पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल में मदरसा सर्विस कमीशन समाप्त, स्कूल सर्विस कमीशन में विलय – शुभेंदु अधिकारी सरकार का बड़ा सुधार

शुभेंदु अधिकारी सरकार ने मदरसा शिक्षा में एकरूपता और पारदर्शिता के लिए मदरसा सर्विस कमीशन का विलय स्कूल सर्विस कमीशन में किया। अवैध 252 मदरसे बंद, ‘एक राज्य एक शिक्षा नीति’ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम।

Published by
अभय कुमार

पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी सरकार ने मदरसा शिक्षा में एकरूपता और पारदर्शिता लाने के लिए पश्चिम बंगाल मदरसा सर्विस कमीशन को समाप्त कर उसका विलय पश्चिम बंगाल स्कूल सर्विस कमीशन में विलय कर दिया है। सरकार का यह कदम मदरसा शिक्षा में सुधार के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। सरकार के इस पहल का उद्देश्य ‘एक राज्य, एक शिक्षा नीति’ के तहत शैक्षणिक संस्थानों में एकरूपता लाना और मदरसों के छात्रों को भी सामान्य विद्यालयों जैसी मुख्यधारा की शिक्षा के समान अवसर देना है।

प्रशासनिक सुधार

अब राज्य के सहायता प्राप्त मदरसों में शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति अलग से नहीं, बल्कि सामान्य विद्यालयों की तरह परीक्षा प्रणाली के माध्यम से ही किया जाएगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी, तेज़ और सामान्य शिक्षा की मुख्यधारा के अनुरूप बनाना है।

अवैध मदरसों पर कड़ी कार्रवाई

हाल ही में शुभेंदु अधिकारी सरकार ने बिना मान्यता के चल रहे 252 मदरसों को बंद करने का आदेश देने के साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाले लगभग 100 मदरसों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था। सबसे अधिक 44 मदरसे मालदा जिले में बंद किए गए हैं।

इसके अलावा उत्तर दिनाजपुर (37), दक्षिण 24 परगना (32), और नदिया व मुर्शिदाबाद में 25-25 मदरसों पर कार्रवाई किया गया  है। राज्य में सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बंगाल में वर्तमान में 2,132 मदरसे मान्यता प्राप्त हैं, जबकि 2,396 मदरसे बिना मान्यता के चलाया जा रहा हैं।

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