नई दिल्ली/ संभल: मुल्ला अफरोज का आपराधिक इतिहास लंबा है। 2024 में हुई संभल जामा मस्जिद हिंसा से लेकर दिल्ली-एनसीआर में लग्जरी वाहनों की चोरी कर उन्हें पश्चिम बंगाल, असम और नेपाल पहुंचाने तक कई मामलों का सरगना रहा मुल्ला अफरोज कुख्यात अपराधी शारिक साठा का करीबी है। जामा मस्जिद के सर्वे के विरोध में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा में चार लोगों की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में मुख्य आरोपी मुल्ला अफरोज ही है।
हिंसा के बाद हुई जांच में अफरोज के खिलाफ चार हत्या और दो हिंसा से जुड़े मुकदमे दर्ज किए गए। पुलिस ने उसे 17 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया था। 19 जनवरी जेल भेज दिया है। मुल्ला अफरोज पहले प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करता था। इसके बाद वह साठा के नेटवर्क से जुड़ा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2012 से दुबई में रह रहे साठा से वह मोबाइल एप के माध्यम से संपर्क में था। पुलिस पूछताछ में उसने संभल हिंसा के पीछे साठा की साजिश का दावा किया था। बता दें कि 24 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद में सर्वे के विरोध में संभल में हिंसा भड़क गई थी। इसमें चार लोगों की मौत हो गई थी।जबकि 30 से अधिक पुलिसकर्मी और प्रशासनिक अधिकारी घायल हुए थे।
पुलिस ने अफरोज के खिलाफ 13 अक्टूबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की थी। इसके बाद उसने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल कर एनएसए की कार्रवाई को चुनौती दी थी।कोर्ट ने 2026 में उसकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मंगलवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उसकी एनएसए के तहत निरुद्ध रखने की कार्रवाई रद कर दी।

















