| दिंनाक: 06 Dec 2005 00:00:00 |
|
भारतीय प्रतिनिधिमण्डल के सामने गिरफ्तार हुए वासुदेव पाण्डेयपर सोमनाथ बाबू चुप!ब्राहमदेव उपाध्यायवेस्टइंडीज, केरैबियन सागर का एक द्वीप समूह है। इसमें इंगलिश, डच, स्पेनिश, फ्रेंच, भाषाओं के अलग-अलग उपनिवेश बने। त्रिनिदाद एवं टोबैगो द्वीप एक आर्थिक रूप सम्पन्न देश है। इस देश में “फातेल रोजाक” नामक जहाज से सर्वप्रथम भारतीय मजदूर लाए गए थे। सन् 1845 से 1917 तक यहां 1 लाख 43 हजार 939 भारतीय आए, जिसमें से 32,294 भारतीय वापस चले गए। शेष बचे भारतीयों की वर्तमान पीढ़ी इस देश की उन्नति में मुख्य भूमिका निभा रही है।इस वर्ष 30 मई को यहां “भारतीय आगमन दिवस” का 160वां वर्ष मनाने का उल्लास चारों ओर था। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय लोकसभा के अध्यक्ष श्री सोमनाथ चटर्जी 16 सदस्यीय प्रतिनिधि मण्डल के साथ विशेष रूप से उपस्थित हुए। इनमें कांग्रेस भाजपा, तेदपा, आर.एस.पी., माकपा तथा आर.पी.आई. के लोकसभा व राज्यसभा सदस्य थे। लोकसभा अध्यक्ष की धर्मपत्नी श्रीमती रेणु चटर्जी भी उनके साथ थीं। लोकसभा के महासचिव श्री जी.सी. मल्होत्रा भी साथ आए।त्रिनिदाद-टोबैगो के अन्तरराष्ट्रीय एअरपोर्ट “पिआरको” पर 29 मई को श्री सोमनाथ चटर्जी के साथ भारतीय प्रतिनिधियों का स्वागत किया त्रिनिदाद टोबैगो के लोकसभा अध्यक्ष श्री डे. सिनानन ने। इसी दिन त्रिनिदाद के प्रधानमंत्री पेट्रिक मानिंग एवं राष्ट्रपति जार्ज मैक्सवेल रिचर्ड से उनके कार्यालय में इस प्रतिनिधिमण्डल ने भेंट की। श्री वासुदेव पाण्डेय से अगले दिन की भेंट निश्चित थी।30 मई को “भारतीय आगमन दिवस” के अवसर पर कई संस्थाएं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर रही थीं। मुख्य कार्यक्रम दिवाली नगर में था। यह जगह इस देश की सबसे बड़ी संस्था इंडियन काउंसिल आफ इंडियन कल्चर का सांस्कृतिक केन्द्र है। इसी संस्था के मुख्य सभागार में आयोजित “भारतीय आगमन दिवस” की अध्यक्षता श्री सोमनाथ चटर्जी ने की। माल्यार्पण, भजन-कीर्तन के बाद मुख्य वक्ता श्री सोमनाथ चटर्जी ने बोलना प्रारंभ किया, “क्रिकेट के देश के लिए यह देश भारत में जाना जाता है। ब्राायन लारा और सचिन तेन्दुलकर क्रिकेट प्रेमियों को हर्षोल्लास से भर देते हैं। हमें विश्वास है कि सन् 2007 में यहां होने वाले विश्वकप क्रिकेट के खेल में भारत के क्रिकेट प्रेमी भी जुटेंगे।” उनका सारा भाषण क्रिकेट के ही आस-पास ही घूमता रहा। अगले दिन यहां के राष्ट्रीय समाचार पत्र “गार्जियन” ने इस शीर्षक से समाचार छापा, “विजटिंग स्पीकर टाक्स आन क्रिकेट”। ऐसा लगा जैसे सोमनाथ बाबू क्रिकेट के खिलाड़ियों के बीच ही बोल रहे हैं। भारतीय धर्म, संस्कृति, परम्परा, संस्कार-संगठन से जैसे उनका कुछ लेना-देना ही नहीं था।” सभागार में उपस्थित भारतीय मूल के लोग अचंभित थे। वे अपने भारत देश के सुगंध में लिपटी अपनी संस्कृति की प्रेरणादायक बातें सुनने आए थे। रामायण, गीता आदि ग्रन्थों की वाणी सुनने आए थे जिनके सहारे 160 वर्षों तक वे सभी प्रकार के संकटों-संघर्षों को सहते हुए अपनी आर्थिक उन्नति के साथ-साथ अपनी भारतीय संस्कृति और भारत माता के प्रति अपने श्रद्धा, संस्कार को बचाकर कर रख पाए। पर भारत के लोकसभा अध्यक्ष ने सभी को निराश किया। अब यहां के लोगों को क्या पता था कि किसी माक्र्सवादी के मुंह से धर्म, संस्कृति की बातें निकलना कितना कठिन होता है।