| दिंनाक: 04 May 2009 00:00:00 |
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गत 15 मार्च को मेरठ (उत्तर प्रदेश) में धर्मरक्षा मंच की संत यात्रा का स्वागत किया गया। इस अवसर पर आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए मंच की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य तथा गुरुकुल प्रभात आश्रम के कुलाधिपति स्वामी विवेकानन्द ने कहा कि जब राष्ट्र पर संकट आता है तब राजा संतों की शरण में जाते हैं पर जब राजा ऐसा न करें तो संतों को जनता के पास चलकर आना होता है। इससे पूर्व अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी हंसदास ने धर्म रक्षा मंच के 11 सूत्री एजेंडे को जारी करते हुए कहा कि आगामी चुनाव में जो प्रत्याशी एजेंडे को पूरा करने के लिए गंगाजल लेकर शपथ ले, उसे ही वोट दें। इस घोषणापत्र में भारत की आध्यात्मिक पहचान की पुनस्र्थापना, हिन्दुओं के मानबिन्दुओं की रक्षा गंगा-गोमाता-रामसेतु आदि राष्ट्रीय धरोहरों का संरक्षण, राम मन्दिर निर्माण, मतान्तरण, घुसपैठ और अपसांस्कृतिक प्रदूषण पर रोक, समान नागरिक संहिता लागू करना, पाठ्यक्रमों में लायी गयी पंथनिरपेक्ष विकृतियों को दूर करना तथा जिहादी-चर्च-माओवादी आतंकवाद से रक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं। इस अवसर पर शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानन्द महाराज ने धर्म व संस्कृति की रक्षा के लिए जातिवाद व क्षेत्रवाद से ऊपर उठने का आह्वान किया। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी विवेकानन्द सरस्वती ने कहा कि राष्ट्र का भविष्य संख्याबल द्वारा तय किया जाना है, अत: हिन्दू राष्ट्र की परिकल्पना साकार करने के लिए हिन्दू मतदान शत-प्रतिशत होना चाहिए। संत शिवशंकर गिरी ने कहा कि केन्द्र की सरकार गो, गंगा, भारत माता की सुरक्षा करने में असफल है। माता की संस्कृति वाले देश में मैडम की संस्कृति हावी हो गयी है। उल्लेखनीय है कि संत यात्रा पश्चिम उत्तर प्रदेश के प्रमुख नगरों से होती हुई आगामी 24 मार्च को हरिद्वार पहुंचेगी।द वि.सं.के.,मेरठ27