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ईमानदारी का सच

Written byArchiveArchive
Aug 25, 2012, 12:00 am IST
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ईमानदारी का सच

दिंनाक: 25 Aug 2012 17:04:17

समदर्शी ने शायद सबसे पहले लिखा था कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बहुप्रचारित ईमानदार छवि का मुलम्मा एक लाख 76 हजार करोड़ रुपये के टू जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले से ले कर 70 हजार करोड़ रुपये के राष्ट्रमंडल खेल घोटाले तक भ्रष्टाचार के अंतहीन सिलसिले में मूकदर्शक बने रहने से दरकने लगा है। अब एक लाख 86 हजार करोड़ रुपये के कोयला घोटाले ने उस मुलम्मे को पूरी तरह तार-तार ही कर दिया है। टू जी स्पेक्ट्रम घोटाले का ठीकरा द्रमुक कोटे के संचार मंत्रियों दयानिधि मारन और ए.के. राजा के सिर तथा राष्ट्रमंडल खेल घोटाले का ठीकरा सुरेश कलमाड़ी के सिर फोड़ कर अपनी जिम्मेदारी और जवाबदेही से बच निकलने की कोशिश करने वाले मनमोहन कोयले की कोठरी में ऐसे फंसे हैं कि बेदाग निकलना नामुमकिन है। दरअसल टू जी स्पेक्ट्रम लाइसेंस की तरह कोयला खदानों की भी बिना नीलामी चहेती निजी कंपनियों को बंदरबांट की गयी, जिससे सरकारी खजाने को एक लाख 86 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। कोयला खदानें भी दो-चार नहीं, बल्कि 194 आवंटित की गयीं। वर्ष 2004 से 2009 के बीच अमूल्य प्राकृतिक संसाधनों की ये रेवड़ियां चहेती कंपनियों को बांटी गयीं। बेशक मनमोहन सिंह सरकार के आठ साल के कार्यकाल में खुली लूट का यह पहला मामला नहीं है, पर खुद प्रधानमंत्री को कठघरे में खड़ा कर देने वाला यह पहला घोटाला अवश्य है। जिस अवधि में कोयला खदानों की यह बंदरबांट हुई, उसमें ज्यादातर समय कोयला मंत्रालय मनमोहन स्वयं संभाल रहे थे यानी इस बार बचने का गठबंधन धर्म की मजबूरी बता सकने जैसा कोई चोर दरवाजा भी नहीं है। यही कारण है कि टू जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में 'कैग' की रपट के बाद ही संचार मंत्री ए.के. राजा का इस्तीफा ले लेने वाले मनमोहन अब कोयला घोटाले में नैतिकता की मिसाल पेश करने से भागते नजर आ रहे हैं।

कैसे-कैसे मंत्री

स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े घोटाले के लिए जिम्मेदार और जवाबदेह होने के बावजूद जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह हर सवाल का संतोषजनक जवाब होने का दम भरते हैं तो फिर जाहिर है कि उनके मंत्री भी कुछ भी बोलने के लिए स्वतंत्र हैं। फिर मनमोहन मंत्रिमंडल में तो बड़बोले मंत्रियों की संख्या भी अच्छी-खासी है। सबसे पहले ताजातरीन कोयला घोटाले की ही बात करें। पेशे से वकील, पर एक साथ दो महत्वपूर्ण मंत्रालयों, मानव संसाधन विकास और संचार का कार्यभार संभाल रहे कपिल सिब्बल ने बिना जांच ही प्रधानमंत्री को 'क्लीन चिट' देते हुए फरमाया  कि वह अपने प्रधानमंत्री को अच्छी तरह जानते हैं,  मनमोहन सिंह कभी कुछ गलत नहीं कर सकते। इसलिए उन पर आरोप लगाने वाले ही गलत हैं। यह वही सिब्बल हैं, जिन्होंने टू जी स्पेक्ट्रम आवंटन से सरकारी खजाने को एक लाख 76 हजार रुपये के नुकसान के 'कैग' के आकलन को नकारते हुए शून्य क्षति का दावा किया था। ऐसे में पेशे से वकील एक और मंत्री सलमान खुर्शीद चाटुकारिता स्पर्धा में कैसे पीछे रह जाते? सो, उन्होंने फरमाया कि मनमोहन सिंह का प्रधानमंत्री होना देश का सौभाग्य है और कोयला घोटाले में उनका इस्तीफा मांगते हुए विपक्ष द्वारा संसद ठप्प करना दुर्भाग्यपूर्ण। इसी बीच एक और बड़बोले मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के बोलों ने भी जनता के जख्मों पर खूब नमक छिड़का। सपा से कांग्रेस में आये बेनी ने फरमाया कि वह तो महंगाई से खुश हैं, क्योंकि किसानों को इससे फायदा हो रहा है, और यही कांग्रेस व इस सरकार की नीति है। आश्चर्य है कि किसान आत्महत्या कर रहे हैं, महंगाई की मार से त्रस्त आम आदमी त्राहि-त्राहि कर रहा है, पर महंगाई के मोगेंबो बेनी फिर भी खुश हैं।

कांग्रेस की परंपरा

केन्द्र की संप्रग सरकार से अब तक तीन केबिनेट मंत्रियों समेत कुल चार मंत्री विवादों के चलते विदा हो चुके हैं- ए. के. राजा, दयानिधि मारन, वीरभद्र सिंह और शशि थरूर। हरियाणा में जोड़तोड़ से बनी भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार भी उसी राह पर चलती नजर आ रही है। अगर संसदीय सचिव जिलेराम शर्मा को भी गिन लें तो अब तक तीन मंत्री बेआबरू हो कर विदा हो चुके हैं। सबसे पहले ओमप्रकाश जैन गये थे, जिलेराम शर्मा के साथ। इन दोनों पर आरोप था कि नौकरी लगवाने के  लिए पैसे लिये और नौकरी नहीं लगने पर जब पैसे वापस मांगे गये तो देने वाले शख्स को ही मरवा दिया। हुड्डा सरकार का तीसरा विकेट अब गोपाल गोयल कांडा के रूप में गिरा है। कांडा जिस कांड में गये हैं, वह उनकी बंद हो चुकी एयरलाइंस की पूर्व एयरहोस्टेस गीतिका शर्मा की आत्महत्या का है। गीतिका ने अपने सुसाइड नोट में कांडा और उसकी कम्पनी की एक महिला अधिकारी पर आत्महत्या के लिए मजबूर करने का गंभीर आरोप लगाया है, पर हरियाणा से दिल्ली तक हासिल सत्ता की सरपरस्ती के चलते दिल्ली पुलिस कांडा को गिरफ्तार नहीं कर पायी और उसने फिल्मी अंदाज में पुलिस थाने पहुंच कर समर्पण कर दिया। बहरहाल, अब हरियाणा के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं चल पड़ी हैं कि अगला नंबर किसका है?

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