गोवा में नीट पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान नया विवाद सामने आ गया। प्रदर्शन का मकसद छात्रों के मुद्दों को उठाना था, लेकिन इसी दौरान कुछ लोगों ने कथित तौर पर उमर खालिद की रिहाई की मांग वाले पोस्टर दिखाए। इसके बाद मामला राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बन गया। शिकायत मिलने पर गोवा पुलिस ने जांच शुरू की, आयोजकों से पूछताछ की और दो युवकों को हिरासत में लिया।
नीट प्रदर्शन में उमर खालिद के पोस्टर दिखने पर विवाद
यह विरोध प्रदर्शन ‘उजवाद’ नाम के एक एनजीओ ने आयोजित किया था। शुक्रवार को मापुसा और शनिवार को पणजी में हुए प्रदर्शन में परीक्षा प्रणाली में सुधार और नीट पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई गई। हालांकि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों के हाथों में उमर खालिद की रिहाई की मांग वाले पोस्टर दिखाई दिए। इसके बाद कुछ नागरिकों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। उजवाद एनजीओ की प्रमुख अमरीन शेख को पूछताछ के लिए बुलाया गया, जबकि दो युवकों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की गई। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ये पोस्टर प्रदर्शन में कैसे पहुंचे।
इस मामले पर गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने पुलिस की कार्रवाई का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि राज्य में किसी भी तरह के “राष्ट्रविरोधी एजेंडे” को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनके अनुसार, गोवा एक शांतिपूर्ण राज्य है और यहां की शांति और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। हालांकि मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन किसी दूसरे विवादित मुद्दे को ऐसे आंदोलनों से जोड़ना सही नहीं माना जा सकता। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर भी प्रमोद सावंत ने असहमति जताई। उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक मामले में जांच शुरू कराने और कार्रवाई आगे बढ़ाने में केंद्रीय शिक्षा मंत्री की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसलिए उनके अनुसार इस्तीफे की मांग उचित नहीं है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

















