'साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा रोकथाम विधेयक' का देशभर में विरोध
|
गहरी साजिश है यह विधेयक
-ह्मदयनारायण दीक्षित, वरिष्ठ पत्रकार
संघीय ढांचे के लिए खतरा : पुंज
कोलकाता एवं असम से बासुदेब पाल, रांची से मंगल पाण्डेय तथा कानपुर से प्रतिनिधि
राष्ट्रीय सलाहकार परिषद् द्वारा प्रस्तावित इसाम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा रोकथाम विधेयकइ का देशभर में कड़ा विरोध हो रहा है। जनता के बीच विधेयक की सच्चावर्् जाए व्स उद्देश्य से कुछ सामाजिक संगठन देशभर में व्स विषय पर चर्चा-संगोष्ठी आदि करा रहे हैं। पिछले दिनों देश में अनेक स्थानों पर ऐसी कवर्् चर्चा-गोष्ठियां सम्पन्न हुवर््ं।
कोलकाता के श्री बड़ाबाजार पुस्तकालय में इभंवरलाल मल्लावत व्याख्यानमाला के अंतर्गत व्याख्यान देते हुए वरिष्ठ पत्रकार श्री ह्मदयनारायण दीक्षित ने कहा कि विधेयक का प्रस्तावित मसौदा देश की एकता, पंथ-निरपेक्षता, सौहार्द एवं संघीय ढांचे पर भीषण प्रहार है। आतंकवाद, महंगावर्् एवं भ्रष्टाचार से त्रस्त देश को व्नके निवारण हेतु प्रभावी विधेयक की आवश्यकता थी। आश्चर्य है कि सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद ने साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने एवं हिन्दुओं को अपने ही देश में दोयम दर्जे का नागारिक बनाने वाला एक खतरनाक विधेयक प्रस्तुत करने की तैयारी की है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक बहुसंख्यक समाज को आक्रमक मानकर तैयार किया गया है जो घोर आपत्तिजनक है। यह विचारअभिव्यक्ति एवं समान नागरिक संहिता पर गहरा प्रहार है। साथ ही अंग्रेजों की भारत के बहुसंख्यक हिन्दू समाज को विभाजित करने की कुचेष्टा को आगे बढ़ाने वाला भी। प्रारम्भ में श्री जुगलकिशोर जैथलिया एवं श्री विमल लाठ ने विधेयक के खतरनाक प्रावधानों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थान पत्रिका समाचार पत्र के प्रभारी श्री राजीव हर्ष ने की, जबकि संचालन श्री अशोक गुप्ता ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन किया डा. प्रेमशंकर त्रिपाठी ने।
रा.स्व.संघ कानपुर के तत्वावधान में गत 28 अगस्त को सम्पन्न हुवर्् बुद्धिजीवियों की गोष्ठी में राज्यसभा सांसद एवं भाजपा केन्द्रीय बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के संयोजक श्री बलबीर पुंज ने प्रस्तावित इसाम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा रोकथाम विधेयकइ को देश के संघीय ढांचे के लिए खतरा बताया। उन्होंने कहा कि व्स विधेयक को उन लोगों ने तैयार किया है, जिनका देश की बहुलतावादी संस्कृति पर विश्वास नहीं है।
देश में साम्प्रदायिकता के उभार के व्तिहास का उल्लेख करते हुए श्री पुंज ने कहा कि स्वयंभू सेकुलरवादी, मुस्लिम समुदाय के कट्टरपंथी तबके को मजबूत करने में दिन-रात जुटे हैं। व्न लोगों की विषाक्त साम्प्रदायिक सोच ही पाकिस्तान के सृजन के लिए जिम्मेदार रही है। प्रस्तावित विधेयक देश के एक और विभाजन का मार्ग प्रशस्त करेगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता क्षेत्रीय संघचालक डा. वर््श्वर चंद्र गुप्ता ने की तथा विचार गोष्ठी की शुरुआत श्री वासुदेव वासवानी ने की।
वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा गत 28 अगस्त को रांची में सम्पन्न हुवर्् प्रबुद्ध नागरिक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए झारखंड के प्रांत संघचालक श्री जगन्नाथ शाही ने कहा कि वोट बैंक के लालच में इसोनिया पार्टीइ भारत के बहुसंख्यक हिन्दू समाज को अब कानूनी शिकंजे में कसने की कोशिश कर रही है। असंवैधानिक संस्था राष्ट्रीय सलाहकार परिषद द्वारा तैयार किया गया यह अलोकतांत्रिक एवं असंवैधानिक इसाम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा रोकथाम विधेयकइ वेटिकन के व्शारे पर तैयार किया गया है। व्सके चलते हिन्दू समाज अपने ही देश में विदेशी बन कर रहने को विवश होगा। उन्होंने कहा कि हिन्दुओं को अलग-थलग करने के लिए यह विधेयक केन्द्र की कांग्रेस सरकार लाने जा रही है, जिसका रा.स्व.संघ कड़ा विरोध करेगा। व्स विधेयक में समाज को बांटने के लिए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति को भी अल्पसंख्यक की श्रेणी में रखा गया है। उन्होंने कहा कि यह कानून अरब के इजिहादी कानूनइ को दर्शाता है।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए झारखण्ड उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री राजीव रंजन ने विधेयक की विधायी धाराओं का विवेचना करते हुए कहा कि वास्तव में यह विधेयक भारतीय संविधान की धज्जियां उड़ाता है। यह कानून किसी भी सभ्य समाज के लिए अत्यंत घातक है, जो कानून और न्याय के प्राकृतिक अधिकार से नागरिकों को वंचित करता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता झारखण्ड उच्च न्यायालय के अधिवक्ता श्री वी. शिवनाथ ने की। व्स अवसर पर क्षेत्र संघचालक श्री सिद्धिनाथ सिंह, महानगर संघचालक श्री मुरारीलाल पोद्दार, प्रांत सम्पर्क प्रमुख श्री शशिकांत द्विवेदी, प्रांत प्रचार प्रमुख श्री राकेश लाल सहित गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
संगोष्ठियों के अलावा विश्व हिन्दू परिषद के एक प्रतिनिधिमण्डल ने असम के राज्यपाल श्री जे.वी. पटनायक से भेंट कर प्रस्तावित विधेयक के विरोध से संबंधित ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमण्डल ने विधेयक को पारित होने से रोकने का अनुरोध भी महामहिम राज्यपाल से किया।











