पापनाशिनी नर्मदा-डा. केशवानन्द ममगाईं-
September 2, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम Archive

पापनाशिनी नर्मदा-डा. केशवानन्द ममगाईं-

Written byArchiveArchive
Sep 1, 2012, 12:00 am IST
inArchive

दिंनाक: 01 Sep 2012 15:51:53

 

नर्मदा पापनाशिनी देव-नदी है। यूं नदियां तो सभी पवित्र हैं। उनमें भी जो सीधी समुद्र में जाकर मिलती हैं वे नदियों में श्रेष्ठ हैं। समुद्र में मिलने वाली नदियों में भी जो चार नदियां सर्वश्रेष्ठ मानी जाती हैं वे गंगा, यमुना, सरस्वती और नर्मदा हैं। गंगा को ऋग्वेद स्वरूपा, यमुना यजुर्वेदस्वरूपा, नर्मदा सामवेदस्वरूपा और सरस्वती अथर्ववेदस्वरूपा मानी जाती हैं। नर्मदा को भगवान शिव के स्वेद से उत्पन्न माना गया है। पुराणों में ऐसी कथा आती है।

मत्स्यपुराण के अनुसार नर्मदा ने अपनी निष्ठा तथा योग्यता से तीन और नदियों में सर्वोच्च स्थान तो अर्जित कर लिया। किन्तु वह चाहती थी कि उसे शिखर-स्थान प्राप्त हो जाए। वह संचेतन नदी थी। उसे अहसास था कि यह बिना तपस्या किए प्राप्त नहीं हो सकता। इसलिए उसने तपस्या की, जिससे ब्रह्मा जी ने प्रसन्न होकर दर्शन दिए। उन्होंने वर मांगने को कहा। बस, क्या था उसने तपाक से कहा, 'मुझे गंगा के समान सर्वोत्तम स्थान चाहिए'। ब्रह्माजी उसे समझाकर बोले, 'भगवान पुरुषोत्तम के समान कोई दूसरा पुरुष नहीं हो सकता,सती पार्वती के समान कोई और नारी नहीं हो सकती, काशी जैसी परमपावन कोई अन्य पुरी नहीं हो सकती, तब तुम कैसे कहती हो कि मैं गंगा-समान सर्वोत्तम बन जाऊं।'

अब नर्मदा अपने पिता शिवजी के पांव पड़ी। तपस्या जो कर ली थी, आशुतोष प्रसन्न क्यों न होते। पूछा, 'क्या चाहती हो?' नर्मदा बोली, 'मैं चाहती हूं कि आपके चरण-कमलों में मेरी अहैतुकी भक्ति बनी रहे।' शिवजी ने उसकी प्रार्थना सुनकर कहा, 'बेटी, देखो, मैं यह वरदान तो तुम्हें दे ही रहा हूं और भी देना चाहूंगा। भक्ति के अतिरिक्त एक वर तो यह देता हूं कि गंगा, यमुना, सरस्वती और तुम, चार सर्वोत्तम नदियां मानी जाती हैं, तुम इन चारों में श्रेष्ठतम मानी जाओगी।' फिर आगे बोले, 'सुन पुत्री, गंगा में स्नान करने से तुरंत निष्पाप हो जाओगे। यमुना के तट पर सात दिन तक रहो, स्नान-पूजन करो तब निष्पाप होंगे। सरस्वती के तट पर तीन दिनों तक रहने पर निष्पाप हो जाते हैं। परंतु पुत्री रेवा, तुम्हारे तो केवल दर्शन मात्र से ही प्राणी पापरहित  हो जाएंगे।'

नर्मदाजी इन वरदानों के पाने के बाद काशी से अपने विंध्य प्रदेश (अब मध्य प्रदेश) के स्वस्थान की ओर चली गईं। शिवजी के प्रताप से नर्मदा सर्वोत्तम बन गई। इसका प्रत्येक कंकर शंकर है और किसी भी नदी के जयकार में उसके पिता का नाम नहीं लिया जाता। इसके पिता ने इसे सर्वश्रेष्ठ बना दिया। इसलिए इसके साथ ही इसके पिता का नाम लिया जाता है- 'नर्मदे- हर'।

इसकी एक और विशेषता यह है कि अनादिकाल से इसकी जैसी विधिवत् परिक्रमा होती है वैसी किसी भी नदी की नहीं की जाती। इन्हीं सब कारणों से नर्मदा का महत्व सबसे अधिक है। वैसे तो लगभग सभी पुराणों में नर्मदा का महत्व बताया गया है, किन्तु वायुपुराण और स्कंद पुराण में रेवा खंड अलग से है। पूरे भारत के शिव मंदिरों में नर्मदा से लाए हुए शिवलिंग ही स्थापित होते हैं। नर्मदेश्वर का दर्शन नर्मदा के दर्शन के समान ही है। नर्मदा का महात्म्य विस्तार से जानने के लिए श्रीमद्भागवत पढ़नी चाहिए।

