तिरंगा, क्रांतिवीर, प्रहार जैसी यादगार फिल्मों के जरिये लोहा मनवाने वाले प्रख्यात अभिनेता नाना पाटेकर का गोवा में गुरुवार (8 अक्टूबर 2026) को आकस्मिक निधन हो गया। लेकिन वह अभिनय के जरिये हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे। पद्मश्री नाना पाटेकर रील नहीं, रियल लाइफ के भी हीरो थे। मनोरंजन जगत को समृद्ध करने के साथ ही उन्होंने समाज और राष्ट्र के प्रति भी अपनी जिम्मेदारी खूब निभाई। उन्होंने कारगिल युद्ध में भी हिस्सा लिया था।
नाना पाटेकर ने मायानगरी में काम तो किया, लेकिन इस माया से दूर ही रहे। उनका दिल हमेशा भारतीय सेना, गांवों, किसानों के लिए धड़का। समृद्ध और सुशिक्षित समाज का निर्माण उनका लक्ष्य था।
नाना पाटेकर ने ली थी कमांडो ट्रेनिंग, कारगिल युद्ध में शामिल हुए
नाना पाटेकर ने मराठा लाइट इन्फैंट्री में तीन साल गुजारे। इस दौरान उन्होंने कमांडो की ट्रेनिंग ली और अन्य युद्ध कला भी सीखी। वे अच्छे निशानेबाज भी रहे। कारगिल युद्ध में हिस्सा लिया और कई मोर्चों पर उनकी तैनाती रही। एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने बताया भी था कि कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने तत्कालीन सेना प्रमुख से बात की थी कि पर उन्होंने सिविलियन होने की बात कहकर नाना पाटेकर को सेना के साथ लड़ाई में शामिल होने से मना कर दिया। इस पर उन्होंने सेना प्रमुख को बताया कि वह तीन साल की कमांडो की ट्रेनिंग ले चुके हैं। इस पर भी जब उन्हें युद्ध में शामिल नहीं किया गया तो उन्होंने तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस से बात की।
जॉर्ज फर्नांडिस से बात करने पर उन्हें सेना के क्यूआरटी में रखा गया। इस दौरान उनके पास भारतीय सेना की कई अहम जिम्मेदारियां थीं। कारगिल युद्ध के दौरान वह कुपवाड़ा, बारामूला, सोपोर में तैनात किए गए। भारतीय सेना और पुलिस के प्रति उनके मन में बहुत सम्मान था । जब वे सड़क से गुजरते समय किसी ट्रैफिक पुलिस कर्मी को डयूटी करते देखते थे तो गाड़ी रोक कर उसका हाल-चाल लेते थे।
कश्मीर में शिक्षा की अलख जगाई
जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना के साथ मिलकर सीमा से सटे गांवों में बच्चों में शिक्षा की अलख जगाकर उन्हें मुख्यधारा में लाने का अभियान शुरू किया था। नाना पाटेकर की गैर सरकारी संस्था ‘नाम’ ने कश्मीरी बच्चों को शिक्षा का बेहतर माहौल देने के लिए भारतीय सेना से हाथ मिलाया। ‘नाम फाउंडेशन’ का काम नाना के बेटे मल्हार संभाल रहे हैं। अभियान की शुरुआत सीमा से लगते गग्गर हिल प्राइमरी स्कूल से की गई थी। नाम फाउंडेशन और सेना के सहयोग से स्थानीय युवाओं को आवश्यक कौशल के साथ सशक्त बनाने के लिए चिनार 9 जवान क्लब, बोनियार की स्थापना की गई है। नाना पाटेकर ने मराठी अभिनेता मकरंद अनासपुर के साथ मिलकर 2015 में ‘नाम फाउंडेशन’ की स्थापना की थी। नाना कहते थे कि नाम एक संस्था नहीं बल्कि एक आंदोलन है।
किसानों से खास लगाव
नाना पाटेकर मायानगरी की चमक-दमक से हमेशा दूर रहे। एक बार अन्य अभिनेताओं की तरह महंगी कार खरीदने का उन्हें ख्याल आया था। इसके लिए उन्होंने डेढ़ करोड़ रुपए जोड़ भी लिए थे। इसी दौरान एक दिन उन्होंने महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या की खबर पढ़ी तो कार खरीदने का इरादा त्याग दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने कार के लिए जमा किए गए सारे पैसे एक हजार किसानों में बांट दिए।
नाना पाटेकर की प्रमुख फिल्में और प्रसिद्ध डायलॉग
फिल्म क्रांतिवीर
- आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने!”
- “कुत्ते की तरह जीने की आदत पड़ी है सबको! ना इज्जत की फिक्र, ना गैरत की… बस दो वक्त की रोटी मिल जाए, और कोई पूछे नहीं – यही काफी है!”
फिल्म ‘यशवंत’
- “एक मच्छर साला आदमी को हिजड़ा बना देता है।”
फिल्म ‘वेलकम’ :
- “देखिए भगवान का दिया हुआ सब कुछ है, दौलत है, शहरत है, इज्जत है।”
- आलू ले लो, कांदा ले लो…
- “नियंत्रण उदय, नियंत्रण!
फिल्म प्रहार
- Soldier never quits till he is dead.
फिल्म तिरंगा
- अपना तो उसूल है… पहले लात, फिर बात, उसके बाद मुलाकात।”
- “मराठा मरता है या मारता है।”
- “तुझे ऐसी मौत मारूंगा कि तेरी पापी आत्मा अगले सात जनम तक…”
- “याद है मैंने कहा था कि यही 1500 की नौकरी करने वाला एक दिन तुझे 150 का कफन पहनाएगा।”
पूरे देश में शोक की लहर
नाना पाटेकर का जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के रायगढ़ (मुरुड-जंजीरा) में हुआ था। उनका पूरा नाम विश्वनाथ पाटेकर था। 75 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। नाना पाटेकर के आकस्मिक निधन से न केवल बॉलीवुड बल्कि पूरे देश में शोक की लहर है।












