
फ्रांस में पिछले कुछ दिनों की अशांति के बाद राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने टेलीविजन संबोधन में “अनियंत्रित हिंसा” की आलोचना की। देशभर में सार्वजनिक इमारतें जलाई गईं, सैकड़ों दुकानें तोड़ी और लूटी गईं। लगभग 2,400 लोगों को गिरफ्तार किया गया। सरकार संकट वार्ता कर रही है। मंत्री, अधिकारी और पुलिस पर दबाव बढ़ गया है। कुछ स्थानीय नेताओं ने इसे “राज्य की भारी विफलता” बताया।
शनिवार को देश के बड़े शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतरे। ये प्रदर्शन ज्यादातर शांत रहे। छात्र, माता-पिता, शिक्षक और मजदूर शामिल थे। मांगें मुख्य रूप से महंगाई और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी थीं। स्कूलों में ज्यादा शिक्षक चाहिए, पुरानी इमारतों की मरम्मत हो—ये मांगें हफ्तों से चल रही थीं। लोग बैनर लेकर निकले कि सरकार उनकी बात नहीं सुन रही और सार्वजनिक सेवाओं के लिए ज्यादा पैसा चाहिए। पेरिस, बोर्डो, नीस, मार्सेय समेत कई जगहों पर ये मार्च शांति से चले।
शांतिपूर्ण प्रदर्शनों से अलग कुछ समूहों ने पुलिस और अधिकारियों को चौंका दिया। वे एक जगह से दूसरी जगह घूमते रहे, सड़कें बंद कीं, आगजनी की और पुलिस से भिड़ गए। मास्क पहने लूटेरों ने मौके का फायदा उठाया। दुकानों के शीशे तोड़े और सामान उठा ले गए। पेरिस में कुछ बच्चे भी सामान लेकर भागते दिखे।
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व्यापार संघों के अनुसार 1,500 से ज्यादा दुकानें और व्यवसाय लूटे या नष्ट हुए। नुकसान करोड़ों यूरो में बताया जा रहा है।
गृह मंत्रालय के अनुसार, शनिवार को लगभग 2,400 गिरफ्तारियां हुईं। करीब 1,000 पुलिसकर्मी और जेंडरम घायल हुए, सात गंभीर रूप से। सेंट-एटिएन में 17 साल के एक लड़के का दाहिना हाथ क्राउड-कंट्रोल ग्रेनेड से उड़ गया। मुलहाउस में 17 साल की लड़की की एक आंख चली गई।
मैक्रों ने कहा कि हिंसा का कोई औचित्य नहीं। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और लूट-पाट करने वालों के बीच फर्क करना जरूरी है। उन्होंने “अल्ट्रा-लेफ्ट” समूहों और अपराधियों को दोषी ठहराया। स्थानीय अधिकारी जरूरत पड़ने पर कुछ जमावड़ों पर रोक लगा सकते हैं।
विपक्षी नेता बाएं और दाएं दोनों तरफ से गृह मंत्री लॉरां नुनेज के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। प्रधानमंत्री सेबास्तियाँ लेकोर्नु ने कहा कि सरकार हिंसा से नहीं डरेगी। जीन-ल्यूक मेलेंशों ने सरकार की तैयारियों में कमी बताई। स्पेन, इटली और पुर्तगाल में भी कुछ प्रदर्शन हुए।