
समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. मनमोहन वैद्य। साथ में हैं (बाएं से) कैप्टन उद्यम प्रियऋषप और डॉ. राजीव कुमार सिंह।
गत 11 अक्टूबर को पटना के राजेंद्र नगर स्थित शाखा मैदान में विजयादशमी उत्सव का आयोजन हुआ। इसे संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल के सदस्य डॉ. मनमोहन वैद्य ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी शाखाओं के माध्यम से समाज को संगठित करने का कार्य करता है।
समाज के विभिन्न क्षेत्रों में संगठनात्मक कार्यों के विस्तार के लिए संघ विचार परिवार के अनेक संगठन सक्रिय हैं। इन संगठनों के माध्यम से कर्तव्यनिष्ठ कार्यकर्ता राष्ट्रजीवन के विविध क्षेत्रों में मां भारती की सेवा में समर्पित हैं। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग संघ से लगातार जुड़ रहा है।
गत माह में जितने लोगों ने संघ से ‘ज्वाइन आरएसएस’ के माध्यम से जुड़ने की इच्छा प्रकट की, उनमें 60 प्रतिशत 20 से 30 आयु वर्ग के थे। उन्होंने कहा कि संघ ने अपने शताब्दी वर्ष में राष्ट्र निर्माण के लिए पंच परिवर्तन का लक्ष्य रखा है। इसमें सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, नागरिक कर्तव्यबोध, पर्यावरण संरक्षण और स्वदेशी आचरण शामिल हैं। सामाजिक समरसता का तात्पर्य है कि सभी जातियों, वर्गों, भाषाओं और क्षेत्रों के लोग आपस में मित्र और कुटुंब (परिवार) की तरह रहें। सभी हिंदुओं के लिए मंदिर, पानी और श्मशान एक समान हों।
कुटुंब प्रबोधन का आशय परिवार में संवाद बढ़ाने से है। उन्होंने सभी उपस्थित स्वयंसेवकों से आग्रह किया कि कम से कम सप्ताह में एक बार अपने परिवार के साथ सकारात्मक माहौल में भोजन करें। उन्होंने प्रकृति के अनुकूल जीवनशैली अपनाने तथा अपने दैनिक जीवन में स्वदेशी वस्तुओं, विचारों और परंपराओं को अपनाने का आग्रह भी किया। अपने कर्तव्यों का पालन करना राष्ट्र की सेवा है।
विजयादशमी पर्व की प्रासंगिकता पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह पर्व सत्य की असत्य पर तथा धर्म की अधर्म पर विजय का प्रतीक है। यह समाज को अन्याय के विरुद्ध खड़े होने, सद्भाव बनाए रखने और अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने की प्रेरणा देता है। समारोह की अध्यक्षता पटना महानगर संघचालक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने की।