मान हिन्दी के लिये वरिष्ठ लेखक डा. नरेन्द्र कोहली (दिल्ली), असमी के लिये वयोवृद्ध श्री यतीन गोस्वामी (गुवाहाटी), सिन्धी के लिये श्री ज्ञान प्रकाश टेकचंदानी (फैजाबाद), तेलुगु के लिये डा. श्रीमती एस.शेशरत्नम्, मराठी के लिये श्री रमेश पतंगे (मुंबई), मलयालम के लिये श्री एस. रमेशन नायर (कोच्ची), कन्नड़ के लिये डा. जी.वी.कट्टमणि (घारवाड़), संस्कृत के लिये डा. मिथिला प्रसाद त्रिपाठी (इंदौर), कश्मीरी के लिये डा. मोहनलाल (गुड़गांव), तमिल के लिये डा. गोविन्द राजन (प्रयाग), पंजाबी के लिये श्री जयगोपाल कोछर (पटियाला), उड़िया के लिये डा. नागेन्द्र प्रधान (भुवनेश्वर), बंगाली के लिये डा. सुदीप बासु (शान्ति निकेतन) तथा गुजराती के लिये श्रीमती वंदना शांत इन्दु (बड़ौदा) को श्री मोहनराव भागवत ने पुष्पगुच्छ, श्रीफल, शाल, स्मृति चिह्न तथा प्रशस्ति-पत्र से सम्मानित किया।
समारोह के अंतिम दिन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को श्री मोहनराव भागवत ने साहित्य व संस्कृति के उन्नयन के लिये किये गये कार्यों के लिए 'संस्कृति वत्सल अलंकरण' से सम्मानित किया। समारोह की अध्यक्षता अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय भोपाल के कुलपति डा. मोहनलाल छीपा ने की। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के संस्कृति मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल के कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला विशेष रूप से उपस्थित थे। प्रतिनिधि
पटना में आरोग्य भारती के अ.भा. प्रतिनिधिमंडल की बैठक
सकारात्मक सोच ही स्वास्थ्य का आधार
–भैयाजी जोशी, सरकार्यवाह, रा.स्व.संघ
'सकारात्मक सोच ही हमारे स्वास्थ्य का आधार है। पाश्चात्य चिंतन में मनुष्य की बीमारी एक गणित है। बीमारी और उसकी चिकित्सा का एक फार्मूला है। यह चिंतन अधूरा है। वास्तव में मनुष्य के शरीर के अलावा मन का भी चिंतन आवश्यक है। भारतीय मनीषियों ने शरीर के अलावा मन को भी अत्यंत आवश्यक माना है। मन अगर स्वस्थ्य है तो शरीर की व्याधियां समाप्त हो सकती हैं। जबकि मन के बीमार रहने पर शरीर भी अंतत: रुग्ण हो जाता है'। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री सुरेशराव उपाख्य भैयाजी जोशी ने गत 27 अक्तूबर को पटना में आरोग्य भारती के अखिल भारतीय प्रतिनिधिमंडल की बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
भैयाजी ने आगे कहा कि जब तक विश्व मनुष्य को समग्रता के साथ नहीं सोचेगा, तब तक मनुष्य का पूर्ण स्वस्थ होना संभव नहीं है। मनुष्य के मन पर कई बातों का प्रभाव होता है। प्रसन्न वातावरण में भोजन करने से व्यक्ति प्रसन्न होता है। आज 80 प्रतिशत जनता 20 प्रतिशत स्वास्थ्य सेवाओं पर आश्रित है, जबकि 20 प्रतिशत जनता 80 प्रतिशत स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ ले रही है। इसमें संतुलन बनाने की आवश्यकता है। सामान्य एवं गंभीर बीमारियों की चिकित्सा सेवा के लिए भी संतुलन बनाने की जरूरत है। कई बीमारियां खान-पान की शैली एवं जीवनशैली में परिवर्तन करके ठीक की जा सकती हैं।
कार्यक्रम को आरोग्य भारती के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष श्री रमेश गौतम, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डा. नरेन्द्र प्रसाद, बिहार के उप मुख्यमंत्री श्री सुशील कुमार मोदी, स्वास्थ्य मंत्री श्री अश्विनी कुमार चौबे तथा आरोग्य भारतीय के प्रदेश अध्यक्ष डा. मृत्युंजय प्रसाद ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर आरोग्य भारती के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डा. नरेंद्र प्रसाद की लिखित पुस्तक 'मेरा जीवन' का लोकार्पण भी किया गया। मंच संचालन श्री शिवादित्य ने किया। संजीव कुमार
संस्कार भारती का शरद काव्योत्सव
सूरघाट पर काव्य गान
