अमेरिकी संसद तब सन्नाटा पसर गया जब तीन डेमोक्रेट सांसदों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत से आयात पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ को चुनौती देते हुए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया। यह प्रस्ताव राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा को समाप्त करने की मांग करता है, जिसका उपयोग ट्रंप ने भारत के विरुद्ध लगाए इन भारी शुल्कों को उचित ठहराने के लिए किया था।
क्या है प्रस्ताव
अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेट सांसद डेबोरा रॉस, मार्क वीसी और भारतीय मूल के सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने कल यानी 12 दिसंबर को यह प्रस्ताव पेश किया है। इसका मुख्य उद्देश्य इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत घोषित राष्ट्रीय आपातकाल को रद्द करवाना है। यही वह एक्ट है जिसके जरिए भारत पर पहले 25 प्रतिशत और फिर अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगाकर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ थोप दिया गया। इन सांसदों का तर्क है कि यह कदम अमेरिकी उपभोक्ताओं, श्रमिकों और भारत-अमेरिका संबंधों को नुकसान पहुंचा रहा है, साथ ही यह कांग्रेस के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।

क्यों लगाया था टैरिफ
ट्रंप प्रशासन ने अगस्त 2025 में भारत पर 1 अगस्त से 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया, जिसे 27 अगस्त को अतिरिक्त 25 प्रतिशत ‘सेकेंडरी’ शुल्क बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया। इसके पीछे मुख्य वजह बताई गई भारत द्वारा रूस से तेल खरीदा जाना। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप और उनके सलाहकारों ने बिना प्रमाण के इसे यूक्रेन युद्ध में मॉस्को के प्रयासों को मजबूत करने वाला बताया था। ये टैरिफ कई भारतीय उत्पादों पर लागू किए गए हैं। इन विशिष्ट उत्पादों की सूची में स्टील, एल्यूमीनियम, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल्स, ऑटो पार्ट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे प्रमुख निर्यात उत्पाद शामिल हैं, जो भारत से अमेरिका को होने वाले कुल निर्यात (लगभग 6 अरब डॉलर मासिक) का एक बड़ा हिस्सा हैं। इनसे भारत से अमेरिका का आयात सितंबर-अक्तूबर 2025 में 12-8.6 प्रतिशत गिरने की जानकारी प्राप्त हुई है।

भारत पर प्रभाव
ये टैरिफ भारत के अमेरिका निर्यात को काफी प्रभावित कर रहे हैं, क्योंकि अमेरिका भारत के लिए एक बड़ा बाजार बना रहा है। नवंबर 2025 में कुल भारतीय निर्यात 15 प्रतिशत बढ़कर 36 अरब डॉलर पहुंचा था, लेकिन यह अमेरिका से इतर देशों जैसे चीन, स्पेन में माल भेजने से संभव हुआ है। साफ पता चला है कि अमेरिका में टैरिफ बढ़ने से महंगाई बढ़ी है, अमेरिकी आयातकों पर बोझ पड़ा है और द्विपक्षीय व्यापार में तनाव फिलहाल चरम पर दिखता है। बेशक, भारत ने जवाबी कदम उठाए हैं, लेकिन ये बढ़े शुल्क वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बाधित तो कर ही रहे हैं।

मोदी-ट्रंप वार्ता
दो दिन पहले यानी 11 दिसंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच फोन पर वार्ता हुई है। सूत्रों के अनुसार, इसमें मोदी ने ट्रंप से साफ कहा है कि रूस से तेल खरीदना उसकी ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा विषय है। मोदी ने ट्रंप से टैरिफ हटाने की भी अपील की है। बताया गया है कि ट्रंप ने भारत की चिंताओं को तो सुना, लेकिन कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय व्यापार संतुलन पर चर्चा हुई। यहां यह ध्यान रहे कि मोदी और ट्रंप की यह बातचीत अमेरिकी संसद में उक्त प्रस्ताव पेश होने से ठीक पहले हुई थी।

क्या पास होगा प्रस्ताव?
प्रक्रिया के अनुसार, प्रस्ताव को पहले सदन में पेश किया जाता है, जहां स्पीकर या संबंधित कमिटी इसे विचार के लिए स्वीकार करती है। उसके बाद सामान्य बहुमत से मतदान होता है। इसे पारित करने के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का आधे से अधिक समर्थन चाहिए।
इन बिन्दुओं पर गौर करें तो अमेरिकी संसद में पेश तीन डेमोक्रेट सांसदों के उक्त प्रस्ताव के पास होने की संभावना कम ही है, क्योंकि रिपब्लिकन बहुमत ट्रंप के समर्थन में है। लेकिन यह प्रस्ताव प्रस्तुत होना एक प्रकार से प्रशासन पर दबाव तो बनाएगा ही। भारत को अमेरिका से इतर बाजार ढूंढना जारी रखना होगा। महंगाई से जूझ रहे अनेक अमेरिकी उपभोक्ता भी अपनी सरकार से मांग कर रहे हैं कि भारत पर लगाए टैरिफ हटाए जाएं। कुल मिलाकर, यह प्रस्ताव पेश होना ट्रंप की आक्रामक व्यापार नीति के खिलाफ कांग्रेस में बढ़ते असंतोष को दर्शाता है।

















