बेटियों ने बढ़ाई देश की शान
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भारतीय महिला कबड्डी टीम ने जीता पहला विश्व कप
कन्हैया लाल चतुर्वेदी
पटना में आयोजित महिला कबड्डी का पहला विश्व कप जीतने के बाद भारतीय टीम की कप्तान ने सौ फीसदी सही कहा कि “कबड्डी भारत की आत्मा में बसता है, यह खेल क्रिकेट से भी ज्यादा लोकप्रिय हो सकता है।” कबड्डी का खेल सचमुच भारत की अंतरात्मा का प्रकटीकरण है। मरने के बाद फिर से जन्म लेने, अपना कर्म करने और पुनर्जन्म के लिये फिर मर जाने का दर्शन इस खेल में प्रकट हुआ है। इसीलिये जहां सड़क नहीं जाती, बिजली भी नहीं है और दूर-दराज में बसा है ऐसे छोटे गांव में भी कबड्डी खेली जाती है, खेली जा सकती है, क्योंकि जमीन के समतल टुकड़े के अतिरिक्त किसी और वस्तु की आवश्यकता इस खेल में नहीं है। यह आम आदमी का खेल है और इसी कारण भारत की आत्मा में बसता है।
ऐसे इस खेल का पहला महिला विश्व कप पटना में एक से चार मार्च तक आयोजित किया गया। सोलह देशों की टीमें इसमें भाग लेने आईं थीं। इन्हें चार-चार के समूहों में बांटा गया। पहले समूह में भारत, दक्षिण कोरिया, ताईवान और मैक्सिको। दूसरे में थाईलैण्ड, जापान, तुर्कमेनिस्तान तथा कनाडा। तीसरे में बंगलादेश, श्रीलंका, मलेशिया और इटली। चौथे समूह में ईरान, इंडोनेशिया, नेपाल तथा अमरीका की महिला टीमों को रखा गया था। लीग मुकाबलों के बाद प्रत्येक समूह की पहली दो टीमें “नॉक-आउट” दौर में पहुंचीं, जहां भारत ने इंडोनेशिया को थाईलैण्ड ने श्रीलंका को, जापान ने बंगलादेश को और ईरान ने दक्षिण कोरिया को शिकस्त दी।
सेमी फाइनल में भारत ने जापान को और ईरान ने थाईलैण्ड को पछाड़ कर अन्तिम मुकाबले में खेलने का हक प्राप्त किया। बिहार की राजधानी पटना के पाटलीपुत्र क्रीड़ांगन के रोशनी से जगमगाते इंडोर स्टेडियम में हुआ यह मुकाबला शानदार और रोमांचक कबड्डी का नमूना था। चेहरे के अतिरिक्त पूरा शरीर ढके ईरानी लड़कियों ने आक्रमण और रक्षण की शानदार बानगी प्रस्तुत की। ईरान की इसी टीम को एशियाई खेलों में भारत मात्र एक अंक से हरा पाया था। टीम की कप्तान गजल खलाज ने एक बार तो भारतीय खिलाड़ियों के पसीने छुड़ा दिये। लेकिन लम्बे कद की भारतीय कप्तान ममता पुजारी ने आक्रामक “रेड” डालते हुए मध्यांतर तक भारत को 19ः11 की बढ़त दिला दी। दीपिका जोजफ, प्रियंका नेगी और अभिलाषा म्हात्रे ने भी कप्तान का अच्छा साथ दिया।
मध्यांतर के बाद ईरान ने दबदबा बना कर 8 अंक बटोरे। हजर शहीन और कमाल अघेई ने कुछ अच्छी पकड़ें कीं वहीं सिदिगेह ने बोनस अंक जुटाये। भारत ने भी 6 अंक जुटा फाइनल मुकाबला 25ः19 से जीत कर नया इतिहास रचते हुए विश्व-कप ट्राफी पर सबसे ऊपर अपना नाम लिखा लिया। दूसरा विश्व कप अब 2014 में कोरिया में होगा। विजेता भारतीय टीम को मेडल और ट्राफी राज्य के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने दिये, जबकि उपविजेता ईरान को पटना के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने ट्राफी प्रदान की। कांस्य पदक और ट्राफी जापान और थाईलैण्ड दोनों को क्रमश: जनार्दन सिंह गहलोत तथा बिहार के शिक्षा मंत्री पी.के.शाही ने प्रदान किये। प्रतियोगिता का उद्घाटन मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने खुले स्टेडियम में लगभग चालीस हजार दर्शकों की उपस्थिति में किया। मुख्यमंत्री ने 3 मार्च को “अंतिम आठ” के मुकाबले भी देखे।
बिहार के शताब्दी वर्ष के अवसर पर हुआ यह आयोजन वास्तव में ही बड़ा भव्य था तथा किसी विश्व-प्रतियोगिता की गरिमा के अनुकूल था। चारों दिन दर्शकों की भारी भीड़ रही। फाइनल के दिन बाहर लगी स्क्रीन पर मुकाबला देखने के लिए स्टेडियम में मौजूद लोगों से अधिक संख्या में लोग मौजूद थे। सभी विदेशी टीमों ने ऐसा खेल दिखाया मानो वर्षों से वे कबड्डी खेल रही हों। वाकई यह प्रसन्नता की बात है कि भारत के अतिरिक्त 32 अन्य देशों की लड़कियां कबड्डी खेलती हैं और तकनीकी दक्षता में भारत से कम नहीं हैं। जापान की अया ओकोई (कप्तान) तथा यूमी कनेको की दक्षता देखते ही बनती थी। इसी तरह थाईलैण्ड की नेम्फून तथा माईवान का कमाल देख कर लगता ही नहीं था कि जो खेल रहीं हैं वे लड़कियां हैं, पुरुष नहीं हैं।
कबड्डी की इस लोकप्रियता के कारण ही एशियाई खेलों में पुरुष और महिला कबड्डी शामिल हैं। इसका पूरा श्रेय “भारतीय एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन” को है। इसके अध्यक्ष जनार्दन सिंह गहलोत ने बताया कि 2020 के ओलम्पिक खेलों में कबड्डी भी होगी। श्री गहलोत “अन्तरराष्ट्रीय कबड्डी संघ” के भी अध्यक्ष हैं। द
भारतीय महिला कबड्डी टीम की कप्तान से साक्षात्कार
भारत की आत्मा में बसती है कबड्डी
-ममता पुजारी
थ् फाइनल मुकाबले में ईरान के खिलाफ आपने क्या रणनीति बनाई थी?
