
ओएसडी राजबीर घुम्मन (बाएं) और मुख्यमंत्री भगवंत मान।
चंडीगढ़। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के ओ.एस.डी. राजबीर सिंह घुम्मन के खिलाफ मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े व्यक्तियों द्वारा भ्रष्टाचार और रसूख का इस्तेमाल करने के आरोपों के संबंध में जालंधर में केस दर्ज किया है। यह घटनाक्रम सुप्रीम कोर्ट द्वारा सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सी.बी.आई.) द्वारा दर्ज किए गए केस में कोई सख्त कार्रवाई न करने के निर्देश देने के एक दिन बाद सामने आया है, हालांकि अदालत ने एफ.आई.आर. पर रोक लगाने या जांच रोकने से इंकार कर दिया था। अदालत ने पंजाब सरकार को जांच में सहयोग करने के निर्देश भी दिए थे।
यह मामला ईडी द्वारा पंजाब के डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस गौरव यादव को भेजे गए पत्राचार से उपजा है, जिसमें सरकारी तबादलों और तैनाती, टेंडर प्रक्रियाओं, प्रशासनिक मंजूरियों, गुप्त सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच और अन्य आधिकारिक फैसलों में कथित अनियमितताओं को उजागर किया गया था। यह आरोप सरकारी रियायतें देने के बदले वित्तीय या अन्य लाभों के कथित लेन-देन से संबंधित हैं।
ईडी के पत्राचार के आधार पर पंजाब पुलिस द्वारा एफ.आई.आर. दर्ज न किए जाने के बाद एडवोकेट निखिल सराफ ने स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया। 5 अक्टूबर को चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की डिवीजन बेंच ने सी.बी.आई. को एक फौजदारी केस दर्ज करने और आरोपों की जांच करने के निर्देश दिए। एजेंसी को दो महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने का भी निर्देश दिया गया था और राज्य सरकार व पंजाब पुलिस को जरूरी सहायता प्रदान करने के लिए कहा गया था।
इसके बाद सी.बी.आई. ने घुम्मन और पांच अन्य के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज की और चंडीगढ़ स्थित मुख्य मंत्री के कैंप कार्यालय समेत कई जगहों पर छापेमारी की। हालांकि सी.बी.आई. द्वारा घुम्मन को तीन बार समन भेजा गया, लेकिन वह जांच में शामिल नहीं हुए और पंजाब सरकार ने सी.बी.आई. जांच के निर्देश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
12 अक्टूबर को, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील पर सी.बी.आई. को नोटिस जारी किया लेकिन एफ.आई.आर. पर रोक लगाने से इंकार कर दिया।