
श्रद्धांजलि समारोह के दौरान हवन करते कार्यकर्ता
पंजाब के मोगा में गत जून, 1989 को आतंकवादियों की गोली से बलिदान हुए संघ के स्वयंसेवकों की स्मृति में 37वां श्रद्धांजलि समारोह आयोजित हुआ। इस अवसर पर धर्म जागरण मंच, पंजाब के संयोजक श्री रामगोपाल ने कहा कि 25 जून, 1989 को संघ की शाखा पर हुआ आतंकवादी हमला कोई सामान्य घटना नहीं थी, बल्कि हिंदू–सिख एकता में दरार डालकर पंजाब को भारत से अलग करने की सुनियोजित साजिश थी।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने उस उकसावे का प्रत्युत्तर हिंसा से नहीं, बल्कि अपने कर्म और विचार से दिया और देश की एकता व अखंडता के संकल्प को सुदृढ़ किया। उल्लेखनीय है कि इस हमले में 25 स्वयंसेवक बलिदान हुए थे और 31 लोग घायल हुए थे। इस वर्ष आयोजित समारोह में बलिदानियों को नमन करने के लिए तीसरी पीढ़ी तक की उपस्थिति रही।
कार्यक्रम की शुरुआत शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करने से हुई। इसके उपरांत मानव कल्याण तथा राष्ट्रीय एकता-अखंडता की कामना के लिए पांच-कुंडीय हवन में सामूहिक आहुतियां दी गईं। अमृतसर के ईएनटी विशेषज्ञ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह प्रांत संघचालक डॉ. करुणेश गुप्ता ने कहा कि किसी भी क्रिया की प्रतिक्रिया देना सरल है, परंतु वास्तविक साहस संयम और सकारात्मक कर्म में निहित है।
सामूहिक नरसंहार के बाद भी संघ ने प्रतिक्रिया का मार्ग नहीं चुना, बल्कि समाज को यह संदेश दिया कि आतंकवादी साजिशों का प्रतिशोध उनके मंसूबों को ही बल देगा; संयम और संगठित सामाजिक कार्य ने उस दौर में उन मंसूबों को नाकाम किया और यह एक उदाहरण है।
मुख्य अतिथि बीबीएस ग्रुप के चेयरमैन डॉ. संजीव कुमार सैनी ने अपने उद्बोधन में आतंकवाद के कठिन कालखंड में संघ के कार्यकर्ताओं का एक मंच पर आना और तत्कालीन मुख्यमंत्री सरदार प्रकाश सिंह बादल के सहयोगात्मक योगदान का उल्लेख किया।