नर्मदा के किनारे आकर ब्रह्मा, विष्णु, महेश, लोकपाल,देवता, राक्षस, बानर, भालू, अप्सरा, यक्ष, गंधर्व, किन्नर आदि सभी ने तप करके सिद्धिप्राप्त की। तभी तो कहा है, रेवातीर्थे तप: कुर्यात् मरणं जाह्नवी तटे– नर्मदा के तट पर तपस्या करें और मृत्यु के समय गंगा के तट पर आ जाएं। नर्मदा का उद्गम अमरकंटक से होता है। यहां से छोटी-छोटी धाराएं निकलती हैं जो आगे चलकर विशाल आकार ले लेती हैं। एक बड़ा कुंड है जहां से नर्मदा बांस की पिंडी से निकली थी। इसके चारों ओर नर्मदा, अमरनाथ, नर्मदेश्वर और अमरकंटकेश्वर के मंदिर बने हैं। नर्मदा के तट पर  सैकड़ों तीर्थ हैं- ओंकरेश्वर, गोपालपुर त्रिशूल घाट, तिलवाड़ा घाट, नंदिकेश्वर तीर्थ, सहस्रधारा तीर्थ, कपिलधारा, माई का बगीचा, करमंडल, लुकेश्वरतीर्थ, रामघाट, हुसंगाबाद, हंडिया, बलकेश्वर घाट, काबेरी संगम, स्वर्णदीप तीर्थ, मांडव्याश्रम, सिद्धेश्वर तीर्थ, रेवासंगम तीर्थ, भड़ौच आदि आदि। कमाल यह है कि प्रत्येक तीर्थ का वर्णन किसी-न किसी पुराण में अवश्य मिलेगा।

इन तीर्थों में ओंकारेश्वर का सर्वाधिक धार्मिक महत्व है। यह बारह शिवलिंगों में से एक है। एक ओंकारेश्वर तो मध्य नर्मदा में है और अमलेश्वर इस पार है। ओंकारेश्वर के हिस्से हैं- एक तो विष्णुपुरी ओंकारेश्वर और दूसरे शिवपुरी ओंकारेश्वर। नर्मदा- क्षेत्र में नर्मदा के तीन स्थानों का विशेष महात्म्य है-

सर्वत्र सुलभा रेवा त्रिषु स्थानेषु दुर्लभा:।

ओंकारे।़थ भृगुक्षेत्रे तथा रेवोरिसंगमे।।

नर्मदा वैसे तो सभी स्थानों पर सुलभ है, परंतु तीन स्थानों पर दुर्लभ है। एक तो ओंकारेश्वर में, जहां नर्मदा-कावेरी संगम है, दूसरे जहां नर्मदा का समुद्र में संगम है- भड़ौच और तीसरा कर्नाली रेवोरि नदी जहां नर्मदा में मिली है- चांदोद ¨Éå* (º´É. ममगाईं जी की पाञ्चजन्य को भेजी गई अंतिम रचना)

Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

मॉडर्न मदरसे का प्रमाण पत्र सौंपते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

35 मॉडर्न मदरसों को उत्तराखंड सरकार ने दी मान्यता, सीएम धामी बोले- आधुनिक शिक्षा से ही बच्चों का भविष्य बनेगा उज्ज्वल

पाकिस्तान में झूठी इज्जत के नाम पर की जा रही महिलाओं की हत्या

घर की ‘इज्जत’ और महिलाओं का कत्ल: हिना की हत्या के बाद पाकिस्तान में भड़का गुस्सा

naxsalwad

नकाब के पीछे छिपा नक्सल तंत्र

ब्रिटेन में बाल विवाह के आंकड़ों से मचा हड़कंप

ब्रिटेन में पांच साल में 100 से ज्यादा बच्चों की हुई शादी? कई की उम्र 5 साल से भी कम, आंकड़ों से मचा हंगामा

भगवंत मान, मुख्यमंत्री, पंजाब

पंजाब के सीएम हाउस में भ्रष्टाचार को लेकर ईडी ने पंजाब पुलिस को लिखा तीसरा पत्र, FIR दर्ज करने को कहा

श्रीकृष्ण की पहचान का हिस्सा कैसे बना मोरपंख? जानिए इसके पीछे छिपी रोचक कहानी

Load More

ताज़ा समाचार

मॉडर्न मदरसे का प्रमाण पत्र सौंपते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

35 मॉडर्न मदरसों को उत्तराखंड सरकार ने दी मान्यता, सीएम धामी बोले- आधुनिक शिक्षा से ही बच्चों का भविष्य बनेगा उज्ज्वल

पाकिस्तान में झूठी इज्जत के नाम पर की जा रही महिलाओं की हत्या

घर की ‘इज्जत’ और महिलाओं का कत्ल: हिना की हत्या के बाद पाकिस्तान में भड़का गुस्सा

naxsalwad

नकाब के पीछे छिपा नक्सल तंत्र

ब्रिटेन में बाल विवाह के आंकड़ों से मचा हड़कंप

ब्रिटेन में पांच साल में 100 से ज्यादा बच्चों की हुई शादी? कई की उम्र 5 साल से भी कम, आंकड़ों से मचा हंगामा

भगवंत मान, मुख्यमंत्री, पंजाब

पंजाब के सीएम हाउस में भ्रष्टाचार को लेकर ईडी ने पंजाब पुलिस को लिखा तीसरा पत्र, FIR दर्ज करने को कहा

श्रीकृष्ण की पहचान का हिस्सा कैसे बना मोरपंख? जानिए इसके पीछे छिपी रोचक कहानी

सेवानिवृत्त वायु सेना अधिकारी एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा

राम मंदिर ट्रस्ट: पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा पहले CEO, ऑपरेशन सिंदूर में संभाली कमान, गोविंद देव जी महासचिव बने

Central Asia में भारत की बढ़ती ताकत, मोदी के दौरे से बदलेगा समीकरण

3 सितंबर का पंचांग

3 सितंबर का पंचांग: शीतला सप्तमी पर बन रहा रवि योग, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल

पूर्वोत्तर की 7 बहनों पर किसकी नजर? मिशनरी एजेंडा, अलगाववाद और RSS

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies