
प्रतीकात्मक तस्वीर
केंद्र सरकार ने हाल ही में आतंकवाद से निपटने के लिए एक और कदम उठाया। गृह मंत्रालय ने जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) से जुड़े 23 लोगों को UAPA के तहत आधिकारिक रूप से आतंकी घोषित कर दिया। यह कदम शनिवार को लिया गया।
इस सूची में 17 पाकिस्तानी नागरिक और 6 भारतीय मूल के लोग शामिल हैं। ये सब पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर (PoJK) से भारत के खिलाफ गतिविधियां चला रहे थे।
सूची में सबसे चर्चित नाम हाफिज सईद का दामाद हाफिज खालिद वलीद है। हाफिज सईद लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक है। दूसरा अहम नाम मोहम्मद मुसद्दिक उर्फ डॉक्टर उर्फ अब्दुल मन्नान का है। यह जैश-ए-मोहम्मद का आतंकी है। अयोध्या के राम जन्मभूमि परिसर, नागपुर के RSS मुख्यालय और पानीपत की IOC रिफाइनरी की रेकी करने में उसकी भूमिका है। वह सियालकोट सेक्टर का लॉन्चिंग कमांडर भी है और सुरंगों व ड्रोन के जरिए हथियार और गोला-बारूद भेजने का काम करता है।
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केंद्र सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, इन सभी पर आरोप है कि ये सभी सीमा पार से घुसपैठ कराते थे, आतंकी हमलों की साजिश रचते थे, हथियार और गोला-बारूद की तस्करी करते थे, ड्रोन से सामान भेजते थे, नए आतंकियों की भर्ती करते थे, फंडिंग का इंतजाम करते थे औऱ प्रतिबंधित संगठनों की मदद में भी ये शामिल थे।
सूची में 11 लोग मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के हैं। इनमें से सात PoJK में और चार पाकिस्तान में रहकर काम कर रहे थे। PoJK में रह रहे कश्मीरी मूल के लोग:
2019 से अब तक केंद्र सरकार ने कुल 57 आतंकियों को UAPA के तहत घोषित किया था। इन 23 नामों के साथ कुल संख्या 80 हो गई है। गौरतलब है कि UAPA के तहत आतंकी घोषित करने का मतलब है कि इन लोगों की संपत्ति जब्त की जा सकती है, उनके बैंक खातों पर पाबंदी लग सकती है और कानूनी कार्रवाई आसान हो जाती है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भी इनके खिलाफ बेहतर तरीके से काम कर पाती हैं।