संस्कार भारती, दिल्ली प्रांत के तत्वावधान में गत 27 अक्तूबर को यमुना तट पर बने सूरघाट पर महर्षि वाल्मीकि जयंती एवं शरद पूर्णिमा के उपलक्ष्य में शरद काव्योत्सव का आयोजन किया गया। विगत कई वर्षों से लगातार आयोजित होने वाले संस्कार भारती के इस रंगारंग आयोजन में दिल्ली के लोगों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर कार्यक्रम की रोचकता को बनाए रखा।
कार्यक्रम में प्रतिवर्ष दिया जाने 'पू. गुरु गोलवलकर काव्य पुरस्कार' इस वर्ष दिल्ली के श्री राजेश चेतन को दिया गया तथा इसी वर्ष से शुरू हुआ 'श्री गोपाल कृष्ण अरोड़ा स्मृति सम्मान' अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथक नृत्यांगनाएं सुश्री नलिनी-कमलिनी को दिया गया। दोनों सम्मान रा.स्व.संघ, दिल्ली के प्रांत संघचालक श्री कुलभूषण आहूजा, संस्कार भारती के अ.भा. लोक कला प्रमुख श्री अयोध्या प्रसाद 'कुमुद', प्रख्यात कथक नृत्य गुरु श्री जितेन्द्र महाराज, संस्कार भारती के कार्यकारी अध्यक्ष श्री विजय वहल, समाजसेवी श्री ब्रजमोहन सेठी आदि ने संयुक्त रूप से प्रदान किए। इस अवसर पर श्री अयोध्या प्रसाद कुमुद ने संस्कार भारती के कार्य तथा गतिविधियों की जानकारी दी। सम्मान समारोह के पश्चात शुरू हुआ कवि सम्मेलन। इस कार्यक्रम में आने वाले लोग विशेष रूप से कवि सम्मेलन का ही बेसब्री से इंतजार करते हैं। श्री चरण जीत 'चरण', श्री हरमिन्द्र पाल, डा. कुंवर बेचैन, श्री पदम अलबेला, सुश्री प्रीति विश्वास आदि कवियों ने अपनी मनमोहक कविताएं सुनाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। कवि सम्मेलन का शुभारम्भ श्री चरणजीत 'चरण' ने सरस्वती वंदना 'शारदे मां शारदे मां…' गाकर किया। इसके बाद श्री हरमिन्द्र पाल ने हरियाणा के चुटीले किस्से सुनाकर सबको खूब हंसाया तथा लोगों का ध्यान समाज की समस्याओं की ओर आकर्षित किया। सुश्री प्रीति विश्वास ने 'वक्त ने जब कभी आजमाया मुझे' गाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। कवि सम्मेलन का संचालन श्री चिराग जैन ने किया। कार्यक्रम के विधिवत शुभारम्भ से पूर्व कोलकाता से आए कलाकारों ने नृत्य नाटिका की सुंदर प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन संस्कार भारती के मंत्री संगठन श्री जितेन्द्र मेहता ने किया।प्रतिनिधि
देश के विकास में करेंगे युवाओं की ऊर्जा का उपयोग
सुभाष चौहान, संस्थापक, 'यूथ फॉर नेशन'
गत 3-4 नवंबर को नई दिल्ली में सामाजिक संस्था 'यूथ फॉर नेशन' का राष्ट्रीय सम्मेलन सम्पन्न हुआ। सम्मेलन का उद्घाटन समारोह कॉन्स्टीटयूशन क्लब में आयोजित किया गया। समारोह को संबोधित करते हुए 'यूथ फॉर नेशन' के संस्थापक श्री सुभाष चौहान ने कहा कि 'यूथ फॉर नेशन' युवाओं की ऊर्जा का उपयोग देश के विकास में करना चाहता है। रामराज्य का मतलब धार्मिक राज्य से नहीं था इसलिए हम चाहते हैं कि ऐसा राज्य हो, जिसमें सबका विकास हो। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध वैज्ञानिक डा. विजय पाण्डुरंग भाटकर ने कहा कि 'यूथ फॉर नेशन' भारत के नवनिर्माण में अपनी भूमिका बड़े कारगर ढंग से निभा सकता है। हमारी संस्कृति ऐसी है जिसका न तो आदि है और न अंत। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डा. सुरेन्द्र जैन ने कहा कि पश्चिम में अस्त होने वाला सूर्य पूर्व से उदय होता है और आगे भी यही होने वाला है, जिसमें हमारे युवाओं का पूर्ण योगदान होगा। इस अवसर पर श्री भुवन भोई को वीर सुरेन्द्र साईं सम्मान से सम्मानित किया। श्री भुवन भोई रंगमंच के प्रसिद्ध कलाकार हैं। इस अवसर पर बड़ी संख्या में राजधानी दिल्ली के प्रसिद्ध गण्यमान्य नागरिक उपस्थित थे। सम्मेलन में डा. सुरेन्द्र जैन ने 'यूथ फॉर नेशन' की प्रथम राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा की। कर्नाटक के श्री पद्म प्रसाद हेगड़े राष्ट्रीय अध्यक्ष, मध्य प्रदेश के डा. जितेन्द्र जाट कार्याध्यक्ष, झारखंड के श्री आलोक तिवारी महामन्त्री तथा दिल्ली के श्री कपिल गर्ग क्षेत्र संयोजक बने। दप्रतिनिधि











