आज के समय में ज्यादातर युवा टीवी या अखबार की बजाय सोशल मीडिया से न्यूज देखते हैं। इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब शॉर्ट्स, मीम्स, ट्वीटर पोस्ट- इन सबके जरिए तुरंत खबरें मिल जाती हैं। फोन हाथ में उठाया और कुछ ही सेकंड में दुनिया भर का अपडेट। इसी वजह से सोशल मीडिया युवाओं की पहली पसंद बन गया है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सिर्फ सोशल मीडिया पर भरोसा करना हमारे लिए नुकसानदायक भी हो सकता है? चलिए समझते हैं कि सोशल मीडिया से न्यूज लेने के क्या नुकसान हैं और हमें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
खबरें अधूरी और सतही होती हैं- सोशल मीडिया पर कंटेंट छोटा और जल्दी खत्म होने वाला होता है। बड़ी खबरों को 30–60 सेकंड की रील में समेट दिया जाता है। कई बार खबर का असली कारण या पूरी जानकारी नहीं दी जाती। युवा सिर्फ घटना क्या हुई यह तो जान लेते हैं, लेकिन क्यों हुई? आगे क्या असर होगा? बैकग्राउंड क्या है? यह सब समझ नहीं पाते। नतीजा यह होता है कि हमारी जानकारी अधूरी रह जाती है और गलतफहमियां बढ़ सकती हैं।
गलत या भ्रामक खबरों का खतरा अधिक- सोशल मीडिया पर हर कोई न्यूज पोस्ट कर सकता है। बस जो देखा, उसे शेयर कर दिया। ऐसी स्थिति में गलत या आधी-अधूरी जानकारी तेजी से फैल जाती है। कई बार आकर्षक फोटो, चौंकाने वाले कैप्शन और ड्रामेटिक म्यूज़िक के कारण नकली खबरें भी सच लगने लगती हैं। सोशल मीडिया ऐप्स वही दिखाते हैं, जो आप देखना पसंद करते हैं। इसे ही इको चैंबर कहा जाता है। एक जैसी सोच वाले पोस्ट, एक जैसे विचार,बार-बार वही नजरिया। इससे दिक्कत यह होती है कि युवा दूसरी राय को नजरअंदाज करने लगते हैं। असली दुनिया में मौजूद विविधता की समझ खत्म होने लगती है। धीरे-धीरे सोच एक दायरे में बंद हो जाती है।लगातार नकारात्मक खबरें देखने से तनाव, डर, गुस्सा, बेचैनी, डिप्रेशन जैसी समस्याएँ बढ़ सकती हैं। क्योंकि सोशल मीडिया पर ब्रेक होना मुश्किल है- स्क्रॉल करो और नई खबर सामने। इंस्टाग्राम या अन्य प्लेटफॉर्म्स पर मनोरंजन वाली खबरें ज्यादा वायरल होती हैं- जैसे सेलिब्रिटी गॉसिप, मीम्स, छोटे-छोटे विवाद। वहीं देश या दुनिया से जुड़े जरूरी मुद्दे कभी-कभी पीछे छूट जाते हैं, जैसे- अर्थव्यवस्था, वातावरण, शिक्षा, राजनीति, अंतरराष्ट्रीय संबंध। इससे युवाओं का सूचना संतुलन बिगड़ जाता है। वे सोचते हैं कि जो ट्रेंड कर रहा है वही महत्वपूर्ण है, जबकि असलियत अलग होती है।












