नई दिल्ली: भारत में बांग्लादेशी घुसपैठियों को बसाने वाले नेटवर्क का खुलासा हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अवैध बांग्लादेशी व रोहिंग्या को भारत में बसाने में जुटे नेटवर्क पर शिकंजा कसते हुए पांच राज्यों के 13 ठिकानों पर छापेमारी की है। यह छापेमारी उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में हुई है। विदेशी फंडिंग के जरिए यह नेटवर्क अवैध घुसपैठियों के फर्जी दस्तावेज तैयार कराकर उन्हें भारत के अलग-अलग हिस्सों में बसा रहा था। बांग्लादेशी और रोहिंग्या को भारत में बसाने के साथ ही यह नेटवर्क उनकी आजीविका के इंतजाम भी करता था।
नेटवर्क के तार आतंकी संगठन से जुड़े होने की आशंका
इस नेटवर्क के तार आतंकी संगठन से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है। घुसपैठियों के मददगार इस नेटवर्क के साथ कुछ ट्रस्टों, स्वयंसेवी संस्थाओं और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े लेन-देन की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि कुछ स्वयंसेवी संस्थाओं और ट्रस्टों के माध्यम से छोटे-छोटे हिस्सों में बांग्लादेशी मुसलमानों को बसाने के लिए बड़ी रकम का लेनदेन किया गया। कई बैंक खातों की जांच की जा रही है। ED का कहना है कि बांग्लादेशियों को भारत में बसाने के लिए छह हजार, आठ हजार और 10 हजार की छोटी किस्तों में पैसे भेजे गए थे।
बंगाल से सोने के सिक्के जब्त…नेटवर्क के आतंकी तार की आशंका…
इस नेटवर्क के विदेशी फंडिंग के तार आतंकी संगठन से होने की आशंका जताई जा रही है। जांच एजेंसियां अब इस एंगल से भी जांच में जुट गई हैं। ED के छापों के दौरान बंगाल के कलिकापुर इलाके में स्थित हरोरा अल-जामियातुल इस्लामिया दारुल उलूम से 40 लाख रुपये नकद व 180 ग्राम सोने के सिक्के जब्त किए गए हैं। ईडी ने सहारनपुर (देवबंद), दिल्ली के जामिया नगर, हरियाणा के बल्लभगढ़, पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना, उत्तर 24 परगना व मुर्शिदाबाद और महाराष्ट्र के रायगढ़ में 13 ठिकानों पर एकसाथ छापे मारे थे।
जब्त दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच शुरू
ED ने जब्त दस्तावेज व इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। ED की यह छापेमारी 2024 में उत्तर प्रदेश में दर्ज आतंकवाद-रोधी दस्ते की प्राथमिकी पर आधारित है। जिसमें ऐसे गिरोह की बात सामने आई थी जो अवैध तरीके से रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को भारत में बसाने में जुटा था। आरोप था कि इसके लिए बांग्लादेशी और रोहिंग्या के आधार, पैन और पासपोर्ट जैसे जाली पहचान दस्तावेज बनाए जाते थे और फिर उनको देश के अलग-अलग हिस्सों में बसाया जाता था। इसके लिए विदेशी से फंडिंग भी होती थी। ATS की जांच में कुछ संस्थाओं के इसके लिए विदेशों से चंदा लेने की बात सामने आई थी।
FCRA चैनलों के माध्यम से हुई विदेशी फंडिंग
ED की यह कार्रवाई टेरर फंडिंग और अवैध घुसपैठ नेटवर्क से जुड़े ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट’ 2002 के तहत की गई है। आरोप है कि एक संगठित सिंडिकेट, रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की भारत में अवैध घुसपैठ कराता था। इस संगठित सिंडिकेट ने एफसीआरए चैनलों के माध्यम विदेशी फंड भी हासिल किया था। ED के लखनऊ जोनल ऑफिस ने यह छापेमारी गुरुवार को पश्चिम बंगाल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा सहित 13 ठिकानों पर की थी। आरोप है कि एक संगठित सिंडिकेट, रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की भारत में अवैध घुसपैठ कराता था। इतना ही नहीं इस संगठित सिंडिकेट ने एफसीआरए चैनलों के जरिए विदेशी फंड भी हासिल किया था।
