द ईरान की टीम काफी सशक्त है। एशियाई खेलों में सेमी-फाइनल में हम उन्हें बड़ी मुश्किल से एक अंक से हरा पाये थे। लेकिन पिछड़ने पर उनका संतुलन डगमगा जाता है इसलिये हमने शुरू में ही उन पर अच्छी बढ़त बना लेने की रणनीति बनाई, जो सफल रही ।
थ् लड़कियों के अन्य खेल होते हुए भी आपने कबड्डी की ओर रुख क्यों किया?
द आम धारणा है कि कबड्डी पुरुषों का खेल है, लेकिन अब यह सोच बदल रही है। अभिभावकों को अपनी लड़कियों को कबड्डी खेलने के लिये प्रोत्साहित करना चाहिये।
थ् आपने कबड्डी को ही क्यों चुना, जबकि आजकल क्रिकेट का बोलबाला है?
द कबड्डी का खेल भारत के लोगों की आत्मा में बसता है। जैसा शारीरिक, मानसिक और आत्मिक विकास कबड्डी खेलने से होता है वह किसी अन्य खेल से नहीं। यह खेल क्रिकेट से अधिक लोकप्रिय हो सकता है यदि लोगों की सोच कुछ बदल जाये और इसे जनता का समर्थन मिल जाये।
थ् आपकी राय में यह आयोजन कैसा रहा?
द इस पहले महिला विश्व-कप का आयोजन विश्व-स्तर का ही था। भव्य आयोजन के लिये बिहार सरकार की जितनी प्रशंसा की जाये कम है। दर्शकों ने भी खेल का पूरा आनंद लिया और लगातार सभी खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया।
थ् कबड्डी का अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर आप क्या भविष्य देखती हैं?
द वह दिन अब ज्यादा दूर नहीं जब यह खेल ओलम्पिक खेलों में शामिल होगा। यहां आयोजित विश्व-कप इस दिशा में एक मजबूत कदम है।
कपिल सिब्बल मक्का के इमाम की शरण में
दिल्ली के चांदनी चौक क्षेत्र से निर्वाचित एवं केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल इन दिनों कांग्रेस के एक सशक्त मुस्लिम समर्थक चेहरे के रूप में खुद को पेश करने में दिन-रात एक कर रहे हैं। उन्हें खतरा है कि 2014 के लोकसभा चुनाव जीतने में उन्हें परेशानी हो सकती है। शायद यही कारण है कि उन्होंने हाल में ही मक्का के इमाम अबु इब्राहिम सउद अल श्रेयम से न सिर्फ मुलाकात की, बल्कि रामलीला मैदान में आयोजित नमाज पढ़ने के कार्यक्रम में भी शामिल हुए। वैसे तो कपिल सिब्बल आमतौर पर कोट-पैंट में दिखाई देते हैं। मगर इस अवसर पर अपने मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने के लिए उन्होंने विशेष रूप से न सिर्फ कुर्ता-पाजामा पहन रखा था, बल्कि नमाजी टोपी भी ओढ़ रखी थी।
बाद में सिब्बल को इस बात से काफी परेशानी रही कि रामलीला मैदान में आयोजित नमाज में उनकी उपस्थिति का किसी मुस्लिम समाचारपत्र ने उल्लेख तक नहीं किया। कहा जाता है कि मंत्री महोदय ने अपने कुछ चहेतों पर इस बात के लिए दबाव डाला कि वे किसी तरह से मक्का के इमाम के सम्मान में आयोजित इस समारोह में उनकी उपस्थिति के बारे में खबर को कम से कम उर्दू अखबारों में जरूर छपवाएं ताकि देश के मुसलमानों में उनका रंग जम सके।
यहां पर यह उल्लेखनीय है कि कपिल सिब्बल ने अपने चुनाव क्षेत्र में तमाम नियमों को ताक पर रखते हुए उर्दू भाषा संवद्र्धन परिषद एवं मौलाना आजाद उर्दू विश्वविद्यालय आदि अल्पसंख्यक संगठनों के दो दर्जन से अधिक केंद्र स्थापित करवाए हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने राष्ट्रीय उर्दू भाषा संवद्र्धन परिषद के सदस्यों में दिल्ली के उन अल्पसंख्यकों को चुन-चुन कर मनोनीत किया है, जो कि अगले चुनाव में चांदनी चौक क्षेत्र में उनकी हवा बनाने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं।
दिल्ली के मुस्लिम क्षेत्रों में इस बात की भी काफी आलोचना हो रही है कि इन दिनों कपिल सिब्बल एक स्वयंभू ज्योतिषी के काफी निकट हैं, जिसने बाबरी मस्जिद ध्वस्त किए जाने के बाद दिल्ली के निजामुद्दीन क्षेत्र में इमामों का एक सम्मेलन आयोजित करवाकर तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव को सम्मानित करवाया था। द प्रतिनिधि











