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तीस्ता की कसक
6-7 सितम्बर को बंगलादेश के दौरे पर गए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जब ढाका के शाहियालाल हवाई अड्डे पर लाल कालीन पर उतरकर उन्नीस तोपों की सलामी के बाद बंगलादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ बातचीत की मेज पर बैठे तब बंगलादेशी अधिकारियों के चेहरों पर वह जोश नहीं था जो मनमोहन सिंह के आने की खबर से पैदा हुआ था। बंगलादेश को उम्मीद थी कि मनमोहन-शेख हसीना के बीच बाकी करारों के अलावा तीस्ता और फेनी नदियों के पानी के बंटवारे को लेकर महत्वपूर्ण समझौता हो जाएगा। उन्हें तीस्ता का 50 फीसदी पानी मिल जाएगा और करोड़ों टका की लागत वाली दशकों से निष्क्रिय पड़ी तीस्ता सिंचाई परियोजना में जान आ जाएगी। अगर यह करार हो जाता तो इसे शेख हसीना सरकार की सर्वोत्तम उपलब्धि के रूप में प्रचारित करने की पूरी तैयारी कर ली गई थी। लेकिन तीस्ता ने बंगलादेशियों में एक कसक पैदा करके बुझा दी। दरअसल प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस बात पर अड़ गई थीं कि तीस्ता करार से प्रदेश को नुकसान होगा, लिहाजा डा. सिंह के साथ ढाका जाने वालों की सूची में से उन्होंने अपना नाम भी कटवा लिया था। मनमोहन सरकार ममता के लिए वैसे ही पलक-पांवड़े बिछाए रहती है, सो तय हो गया कि फिलहाल तीस्ता मामले को यथावत रहने दिया जाए।
लेकिन बंगलादेश के अखबार चुप नहीं बैठे। व्द डेली स्टारव् और व्प्रोथोम आलोव् जैसे बड़े अखबारों में नाराजगी भरे लेख और सम्पादकीय लिखे गए कि ममता ने अड़ंगा लगा दिया। मनमोहन सिंह के ढाका पहुंचने से कुछ ही घंटे पहले बंगलादेश के विदेश सचिव मिजारुल कैस ने ढाका स्थित भारतीय उच्चायुक्त रजीत मित्तर को बुलाकर पूछा था कि आखिर नई दिल्ली उस तीस्ता करार से पीछे क्यों हट रही है जिसे करने के लिए उसने पहले वायदा किया था। रजीत मिजारुल का मिजाज बिगड़ता देखते रहे। मनमोहन-शेख हसीना के बीच जो दस करार हुए वे ढाका में तीस्ता के बिना फीके माने जा रहे हैं।
सरकोजी ने कहा- व्हम साथ-साथ हैंव्
नई दिल्ली में 7 सितम्बर को उच्च न्यायालय के बाहर हुए बम विस्फोट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी ने कहा कि यह बेहद घिनौना आतंकी हमला था। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भेजी अपनी चिट्ठी में सरकोजी ने लिखा कि व्उनका देश भारत के साथ है और हम मिलकर इस बर्बर आतंकवाद से लड़ेंगे।व् सरकोजी ने लिखा, व्ऐसे वक्त में जब नई दिल्ली एक बार फिर घिनौने आतंकी हमले का निशाना बनी है, दसियों निर्दोष जिसके शिकार बने हैं, मैं फ्रांस और अपनी ओर से हार्दिक संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। हम पूरी तरह आपके साथ हैं।… फ्रांस इस संकट की घड़ी में भारत के साथ है। आतंकवाद के खिलाफ युद्ध हमें एक करता है और हम (इसे समाप्त करने के) अपने प्रयास जारी रखेंगे।व्
कांगो जेल पर हमला, एक हजार से ज्यादा कैदी भागे
