पंजाब

पंजाब में पेपर लीक का बड़ा कांड : फार्मेसी अफसर भर्ती परीक्षा में पेन कैमरे से भेजा प्रश्नपत्र, ब्लूटूथ से आए जवाब

पंजाब पुलिस ने सात नकल कराने वालों और 28 अभ्यर्थियों को हिरासत में ले लिया है।

Published by
राकेश सैन

पंजाब में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में 454 फार्मेसी अफसर पदों के लिए आयोजित भर्ती परीक्षा में पेपर लीक होने का मामला सामने आया है। बताया जाता है कि आरोपी हाइटेक तकनीक से नकल करवा कर पेपर लीक कर रहे थे। पंजाब पुलिस ने सात नकल कराने वालों और 28 अभ्यर्थियों को हिरासत में ले लिया है। उनके कब्जे से 27 बैटरी संचालित वायरलेस डिवाइस बरामद हुई हैं।

हो रही थी ऑनलाइन नकल

जांच में सामने आया कि गिरोह फरीदकोट, फिरोजपुर और कोटकपूरा के परीक्षा केंद्रों पर 42 अभ्यर्थियों को ऑनलाइन नकल करा रहा था। इनमें से 14 अभ्यर्थी परीक्षा समाप्त होने से पहले ही निकल गए। पुलिस ने स्पष्ट किया कि पेपर लीक नहीं हुआ और परीक्षा प्रणाली या किसी अधिकारी की भूमिका सामने नहीं आई है।

पेन कैमरे से खींची तस्वीरें

पुलिस के अनुसार परीक्षा शुरू होने के कुछ मिनट बाद फिरोजपुर के एक केंद्र पर बैठे अभ्यर्थी आयुष ने पेन कैमरे से प्रश्नपत्र की तस्वीरें लेकर व्हाट्सएप के जरिए हरियाणा के भिवानी निवासी साजन को भेजीं। वहां से प्रश्नपत्र राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ निवासी दीपक तक पहुंचा। दीपक ने फरीदकोट के सोसायटी नगर स्थित गुरमीत सिंह के घर बनाए गए अस्थायी कंट्रोल रूम में मंजीत सिंह के साथ उत्तर तैयार किए और ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए परीक्षा केंद्रों में बैठे अभ्यर्थियों तक रीयल टाइम में पहुंचाए।

42 अभ्यर्थियों को नकल करवाने की बात स्वीकारी

खुफिया सूचना के आधार पर पुलिस ने गुरमीत सिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ की। उसने 42 अभ्यर्थियों को नकल कराने की बात स्वीकार की। इसके बाद तीनों शहरों के परीक्षा केंद्रों पर दबिश देकर 28 अभ्यर्थियों को हिरासत में लिया गया। जांच में सामने आया कि फाजिल्का के संत कबीर पॉलिटेक्निक कॉलेज का कर्मचारी गुरमीत सिंह पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड है।

पहले हरियाणा फिर राजस्थान तक पहुंचा प्रश्नपत्र

परीक्षा शुरू होने के बाद पेन कैमरे से प्रश्नपत्र की तस्वीरें बाहर भेजी गईं। व्हाट्सएप के जरिए प्रश्नपत्र हरियाणा और फिर राजस्थान के सॉल्वर तक पहुंचा। फरीदकोट में बनाए गए कंट्रोल रूम से ब्लूटूथ वायरलेस डिवाइस के माध्यम से अभ्यर्थियों को रीयल टाइम में उत्तर बताए गए। पुलिस का कहना है कि पूरा खेल परीक्षा शुरू होने के बाद हुआ इसलिए इसे पेपर लीक नहीं माना जा सकता।

लाखों रुपये लेकर कराते थे परीक्षा पास

गिरोह परीक्षा पास कराने के बदले साढ़े तीन लाख से 13 लाख रुपये तक वसूलता था। कई अभ्यर्थियों से पोस्ट डेटेड चेक भी लिए गए थे। पुलिस ने गुरमीत सिंह (फरीदकोट), मंजीत सिंह (झुंझुनूं), दीपक और सुनील कुमार (कोटपूतली-बहरोड़), सतनाम सिंह (गुरुहरसहाय), बलवंत सिंह (हरियाणा) और अभियंत (भिवानी) को हिरासत में लिया है। पुलिस के अनुसार 42 अभ्यर्थियों में से 28 हिरासत में हैं जबकि 14 अभ्यर्थियों की पहचान कर उन्हें भी जांच में शामिल किया जाएगा। भिवानी निवासी साजन समेत अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है।

बाहरी लोगों की संलिप्तता आई सामने

नीलांबरी जागदले, आईजी, फरीदकोट रेंज ने बताया कि 28 अभ्यर्थियों की सूची विश्वविद्यालय ने सौंपी है। सभी की भूमिका की जांच की जा रही है। लिखित शिकायत मिलने पर भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। शुरुआती जांच में बाहरी लोगों की संलिप्तता सामने आई है इसलिए आरोपियों की संख्या बढ़ सकती है।

यूनिवर्सिटी कर रही लीपापोती

बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज ने पूरे मामले पर लीपापोती करते हुए कहा है कि अब तक की पुलिस जांच में प्रश्नपत्र लीक होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। मामला परीक्षा शुरू होने के बाद ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए नकल करने की कोशिश का है, न कि पेपर लीक का।

क्या कहते हैं यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार

इस मामले में यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में 454 से अधिक फार्मेसी अफसर पदों की भर्ती के लिए आयोजित परीक्षा में 6474 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। सबसे पहले फरीदकोट के एक परीक्षा केंद्र पर यूनिवर्सिटी की टीम ने एक अभ्यर्थी को ब्लूटूथ डिवाइस के साथ पकड़ा, जिसके बाद पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई का दायरा बढ़ाया गया। पुलिस द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर 28 संदिग्ध अभ्यर्थियों को हिरासत में लिया गया, जबकि नकल रैकेट संचालित करने के आरोप में सात अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है। यूनिवर्सिटी का कहना है कि उपलब्ध तथ्यों के अनुसार यह संगठित नकल का प्रयास था, लेकिन प्रश्नपत्र लीक होने जैसी स्थिति सामने नहीं आई। पूरे मामले की रिपोर्ट पंजाब सरकार को भेजी जा रही है और आगे की कार्रवाई सरकार के निर्देशों के अनुसार की जाएगी।

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