पंजाब की बिगड़ती वित्तीय स्थिति: भारी कर्ज, राजस्व घाटा और मुफ्त योजनाओं का बोझ
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पंजाब की बिगड़ती वित्तीय स्थिति: भारी कर्ज, राजस्व घाटा और मुफ्त योजनाओं का बोझ

पंजाब की वित्तीय स्थिति 2026 में बेहद चिंताजनक है। CAG रिपोर्ट के अनुसार राजस्व घाटा 28,215 करोड़, कुल कर्ज 4 लाख करोड़ पार और प्रति व्यक्ति ऋण 1.33 लाख रुपये हो गया। मुफ्त योजनाओं और सब्सिडी ने विकास को रोका।

Written byराकेश सैनराकेश सैन — edited by कुलदीप सिंह
Jun 30, 2026, 12:41 pm IST
in पंजाब
पंजाब मुख्यमंत्री, भगवंत सिंह मान

पंजाब मुख्यमंत्री, भगवंत सिंह मान

पंजाब की अर्थव्यवस्था लंबे समय से वित्तीय प्रबंधन की कमियों और लगातार पूरी न हो पाने वाली वित्तीय ज़रूरतों जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। जून 2026 में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) द्वारा 2024-25 के लिए 28 राज्यों के बजट पर जारी एक अध्ययन के अनुसार, देश के सभी राज्य राजकोषीय घाटे में हैं, लेकिन पंजाब उन 18 राज्यों में शामिल है जो वित्तीय प्रबंधन की समस्याओं और भारी राजस्व घाटे से जूझ रहे हैं। रिपोर्ट से यह साफ हो गया है कि देश के ये सभी राज्य आर्थिक मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। इसकी वजह है मुफ्त सुविधाओं का इस्तेमाल, बिना किसी विकास योजना के विकास कार्यों के चेक बांटना और बड़े पैमाने पर सब्सिडी देना—खासकर चुनावों से ठीक पहले के सालों में।

सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले राज्यों में पंजाब भी

इसके अलावा, मार्च 2026 में पंजाब विधानसभा में पेश की गई वित्तीय ऑडिट रिपोर्ट से एक बार फिर यह साफ हो गया है कि वित्तीय स्थिति के मामले में पंजाब देश के सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले राज्यों में से एक है। राज्य पर लगातार बढ़ता कर्ज, लगातार बढ़ता राजस्व घाटा, ब्याज और मूलधन का भारी भुगतान, और मुफ्त सुविधाओं व सब्सिडी ने विकास के लिए उपलब्ध वित्तीय संसाधनों पर भारी बोझ डाला है।

बढ़ा राजस्व घाटा

कैग की 2023-24 की वित्तीय रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब का राजस्व घाटा, जो 2019-20 में 14,285 करोड़ रुपये था, 2023-24 में बढक़र 28,215 करोड़ रुपये हो गया। यह राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 3.79 प्रतिशत है। इसका सीधा मतलब यह है कि पंजाब को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों और सामान्य खर्चों को पूरा करने के लिए भी उधार लेना पड़ रहा है। इसी तरह, राज्य का राजकोषीय घाटा 2023-24 में 33,115 करोड़ रुपये या सकल घरेलू उत्पाद का 4.45 प्रतिशत हो गया। जबकि राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम, 2003 के नियमों के अनुसार, राजकोषीय घाटा आम तौर पर 3 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए; वहीं कैग ने यह भी बताया है कि पंजाब की कुल देनदारियां सकल घरेलू उत्पाद के 44.27 प्रतिशत तक पहुंच गई हैं।

बढ़ रहा कर्ज का मर्ज

रिपोर्ट के अनुसार, 2023-24 में राज्य का कुल कर्ज़ और अन्य देनदारियां लगभग 3.46 लाख करोड़ रुपये थीं, जो अब बढक़र 4 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा हो गई हैं। 2024-25 के बजट में, पंजाब सरकार ने रेवेन्यू घाटे को 23,198 करोड़ रुपये और फिस्कल घाटे को 30,465 करोड़ रुपये पर सीमित रखने का लक्ष्य रखा था। यह राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का क्रमश: 2.89 प्रतिशत और 3.8 प्रतिशत था। लेकिन सरकार का दावा था कि टैक्स कलेक्शन बढ़ने, एक्साइज़ रेवेन्यू में सुधार और तेज़ी से आर्थिक विकास होने से वित्तीय स्थिति बेहतर होगी।

आमदनी अठन्नी खर्चा रुपया

आंकड़ों से पता चलता है कि आय की तुलना में खर्च बहुत तेजी से बढ़ रहा है। 2023-24 में, राज्य की कुल राजस्व प्राप्ति 89,192 करोड़ रुपये थी, जबकि राजस्व खर्च 1,17,407 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। यह स्थिति साफ तौर पर बताती है कि बजट में बताए गए वित्तीय सुधार के लक्ष्यों को असल में हासिल करना बहुत मुश्किल था।

