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लाहौर में लश्कर-ए-तैयबा के टॉप आतंकी चौधरी मोहम्मद सरवर उर्फ अबू हाशिम की रहस्यमय मौत

लाहौर के मार्कज कुदेसिया में लश्कर-ए-तैयबा के वरिष्ठ आतंकी और अमेरिकी नामित चौधरी मोहम्मद सरवर उर्फ अबू हाशिम की चौथी मंजिल से गिरकर मौत हो गई।

Published by
कुलदीप सिंह

लाहौर में रविवार को एक घटना हुई जिसमें लश्कर-ए-तैयबा के टॉप आतंकी चौधरी मोहम्मद सरवर उर्फ अबू हाशिम की मौत हो गई। वो अमेरिका द्वारा नामित आतंकी था और संगठन के शुरुआती सदस्यों में से एक माने जाते थे। यह घटना मार्कज कुदेसिया नाम की इमारत में हुई।

मौत की खबर कैसे आई

सरवर मार्कज कुदेसिया की चौथी मंजिल से गिर गया। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना रहस्यमय बताई गई। पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (पीएमएमएल) के प्रवक्ता ने कहा कि वे घर से मस्जिद नमाज पढ़ने जा रहे थे तभी गिर पड़े। कुछ स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में बताया गया कि सीढ़ियों से गिरने के कारण सिर में चोट लगी और उसी से उनकी मौत हो गई। लश्कर-ए-तैयबा के डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी ने ऑडियो में पुष्टि की कि वो अस्र की नमाज के लिए मस्जिद की सीढ़ियां उतरते समय फिसल गया था।

कौन था सरवर?

वो आतंकी संगठन के वित्त और फंड जुटाने वाले काम देखता था। पंजाब प्रांत में यह काम वह पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग के नाम से करता था। ये लश्कर का राजनीतिक विंग माना जाता है। इसके अलावा वह हाफिज सैद और मौजूदा डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी दोनों का ही करीबी था। कुछ महीने पहले उसके बेटे की भी सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी।

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2016 में घोषित किया था आतकी

साल 2016 में अमेरिकी न्याय विभाग ने उसे आतंकी घोषित किया था। उस समय कहा गया था कि वह लाहौर में लश्कर का वरिष्ठ सदस्य है और 2000 के दशक की शुरुआत से सक्रिय था। जनवरी 2015 से कम से कम वे लाहौर के अमीर (प्रमुख) का पद संभाल रहा था। अमेरिका के बयान में बताया गया कि वो संगठन के बड़े नेताओं से संबंध रखता था। 2012-13 में उसने हाफिज अब्दुल रहमान मक्की के साथ काम किया था, जो लश्कर के विदेश मामलों का प्रमुख था। मक्की ने उस समय पाकिस्तान के अंदर यात्रा के लिए पैसे मांगे थे।

फंड जुटाने का काम

अमेरिकी विभाग ने यह भी बताया कि सरवर सीधे फंड जुटाने की गतिविधियों में शामिल थे। वो पाकिस्तान की औपचारिक वित्तीय व्यवस्था का इस्तेमाल करके पैसे इकट्ठा और भेजता था। उदाहरण के तौर पर 2008 में उसने व्यापारियों के दल को लश्कर की सुविधाओं पर ले जाकर दान मांगने का काम किया था।

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