पश्चिम बंगाल

TMC के इस वीआईपी के लिए खरीदे गए थे लग्जरी विमान, ED ने पकड़ा नया घोटाला, 440 करोड़ रुपए किए फ्रीज

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सीएम की कुर्सी जाने के बाद से ही उनके सितारे गर्दिश में चल रहे हैं। एक-एक कर उनकी पार्टी के बड़े नेता बीजेपी में शामिल होने लगे तो दो दूसरी तरफ पार्टी पर किसका हक है, इसकी भी लडाई शुरू हो गई।

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जय प्रकाश गुप्ता

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सीएम की कुर्सी जाने के बाद से ही उनके सितारे गर्दिश में चल रहे हैं। एक-एक कर उनकी पार्टी के बड़े नेता बीजेपी में शामिल होने लगे तो दो दूसरी तरफ पार्टी पर किसका हक है, इसकी भी लडाई शुरू हो गई। अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने टीएमसी पार्टी के बैंक खातों और एक चार्टर विमान कंपनी के बीच हुए करोड़ों रुपए के संदिग्ध लेन-देन का भंडाफोड़ करने का दावा किया है।

इस हाई-प्रोफाइल घोटाले की जांच करते हुए ईडी ने टीएमसी के 3 बड़े बैंक खातों में जमा करीब 440.42 करोड़ रुपए की राशि को फ्रीज कर दिया है। इससे ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रहे हैं। दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस ने इस पूरी कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित और पूरी तरह गैरकानूनी करार दिया है। क्या है पूरा मामला चलिए आपको विस्तार से बताते हैं।

क्या है ईडी का आरोप और टीएमसी का विमान घोटाला?

प्रवर्तन निदेशालय की प्रारंभिक जांच के अनुसार, यह पूरा मामला टीएमसी पार्टी फंड के कथित गबन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हुआ है। केंद्रीय एजेंसी का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस ने अपने आधिकारिक बैंक खातों से केयरवेल एविएशन (Carewell Aviation) नाम की एक चार्टर विमान कंपनी को करोड़ों रुपए ट्रांसफर किए। इस राशि का इस्तेमाल कंपनी ने नए विमान और हेलीकॉप्टर खरीदने में किया।

यहां गौर करने वाली बात यह है कि इन विमानों को खरीदने के बाद टीएमसी के बड़े नेताओं खासतौर पर राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी जैसे वीवीआईपी लोगों की हवाई यात्राओं के लिए इसी कंपनी से उन्हें दोबारा किराए पर लिया गया और इसके बदले फिर से करोड़ों रुपए का भुगतान किया गया। ED को शक है कि यह पूरा चक्र पार्टी के पैसों को ठिकाने लगाने और गबन करने के उद्देश्य से रचा गया था।

कोलकाता में एविशन कंपनी के ठिकानों पर हुई छापेमारी

इस वित्तीय गड़बड़ी के सुराग मिलते ही ईडी की टीमों ने कोलकाता और उसके आस-पास के 5 मुख्य ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इस छापेमारी की जद में चार्टर विमान कंपनी का मुख्य कार्यालय, उसके प्रमोटर का निजी आवास, न्यू टाउन स्थित एक परिसर, एक संदिग्ध ट्रस्ट का दफ्तर और मध्य कोलकाता में कार्यरत एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) का दफ्तर शामिल था। इस कार्रवाई के दौरान जांच अधिकारियों ने कई अहम बैंक दस्तावेज, हार्ड डिस्क और डिजिटल उपकरण अपने कब्जे में लिए हैं।

कैसे किया गया घोटाला?

ईडी के आधिकारिक सूत्रों से मिले आंकड़ों के मुताबिक, यह पूरा खेल पिछले 3 सालों से चल रहा था। उनके मुताबिक, अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच टीएमसी के खातों से केयरवेल एविएशन को सीधे 160 करोड़ रुपए भेजे गए। इसके बाद शेल कंपनियों में इन्हें भेजा गया। केयरवेल ने एक नई नवेली कंपनी के खाते में 82.96 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए। फिर लग्जरी विमान खरीदे गए। इसमें कुल 112 करोड़ रुपए का निवेश कर एक एम्ब्रेयर लेगेसी जेट 600 (Embraer Legacy Jet 600) विमान और एक अगस्ता वेस्टलैंड 109एसपी (Agusta Westland 109SP) हेलीकॉप्टर खरीदा गया। बताया जा रहा है कि इस अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर को खरीदने के लिए साल 2023 में टैक्स हैवेन माने जाने वाले केमैन आइलैंड्स की एक विदेशी कंपनी से लोन भी लिया गया था जो विदेशी फंडिंग के नियमों के उल्लंघन की ओर इशारा करता है।

कैसे हुआ इस घोटाले का पर्दाफाश?

इस पूरे घोटाले के सामने आने की कहानी की शुरुआत टीएमसी के आंतरिक मतभेदों से हुई। दरअसल, 18 जून को दक्षिण 24 परगना के एक टीएमसी विधायक ने बिधाननगर साइबर थाने में एक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि एक बड़े साइबर फ्रॉड की रकम कुछ बैंक खातों में भेजी गई है, जिसमें अनजाने में पार्टी के खाते भी शामिल हो सकते हैं। इस कंप्लेंट पर स्थानीय पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बैंकों को खातों से डेबिट रोकने के निर्देश दिए।

इसी दौरान तृणमूल कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप विश्वास ने भी पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों के कारण टीएमसी के बैंक खातों को फ्रीज करने का एक आवेदन दिया था। जब स्थानीय पुलिस की प्राथमिक जांच में 150 करोड़ रुपए से अधिक के इस संदिग्ध और विशाल ट्रांजैक्शन की बात सामने आई, तो मनी लॉन्ड्रिंग का पुख्ता इनपुट मिलते ही केंद्रीय एजेंसी ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी PMLA के तहत मामले को अपने हाथ में ले लिया। फिलहाल ईडी इस पूरे वित्तीय घोटाले के सरगना तक पहुंचने के लिए तेजी से जांच कर रही है। हो सकता है कि इसकी आंच ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी तक भी पहुंच जाए।

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