| दिंनाक: 06 May 2005 00:00:00 |
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उत्तराञ्चलगोलमाल का खेल-राम प्रताप मिश्रओलम्पिक संघ के महासचिव सरदार जी.एस.कोहली, सबसे बाएं हैं के.पी. सिंह व अन्यइन दिनों उत्तराञ्चल में खेल घोटाला की खासी चर्चा है। उस पर भी सरकार की एक काबीना मंत्री तथा खेल मंत्री द्वारा घोटाले के आरोपी को बचाने के प्रयासों की चर्चा जोरों पर है। पुख्ता सबूतों व दस्तावेजों के बावजूद कुछ दिन पूर्व जांच अधिकारी को यह कहकर बदल दिया गया कि उक्त जांच अधिकारी एक खेल संघ से सम्बधित है, इसलिए उसके द्वारा जांच नहीं की जा सकती।उल्लेखनीय है कि उत्तराञ्चल विधानसभा में भाजपा नेता प्रकाश पन्त ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा अनुदान स्वरूप खेल संघ को दिए गए 15 लाख रुपए का गोलमाल जिस ढंग से किया गया है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। राज्य में उत्तराञ्चल ओलम्पिक एसोसिएशन के खातों में जिस तरह गड़बड़ी की गई, वह गंभीर चिंता का विषय है।सूत्रों के अनुसार राज्य में खेल भावना को बढ़ाने के लिए “उत्तराञ्चल ओलम्पिक संघ” का गठन किया गया था। इसके अध्यक्ष राजीव मेहता, महासचिव सरदार जी.एस. कोहली और कोषाध्यक्ष एल.पी.सुन्द्रियाल बनाए गए थे। दिसम्बर, 2004 में देहरादून, हल्द्वानी तथा काशीपुर में द्वितीय उत्तराञ्चल ओलम्पिक खेल सम्पन्न कराए गए। इसका समापन राजधानी देहरादून में हुआ। 18 फरवरी, 2004 की सायं मुख्यमंत्री श्री नारायण दत्त तिवारी ने मुख्य अतिथि के रूप में समापन समारोह के दौरान उत्तराञ्चल ओलम्पिक संघ को खेल भावना बढ़ाने के लिए 15 लाख रुपए देने की घोषणा कर दी। शीघ्र ही ओलम्पिक संघ को 15 लाख रुपए मिल भी गए। यहीं से शुरू हुई सरकारी धन की बंदरबाट।संघ के अध्यक्ष राजीव मेहता ने महासचिव जी.एस. कोहली से खाली चेकों पर दस्तखत करने के लिए कहा। कोहली द्वारा इनकार करने पर कोषाध्यक्ष से खाली चेकों पर दस्तखत करा लिए। इस घटनाक्रम की जानकारी देहरादून के एक खेल प्रेमी अरुण कुमार कौशिक को लगी। उन्होंने इस घोटाले की शिकायत उच्च अधिकारियों से की। मामले की गूंज विधानसभा तक पहुंची, जिसमें यह कहा गया कि खेल प्रतिभाओं के प्रोत्साहन के लिए मुख्यमंत्री द्वारा खेल संघ को 15 लाख रुपए दिये गए लेकिन यह पैसा केवल अध्यक्ष तथा उनके सहयोगियों में बंट गया। यूनियन बैंक आफ इंडिया, देहरादून में संघ के खाते से जो लेन-देन किया गया, वह काफी चौंकाने वाला है। इस खाते में 15 मार्च, 2004 को राजीव मेहता के नाम पर चेक सं. 0952859 के माध्यम से 6 लाख तथा 16 मार्च को श्रीमती दीपा मेहता के नाम पर चेक सं. 0952858 के माध्यम से 5 लाख रु. निकाले गए। इस प्रकार उत्तराञ्चल ओलम्पिक संघ के अध्यक्ष ने अपने तथा अपनी पत्नी के नाम पर 11 लाख रु. निकाल लिए। इसी प्रकार 29 मार्च को 50 हजार निकाला गया। उत्तराञ्चल के 13 जनपदों से आने वाली टीमों के नाम पर भी काफी राशि हड़पी गई है। श्री कौशिक के अनुसार उन्होंने इसके लिए उत्तराञ्चल खेल विभाग के पदाधिकारियों को भी पत्र लिखा, जिस पर गढ़वाल मण्डल के आयुक्त सुभाष कुमार को जांच सौंपी गयी।खेल मंत्री प्रीतम सिंह-क्या खेल-खेल रहे हैं?जांच अधिकारी ने उत्तराञ्चल शासन के सचिव श्री एन.एन. प्रसाद को एक पत्र भेजा, जिसमें उन्होंने इस घोटाले का उल्लेख किया है। उन्होंने यह भी लिखा है कि ओलम्पिक संघ के अध्यक्ष को आधा दर्जन बार अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया लेकिन राजीव मेहता द्वारा जांच में कोई सहयोग नहीं दिया गया। जांच अधिकारी ने अपने पत्र में लिखा है कि प्रथम दृष्ट्या खेल आयोजनों में भारी अनियमितता पाई गयी है। पिथौरागढ़ की जिम्नास्टिक टीम ने खेलों में भाग नहीं लिया, किन्तु उसके नाम पर काफी खर्च दिखाया गया। इसी तरह जनपद चमोली की कई टीमों ने भाग नहीं लिया। रुद्रप्रयाग की केवल फुटबाल टीम ने ही भाग लिया, जबकि उत्तराञ्चल ओलम्पिक संघ ने ताईक्वान्डो, हाकी आदि टीमों का भी उल्लेख किया है। इसी प्रकार जनपद पौड़ी की हैण्डबाल, ताईक्वान्डो, बास्केट बाल (पुरुष/महिला) टीमों ने भाग नहीं लिया लेकिन इनके नाम पर भी संघ के खाते से काफी राशि खर्च करना दिखाया गया है। उत्तराञ्चल ओलम्पिक संघ से सम्बद्ध कई अन्य संगठनों ने भी अपनी टीमें नहीं भेजीं, किन्तु संघ के अध्यक्ष द्वारा उन्हें भी आयोजन में शामिल दिखाया गया। इस प्रकार तमाम फर्जी टीमें दिखायी गयी हैं, जिनके नाम पर अच्छी खासी रकम हड़पी गयी। जांच अधिकारी की जांच के अलावा उत्तराञ्चल खेल विभाग के वरिष्ठ निदेशक आर.के.चतुर्वेदी ने भी इस मामले में घोटाले की पुष्टि की। उत्तराञ्चल के खेल मंत्री श्री प्रीतम सिंह ने इस प्रकरण पर कहा है कि उनके संज्ञान में विभागीय लोगों के माध्यम से इस घोटाले की जानकारी आयी है, परन्तु गढ़वाल आयुक्त और जांच अधिकारी सुभाष कुमार, उत्तराञ्चल बास्केटबाल ऐसोसिएशन के अध्यक्ष हैं, इसीलिए उनसे ये जांच करवाना उचित नहीं था। वह किसी वरिष्ठ के दबाव के कारण ऐसा नहीं कर रहे हैं। यह पूछे जाने पर कि गढ़वाल मण्डल आयुक्त सुभाष कुमार को किसने जांच सौंपी, प्रीतम सिंह कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके।NEWS