1 जून को सोमनाथ बाबू की बैठक त्रिनिदाद के संसद भवन में देश के संसद सदस्यों के साथ थी। इस समाचार को भी यहां के समाचार पत्रों ने महत्व नहीं दिया।31 मई को त्रिनिदाद के पूर्व प्रधानमंत्री श्री वासुदेव पाण्डेय की बैठक श्री सोमनाथ चटर्जी तथा भारतीय प्रतिनिधिमण्डल के साथ होनी थी। बैठक शुरू हुई ही थी, तभी त्रिनिदाद देश की भ्रष्टाचार विरोधी शाखा के कमांडर वहां पहुंच गए। बैठक के बीच में ही खबर दी गई कि वासुदेव पाण्डेय के नाम गिरफ्तारी वारंट है। तुरन्त भारतीय प्रतिनिधिमण्डल और लोकसभाध्यक्ष श्री सोमनाथ चटर्जी बैठक स्थगित कर बाहर निकल आए। अपने निवास, होटल हिल्टन की तरफ चलने के लिए गाड़ी में बैठ गये। उधर श्री वासुदेव पाण्डेय को भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया। त्रिनिदाद सरकार ने वासुदेव पाण्डेय की गिरफ्तारी के लिए भारतीय प्रतिनिधिमण्डल के साथ चल रही बैठक के खत्म होने का भी इंतजार नहीं किया। बैठक के बीच ही इस प्रकार की गिरफ्तारी पर श्री सोमनाथ चटर्जी ने एक वक्तव्य तक देना भी आवश्यक नहीं समझा। भारतीय मूल के लोग चाहते थे कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का अध्यक्ष इस पर अवश्य कुछ बोले। पर सोमनाथ बाबू चुप! सोमनाथ बाबू को पता था कि इस देश में भारतीय मूल के लोग सताए जा रहे हैं। उन पर आक्रमण हो रहा है। मुख्य न्यायाधीश श्री सत महाराज को भी प्रधानमंत्री अपमानित कर रहे हैं। भारतीयों को यहां से भगाया जा रहा है। पर सोमनाथ बाबू से बोलने को कौन कहे, किसी भारतीय के दु:ख-दर्द को सुनने के लिए भी उन्होंने समय नहीं दिया।2 जून को यह भारतीय प्रतिनिधिमण्डल लौट गया। अब यहां के लोग उनका आना अशुभ समझ रहे हैं। श्री वासुदेव पाण्डेय की गिरफ्तारी से यहां की राजनीतिक स्थिति डांवाडोल हो गई है। भारतीय मूल के लोगों ने बैठकें, सभाएं करनी शुरू कर दी हैं। अभी तक तो बाहर से स्थिति शांत दिख रही है लेकिन भीतर ही भीतर आग सुलग रही है। त्रिनिदाद में गृहयुद्ध कब भड़क उठे, कहा नहीं जा सकता। “भारतीय आगमन दिवस” पर श्री सोमनाथ चटर्जी की उपस्थिति में जो घटना त्रिनिदाद में घटी, उससे भारतीय मूल के सभी लोग हतप्रभ हैं। कारण क्या हैं, इसी खोज में लगे हैं। सोमनाथ बाबू त्रिनिदाद सरकार के निमंत्रण पर आए थे, फिर यहां की सरकार ने इतना अशोभनीय कदम क्यों उठाया? “मीडिया” ने उनके सभी कार्यक्रमों का बहिष्कार क्यों किया? क्या इससे भारत का अपमान नहीं हुआ? इन प्रश्नों का उत्तर यहां के सभी भारतीय मूल के लोग खोजने की कोशिश कर रहे हैं। पर उत्तर तो भारत में रहने वाले भारतीयों और भारत सरकार को भी खोजना है।NEWS