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-बृन्दावन गोस्वामी,
अध्यक्ष, असम गण परिषद
असम गण परिषद के अध्यक्ष बृन्दावन गोस्वामी कभी प्रफुल्ल महंत के साथी थे और उनके मंत्रिमण्डल में शिक्षा मंत्री रहे थे। गुवाहाटी के ब्राह्मपुत्र अशोक होटल में चन्द्रबाबू नायडू के साथ पत्रकार वात्र्ता के बाद उन्होंने पाञ्चजन्य से बातचीत की। प्रस्तुत हैं उस बातचीत के प्रमुख अंश-
आई.एम.डी.टी. अधिनियम पर आपका क्या रुख है?
हमने हमेशा इसका विरोध किया, पर राजग हो या कांग्रेस, किसी भी केन्द्रीय सरकार ने इस खराब कानून को रद्द करने में मदद नहीं की। अन्तत: सर्वोच्च न्यायालय ने इसे रद्द किया, जिसका हम स्वागत करते हैं। अब सोनिया गांधी ने इसे दूसरे रूप में लागू करने का आश्वासन देकर एक बार फिर असम के लोगों की सुरक्षा और अस्मिता पर आघात किया है।
दस साल तक आपकी सरकार असम में रही, आपने बंगलादेशी घुसपैठिए निकालने के लिए क्या प्रयास किए?
विदेशी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें निकालने की जिम्मेदारी केन्द्र सरकार पर होती है। हम कुछ करना भी चाहते तो आई.एम.डी.टी. एक्ट रास्ते की बाधा था।
पिछली बार अगप का भाजपा से चुनावी समझौता था। इस बार यह क्यों नहीं हुआ?
पिछली बार समझौता नहीं सिर्फ कुछ सीटों पर तालमेल था। हम सेकुलरवादी पार्टियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। भाजपा ने 2004 में संविधान में संशोधन कर कानून बनाया था कि यदि पति या पत्नी में से कोई एक विदेशी है तो उनकी संतान भारतीय नागरिक मानी जाएगी। इस कदम से विदेशी घुसपैठियों को मदद मिली। अपने छह साल के राज में भाजपा ने असम से अवैध विदेशी घुसपैठिए निकालने के लिए कुछ नहीं किया। वे पोटा कानून लाए, पर आई.एम.डी.टी. जैसा खतरनाक कानून रद्द करने के लिए कुछ नहीं किया। वे जो कहते हैं, उसे पूरा करने के लिए गंभीर नहीं होते।
बंगलादेश से अत्याचारों के कारण भारत में शरण लेने वाले हिन्दुओं और मुस्लिम घुसपैठियों को आप एक ही जैसा क्यों मानते हैं? दोनों में फर्क है।
अगर फर्क है तो केन्द्र सरकार ऐसे फर्क को मान्य करने वाला कानून बनाए। बंगलादेश से हिन्दू आएं या मुसलमान, उनका बोझा असम ही क्यों सहन करे? 1952 से 1972 तक बंगलादेश से आए 56 लाख शरणार्थियों को हमने स्वीकार किया। एक छोटा सा प्रान्त इससे ज्यादा लोग नहीं ले सकता।
कांग्रेस अपने संकीर्ण स्वार्थों के लिए भारत की अखण्डता, सम्प्रभुता और असम के निवासियों की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रही है। वह राजनीति का सम्प्रदायीकरण कर रही है। वह असम के लोगों को विभाजित करने के लिए साम्प्रदायिक मुद्दे उछाल रही है। उसका सामना हम सेकुलर राजनीति से ही कर सकते हैं।
बदरूद्दीन अजमल द्वारा ए.यू.डी.एफ. बनाने पर आपका क्या कहना है?
असलियत यह है कि यह सिर्फ कांग्रेस में तरुण गोगोई नेतृत्व के विरुद्ध है। अभी तक तो वे कांग्रेस का ही समर्थन करते थे। अब ए.यू.डी.एफ. से कांग्रेस को ही नुकसान होगा।
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