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‘भारत बन रहा आर्थिक सेतु’

‘ब्रिक्स व्यापार मंच’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए भाषण के संपादित अंश-

Written byPanchjanyaPanchjanya
Sep 20, 2026, 08:58 am IST
inभारत

इस वर्ष हम ब्रिक्स की 20वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। 2006 में जब इस समूह की शुरुआत हुई थी, तो इसमें केवल चार देश थे। आज ब्रिक्स और ब्रिक्स साझेदार देशों को मिलाकर 21 देशों का हमारा परिवार है। आज ब्रिक्स के देश विश्व की 50 प्रतिशत जनसंख्या, 40 प्रतिशत सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), और 25 प्रतिशत से अधिक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं।

इतना ही नहीं, इन वर्षों में जहां वैश्विक जीडीपी करीब ढाई गुना हुई है, वहीं ब्रिक्स देशों की संयुक्त जीडीपी करीब साढ़े चार गुना हुई है। यानी ब्रिक्स की आर्थिक शक्ति दुनिया की तुलना में करीब दोगुनी रफ्तार से बढ़ी है। ब्रिक्स देश वैश्विक नवाचार और समाधानों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र भी बन रहे हैं। जमीनी स्तर से लेकर अत्याधुनिक तकनीकों तक, हमारे देशों में नवाचार की नई संभावनाएं आकार ले रही हैं। ब्रिक्स का बढ़ता विस्तार, गति और आशावाद हमारे बीच साफ दिखाई दे रहा है। भारत में आयोजित यह मंच, अब तक का सबसे बड़ा ब्रिक्स व्यापार मंच है। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की थीम है- ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और टिकाऊ विकास के लिए निर्माण।’ पिछले बारह वर्ष में भारत ने इस मंत्र को अपनी आर्थिक और व्यापार नीति का आधार बनाया है।

लचीलेपन की बात करें, तो भारत ने ऊर्जा से लेकर प्रौद्योगिकी तक, आपूर्ति शृंखलाओं को अधिक विविधतापूर्ण और विश्वसनीय बनाया है। इसी लचीलेपन का परिणाम है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी भारत आज विकास और स्थिरता का भरोसा दे रहा है। हम सड़कों, रेलमार्गों, बंदरगाहों और हवाई अड्डों का तेजी से विस्तार कर रहे हैं। साथ ही जहाज निर्माण, सेमीकंडक्टर, क्वांटम तकनीक, महत्वपूर्ण खनिजों और जैव-प्रौद्योगिकी जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में नई क्षमताएं तैयार कर रहे हैं।

आज भारत में नए उद्यमों की क्रांति हो रही है। दो लाख से अधिक नए उद्यमों और 120 से अधिक यूनिकॉर्न के साथ भारत आज वैश्विक समाधानों का केंद्र बन रहा है। हमारे नए उद्यम, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में बदलाव ला रहे हैं, हरित हाइड्रोजन और बैटरियों पर काम कर रहे हैं, और रक्षा तथा अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी नई सीमाएं पार कर रहे हैं।

अब हमें ब्रिक्स के माध्यम से भी इन विश्वस्तरीय नवाचारों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाना है। भारत की नवाचार यात्रा की एक और विशेषता है-जनसंख्या के स्तर पर नवाचार। भारत की एकीकृत भुगतान प्रणाली (यूपीआई) ने जनसंख्या के स्तर पर वित्तीय समावेशन और डिजिटल लेन-देन को नई गति दी है। हमें गर्व है कि भारत के इस विश्वस्तरीय तंत्र को कई देश अपना रहे हैं। ब्रिक्स देशों के नवाचारी भी इस अनुभव के आधार पर अपने देशों के लिए नए समाधान तैयार कर सकते हैं।

18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन : दिखी कूटनीतिक कुशलता

आज जब दुनिया में व्यापार संबंधी बाधाएं बढ़ रही हैं, तो भारत आर्थिक सेतु बना रहा है। 2014 के बाद से हमने दुनिया के करीब 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं। ब्रिक्स में भी हमारा दृष्टिकोण यही है-बाधाओं को कम करना और कारोबार के लिए अवसर बढ़ाना। इसलिए हमने कृषि, स्वास्थ्य, कौशल और स्मार्ट ग्रिड जैसे क्षेत्रों में नए सहयोग नेटवर्क का गठन किया है।

नए उद्यमों और छोटे तथा मध्यम उद्यमों को बाजार और वित्त से जोड़ने के लिए हमने ब्रिक्स इनक्यूबेटर नेटवर्क, ब्रिक्स एमएसएमई पोर्टल और ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड जैसी पहलें की हैं। इन सभी सहयोग व्यवस्थाओं का लाभ आप सभी उठा सकते हैं। और हमारे देशों के बीच निवेश और प्रतिभा का आदान-प्रदान बढ़ा सकते हैं। वैश्विक व्यापार तभी आगे बढ़ सकता है जब समुद्री मार्ग सुरक्षित हों, आपूर्ति मार्ग खुले हों और समुद्री-कर्मी सुरक्षित हों। और इसलिए भारत नौवहन की स्वतंत्रता और समुद्री-कर्मियों की सुरक्षा का दृढ़ समर्थक है।

18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन : बदलती वैश्विक भूमिका

ब्रिक्स महिला व्यापार गठबंधन भी हमारे दृष्टिकोण का अहम हिस्सा है। हम चाहते हैं कि महिला उद्यमी हमारी विकास यात्रा का नेतृत्व करें। हमें बहुत खुशी है कि भारत में आयोजित इस गठबंधन की बैठक में करीब 200 महिला कारोबारी नेताओं ने भाग लिया। आज जब ब्रिक्स अपने तीसरे दशक में प्रवेश कर रहा है, ब्रिक्स व्यापार परिषद से मेरा आग्रह रहेगा कि क्या आप ब्रिक्स देशों के बीच शीर्ष दस व्यापार बाधाओं को हटाने के लिए एक रिपोर्ट बना सकते हैं? क्या हम हर वर्ष 100 ब्रिक्स नए उद्यमों को दूसरे ब्रिक्स बाजारों में विस्तार करने के लिए सहायता दे सकते हैं? क्या हम अपने कारोबारों के बीच 1,000 नई साझेदारियां विकसित कर सकते हैं? इन तीनों मापदंडों पर हमें हर वर्ष अपनी प्रगति की समीक्षा करनी है। आइए, ब्रिक्स की महत्वाकांक्षा को कार्रवाई में, और सामूहिक शक्ति को वैश्विक समाधानों में बदलें। ब्रिक्स आगे बढ़े, और दुनिया को भी आगे बढ़ाए।

18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन : बढ़ा भारत का कद

Topics: ब्रिक्स व्यापार मंचब्रिक्स व्यापार परिषदआर्थिक सेतुवैश्विक समाधानमुक्त व्यापार समझौता (FTA)निवेशव्यापार बाधाएंजीडीपीटिकाऊ विकाससेमीकंडक्टरनए उद्यमआर्थिक शक्तिब्रिक्स इनक्यूबेटर नेटवर्कपाञ्चजन्य विशेषक्वांटम तकनीकब्रिक्स एवं कूटनीतिडिजिटल लेन-देन
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