7 सितम्बर को कांगो की लुबुम्बाशी जेल पर सशस्त्र नकाबपोशों ने हमला बोल दिया और इस अफरातफरी में जेल से एक हजार से ज्यादा कैदी निकल भागे। नकाबपोशों ने यह हमला विद्रोही नेता गिडियोन माटुंगा को जेल से भगाने के लिए बोला था, जिसमें वे कामयाब रहे, माटुंगा भाग निकला। हमलावरों ने जेल के पहरेदारों और पुलिसकर्मियों पर अंधाधुंध गोलियां दागनी शुरू कर दीं और इससे पहले कि पुलिस वाले संभल पाते वे माटुंगा को निकाल ले जाने में कामयाब हो गए, जिसके साथ एक हजार से ज्यादा कैदी भी भाग खड़े हुए। माटुंगा कांगो के सबसे बड़े खनन प्रांत काटांगा के विद्रोही गुट का पूर्व नेता है जिसे 2009 में मानवता के विरुद्ध अपराधों के लिए सजा दी गई थी। तांबे की खानों से भरे काटांगा में कई अंतरराष्ट्रीय कम्पनियों का कारोबार चलता है। बहरहाल, काटांगा की स्थानीय सरकार भागे कैदियों को फिर से पकड़ने के लिए जी-जान से जुटी हुई है।
सिंध सूबे में पढ़ाएंगे चीनी
पाकिस्तान किस कदर चीन के आगे बिछा-बिछा जा रहा है उसकी राजनीतिक, आर्थिक, रणनीतिक, औद्योगिक क्षेत्रों में तो आए दिन मिसालें मिलती रही हैं, पर हद तो यह है कि अब पढ़ाई-लिखाई के क्षेत्र में भी चीनी पाकिस्तानियों के दिमाग पर हावी होते जा रहे हैं। पाकिस्तान के सिंध सूबे की सरकार ने फरमान जारी किया है कि सन् 2013 से सूबे के स्कूलों में चीनी भाषा पढ़ना अनिवार्य होगा। चीनी भाषा का सबक छठी से शुरू कर दिया जाएगा। सूबे की सरकार की साफगोई देखिए कि उसने इस फरमान के पीछे वजह पाकिस्तान की चीन के साथ नजदीकियों को ही बताया है। अभी मई में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने चीन को अपने देश का व्सबसे अच्छा दोस्तव् बताया था। कुछ विशेषज्ञ सिंध सरकार के इस कदम को लेकर शंका जाहिर कर रहे हैं, क्योंकि न तो पर्याप्त पढ़ाने वाले हैं, न साधन-सामग्री है और सीमित संसाधनों के चलते इन सब पर भारी पैसा खर्च करना पड़ेगा।
सिंध के शिक्षा मंत्री पीर मंजर उल हक फरमाते हैं कि यह कदम चीन के आर्थिक महाशक्ति के तौर पर दुनिया में बढ़ते किरदार को झलकाता है। इसमें आने वाले लंबे समय के लिए पाकिस्तान का फायदा है। चीन से उनके कारोबारी, तालीमी और दूसरे रिश्ते बढ़ रहे हैं तो जाहिर है उनके बच्चे चीनी भाषा जानकर कल बढ़िया काम कर सकते हैं। हक का ऐसा मानना है। सूबे की सरकार चीनी पढ़ने वालों को खास सहूलियतें भी देगी, विदेशी व्स्कालरशिपव् वगैरह।
फिलहाल इसके लिए चीनी पाठ्यक्रम बनाने का सिलसिला चल रहा है और योजना को अमल में लाने के लिए चीन की मदद की आस लगाई जा रही है। उधर पढ़ाने वाले कहते हैं कि यह उन पर और बच्चों पर और ज्यादा बोझ लाद देगा। बच्चे पहले से ही अनिवार्य विषयों के तौर पर अंग्रेजी, उर्दू और सिंधी भाषा पढ़ रहे हैं।
ब्रिटेन के स्कूलों में जासूस रोकेंगे इस्लामी उग्रवाद!
ब्रिटेन की सरकार ने स्कूलों में से इस्लामी उग्रवाद और उग्रवादी तत्वों को छानकर निकाल बाहर करने के लिए अपने सुघड़ गुप्तचर तंत्र एम.आई.5 के पूर्व जासूस तैनात किए हैं। ब्रिटेन के मंत्री से लेकर संतरी तक को चिंता है कि मुस्लिम भड़काऊ तत्व और उन्मादी तत्व स्कूलों में बच्चों के बीच नफरत के बीज बो रहे हैं, इसीलिए इस्लामी उग्रवाद के जानकार पूर्व जासूसों की एक अलग से इकाई बनाकर उन्हें स्कूलों में यह काम सौंपा गया है। अब ये जासूस पता लगाएंगे कि कहीं कोई सबक पढ़ने या पढ़ाने वाला मजहबी उन्माद के बीज तो नहीं रोप रहा है।











