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होम धर्म-संस्कृति

भद्रा काल में राखी क्यों नहीं बांधते? भद्रा कौन हैं और क्या है मान्यता?

Written byMahak SinghMahak Singh
Aug 26, 2026, 03:28 pm IST
inधर्म-संस्कृति

रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी लंबी उम्र व सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। लेकिन हिंदू पंचांग में रक्षाबंधन के दिन एक खास समय का ध्यान रखने की परंपरा है। इसे भद्रा काल कहा जाता है। मान्यता है कि भद्रा के समय राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। इसलिए लोग भद्रा समाप्त होने के बाद ही राखी बांधने का शुभ समय देखते हैं। लेकिन आखिर भद्रा कौन हैं और उनके समय में राखी बांधने से क्यों बचा जाता है? आइए जानते हैं इसके पीछे की ज्योतिषीय और पौराणिक मान्यताएं।

कौन हैं भद्रा?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा को भगवान सूर्य की पुत्री और शनिदेव की बहन माना जाता है। उनके स्वभाव को उग्र बताया गया है। धार्मिक कथाओं में कहा गया है कि भद्रा का जन्म ऐसे समय हुआ था, जब उनके स्वभाव के कारण देवताओं और दूसरे प्राणी परेशान होने लगे थे। भद्रा को शांत करने और उनके उग्र प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए उन्हें पंचांग में विष्टि करण के रूप में स्थान दिया गया। हिंदू पंचांग में करण तिथि का एक हिस्सा होता है और विष्टि करण को ही आम तौर पर भद्रा कहा जाता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार भद्रा के दौरान शुभ और मांगलिक कार्य करने से बचना चाहिए। इसी वजह से विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों की तरह रक्षाबंधन पर भी भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है।

भद्रा काल में राखी क्यों नहीं बांधते?

भद्रा को लेकर सबसे ज्यादा प्रचलित मान्यता रक्षाबंधन से जुड़ी एक पौराणिक कथा है। कहा जाता है कि रावण की बहन शूर्पणखा ने भद्रा काल में ही अपने भाई को राखी बांधी थी। इसके बाद रावण का विनाश हुआ। हालांकि, यह कथा धार्मिक लोकमान्यताओं में मिलती है और इसे ऐतिहासिक तथ्य नहीं माना जाता। एक दूसरी लोकप्रिय मान्यता राजा बलि और माता लक्ष्मी से जुड़ी है। मान्यता के अनुसार माता लक्ष्मी ने राजा बलि की कलाई पर राखी बांधी थी। वहीं कुछ लोककथाओं में भद्रा के प्रभाव को शुभ कार्यों के लिए बाधक माना गया है। इन कथाओं के आधार पर रक्षाबंधन के दिन भद्रा काल में राखी बांधने से बचने की परंपरा चली आ रही है। ध्यान देने वाली बात यह है कि इन मान्यताओं का आधार धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराएं हैं। इनके पीछे कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

यह भी पढ़ें- क्या दाहिनी कलाई पर राखी बांधने का है कोई खास कारण? जानिए धर्म से लेकर शरीर विज्ञान तक पूरी कहानी

ज्योतिष में भद्रा का क्या महत्व है?

ज्योतिष और पंचांग की गणना में भद्रा का संबंध विष्टि करण से है। एक तिथि के दो करण होते हैं और करणों की गणना सूर्य और चंद्रमा की स्थिति के आधार पर की जाती है। भद्रा हमेशा पूरे दिन नहीं रहती। इसकी अवधि पंचांग की गणना के अनुसार बदलती रहती है। यही वजह है कि रक्षाबंधन के दिन भद्रा कब शुरू होगी और कब समाप्त होगी, यह हर साल अलग हो सकता है। इतना ही नहीं, अलग-अलग स्थानों पर सूर्योदय और स्थानीय समय में अंतर के कारण शुभ समय में भी थोड़ा बदलाव हो सकता है। इसलिए राखी बांधने से पहले स्थानीय पंचांग में भद्रा की समाप्ति और राखी बांधने के शुभ मुहूर्त को देखना परंपरा के अनुसार उचित माना जाता है।

क्या भद्रा में हर काम करना मना है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार भद्रा के समय मुख्य रूप से शुभ और मांगलिक कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है। हालांकि, हर परिस्थिति में सभी कार्य पूरी तरह निषिद्ध हों, ऐसा नहीं माना जाता। कुछ विशेष कार्यों के लिए भद्रा को उपयुक्त भी माना गया है, खासकर ऐसे काम जिनका संबंध संघर्ष, प्रतियोगिता या कठोर कार्यों से हो। इसलिए भद्रा को केवल ‘बुरा समय’ कहना पूरी तरह सही नहीं होगा। ज्योतिष में इसे विशेष प्रकार के कार्यों के लिए अलग प्रभाव वाला समय माना जाता है।

राखी बांधने का सही समय कैसे तय करें?

रक्षाबंधन के दिन बहनों को पहले यह देखना चाहिए कि भद्रा किस समय तक है। भद्रा समाप्त होने के बाद उपलब्ध शुभ मुहूर्त में राखी बांधने की परंपरा है। कई पंचांगों में इसके लिए प्रदोष काल या अन्य शुभ समय भी बताए जाते हैं। अगर किसी साल भद्रा रात तक रहती है, तो राखी बांधने के समय को लेकर विशेष सावधानी बरती जाती है। ऐसे में स्थानीय पंचांग या किसी जानकार ज्योतिषाचार्य से समय की जानकारी लेना बेहतर माना जाता है।

Topics: Rakshabandhan DateRakshabandhan Kab HaiRakshabandhan date 2026What is Bhadra periodwho is BhadraRakhi auspicious time
Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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