
जबलपुर। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ़ एक्सीलेंस शासकीय महाकौशल अग्रणी महाविद्यालय एवं कल्चरल मार्क्सिज्म अध्येता समूह के संयुक्त तत्वावधान में अध्ययन -शोध केंद्र का उद्घाटन एवं परिसंवाद कार्यक्रम का भव्य आयोजन पी.एम श्री महाकौशल कला एवं वाणिज्य कॉलेज में हुआ।
प्रथम सत्र में पीएम श्री महाकौशल महाविद्यालय में अध्ययन एवं शोध केंद्र का शुभारंभ किया गया। यह शोध एवं अध्ययन केंद्र शोधार्थियों, अध्यापकों एवं छात्रों के लिए भारतीय दृष्टि प्रदान करने के लिए और शोध को भारतीय परंपरा एवं ज्ञान के आधार पर विकसित करने के लिए किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य तथ्य एवं विश्लेषण के आधार पर सत्य निष्कर्ष तक पहुंचना है। इसका उद्घाटन मध्य क्षेत्र के प्रचार प्रमुख मुख्य अतिथि कैलाश जी द्वारा किया गया, साथ में विशिष्ट अतिथि के रुप में विश्वजीत जी एवं शिवनारायण पटेल जी थे। कार्यक्रम के अध्यक्ष एवं पीएम श्री महाविद्यालय के प्राचार्य अल्केश चतुर्वेदी जी ने अध्ययन शोध केंद्र की रूपरेखा प्रस्तुत की।
मुख्य अतिथि कैलाश जी ने बताया कि हमें भारतीय शोध की आवश्यकता क्यों है, शोध वह है जो सत्य अर्थात धर्म की जय कर सके । भारतीय परंपरा को एवं भारतीय विमर्श को शोध एवं अध्ययन क्षेत्र में लागू कर सके । उन्होंने पश्चिम में हुए परिवर्तन के पीछे के कारण , पूंजीवाद से लेकर समाजवाद का विकास एवं वर्तमान में आभारतीय विमर्श की अवधारणा को भली-भांति परिभाषित किया । कार्यक्रम का संचालन डॉ. आनंद सिंह राणा एवं आभार दीपक द्विवेदी द्वारा किया गया।
उद्घाटन सत्र के उपरांत द्वितीय सत्र में परिसंवाद का आयोजन हुआ। विभिन्न भारतीय विमर्श को लेकर एक परिसंवाद में संयुक्त परिवार, लिविंग रिलेशन, विवाह, भारतीय परंपरा, नारीवाद, शिक्षा का उद्देश्य एवं भारतीय संस्कृति आदि विषयों पर संवाद किया गया । अंत में एक सार्थक निष्कर्ष की प्राप्ति हुई कि वास्तव में अगर भारत को आगे लेकर जाना है तो भारतीय परंपरा और संस्कृति का अनुकरण बहुत जरूरी है और इन निष्कर्ष में यह भी पता चला कि भारत की संस्कृति की जरूरत जितनी भारत को है उससे कहीं अधिक विश्व को है। जहां परिवार, मूल्यों को लेकर बड़ी चुनौतियां हैं, इसलिए पूरा विश्व भारत की ओर देख रहा है।
इस परिसंवाद का संयोजन डॉ. आनंद सिंह राणा ने किया। विषय परिचय श्यामंतक त्रिपाठी जी ने दिया। परिसंवाद का संचालन अपने प्रश्नों से छवि त्रिपाठी, प्रिंसी पांडे ने किया। परिसंवाद में रिसर्च स्कॉलर, छात्र प्राध्यापक एवं अध्येता ने भागीदारी की, जिसमें कल्चरल मार्क्सिज्म के समर्थन में पार्थ अग्रवाल, साकेत राज, कुमकुम जैन, विपिन त्रिपाठी तथा कल्चरल मार्क्सिज्म अध्येता समूह से डॉ.प्रियंका साहू , डॉ नूपुर निखिल देशकर, डॉ.राधा मिश्रा एवं दीपक द्विवेदी सम्मिलित हुए।
विद्यार्थियों ने कार्यक्रम को लेकर कहा कि यह कार्यक्रम उनके लिए अत्यंत लाभकारी है और वास्तव में आपने जो तथ्य और विश्लेषण प्रस्तुत किया उनकी आंखें खोल देने वाला है। वह जिसे आधुनिक और प्रगतिशीलता कहते थे वह वास्तव में क्या है और उन्हें अगर वाकई एक अच्छा नागरिक बनना है, राष्ट्र निर्माण में भागीदारी करनी है, तो अपनी जड़ों की ओर लौटना होगा, अपने परिवारों में संवाद, प्रकृति एवं मानव के बीच समन्वय स्थापित करना होगा और अध्ययन एवं संवाद के बाद ही किसी तथ्य एवं विचार को समझा जा सकता है । इसलिए आज उद्घाटित शोध एवं अध्ययन केंद्र उनके लिए लाभकारी होगा जो छात्रों का सर्वांगीण विकास कर सकेगा।