प्यासा कर रहा है गंगादान

राज्य के वित्त पर कैग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब उन राज्यों में शामिल है जो सब्सिडी और मुफ्त सुविधाओं पर सबसे ज़्यादा खर्च करते हैं। 2024-25 में, पंजाब ने अपने कुल खर्च का 13.5 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सा सब्सिडी पर खर्च किया। 2023-24 में, सिर्फ़ बिजली सब्सिडी पर ही लगभग 18,770 करोड़ रुपये खर्च किए गए। यह रकम राज्य के कैपिटल इन्वेस्टमेंट से कई गुना ज़्यादा थी। खेती के लिए मुफ्त बिजली और दूसरी लोकप्रिय मुफ्त योजनाएँ राजनीतिक रूप से फायदेमंद हो सकती हैं, खासकर वोट पाने के लिए, लेकिन लंबे समय में ये राज्य की आर्थिक स्थिरता के लिए चुनौती बनती जा रही हैं।

पूंजीगत खर्च में कमी

किसी भी राज्य की आर्थिक वृद्धि और स्थिरता का एक अहम पैमाना उसका पूंजीगत खर्च है। इसमें सडक़ों, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और औद्योगिक बुनियादी ढांचे पर होने वाला खर्च शामिल है। कैग की रिपोर्ट के मुताबिक, 2023-24 में पंजाब ने अपने कुल खर्च का सिर्फ 3.88 प्रतिशत हिस्सा पूंजीगत निवेश पर खर्च किया। यह रकम लगभग 4,743 करोड़ रुपये थी। इसके दो मुख्य कारण हैं। पहला, राज्य की आय का एक बड़ा हिस्सा सैलरी, पेंशन और ब्याज के भुगतान में खर्च हो जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, ये तय खर्च कुल रेवेन्यू खर्च का 65 प्रतिशत हैं। दूसरा, राज्य के बजट का आकार छोटा है। नतीजतन, जब राज्य की आय का एक बड़ा हिस्सा पहले से तय खर्चों में ही खर्च हो जाता है, तो विकास और कैपिटल खर्च के लिए बजट का बहुत कम हिस्सा बचता है।

दूसरे राज्यों से तुलना

पंजाब की आर्थिक स्थिति को समझने के लिए, दूसरे राज्यों के साथ तुलनात्मक अध्ययन करना भी ज़रूरी है। कैग की स्टडी के अनुसार, 2023-24 में 16 राज्य रेवेन्यू सरप्लस (राजस्व अधिशेष) वाली श्रेणी में थे। उत्तर प्रदेश में 37,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का रेवेन्यू सरप्लस दर्ज किया गया, जो गुजरात के सरप्लस से दोगुने से भी ज़्यादा था। इसके उलट, पंजाब उन राज्यों में शामिल रहा जहाँ रेवेन्यू डेफिसिट (राजस्व घाटा) बहुत ज़्यादा था। जून 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 में आंध्र प्रदेश सबसे ज़्यादा रेवेन्यू डेफिसिट वाला राज्य बना रहा, जबकि पंजाब भी ज़्यादा घाटे वाले राज्यों में गिना गया। सभी राज्यों के स्तर पर 2025-26 के लिए औसत राजकोषीय घाटा जीडीपी का लगभग 3.14 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि पंजाब का राजकोषीय घाटा लगातार 4 प्रतिशत या उससे अधिक रहा है। इससे साफ पता चलता है कि पंजाब की राजकोषीय स्थिति राष्ट्रीय औसत से कमजोर है।

एक्स्ट्रा बजटरी लोन बढ़ा

कैग ने हाल ही में एक और अहम मुद्दा उठाया है, और वह है एक्स्ट्रा-बजटरी लोन (बजट के बाहर लिए लोन) का मामला। ये ऐसे लोन होते हैं जो सरकारी एजेंसियों या कॉरपोरेशन/बोर्ड लेते हैं, लेकिन शुरुआत में बजट में साफ तौर पर नहीं दिखते, जिससे असल कर्ज की स्थिति का अंदाज़ा लगाना बहुत मुश्किल हो जाता है। पंजाब के मामले में, कैग ने 2023-24 के दौरान 4,093 करोड़ रुपये के एक्स्ट्रा-बजटरी लोन की भी पहचान की है। मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब का कुल कर्ज और देनदारियां 4 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा हो गई थीं। 2026-27 के बजट अनुमानों में यह रकम 4.47 लाख करोड़ रुपये तक पहुँचने की संभावना है; और चूंकि यह चुनावी साल है, इसलिए इस कर्ज के और बढ़ने की उम्मीद है। अगर हम पंजाब के कर्ज के एक और अहम पहलू पर गंभीरता से नजऱ डालें, तो स्थिति और भी निराशाजनक लगती है।

प्रति व्यक्ति ऋण ने भी भरी कुलांचें

इसका एक पहलू यह है कि प्रति पंजाबी व्यक्ति पर ऋण का बोझ 2011-12 में 30,000 रुपये था। जो 2021-22 में बढक़र 94,000 रुपये हो गया और 2025-26 में 1,33,000 रुपये तक पहुंच गया। अब यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि मार्च 2027 तक प्रति पंजाबी व्यक्ति पर ऋण बढक़र 1,42,000 रुपये हो जाएगा। यदि ऋण इसी तरह बढ़ता रहा, तो भविष्य में ब्याज और मूलधन के भुगतान से राज्य की वित्तीय स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। पंजाब की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए सिर्फ कर्ज लेने की नीति लंबे समय तक नहीं चल सकती, क्योंकि इससे हालात बहुत खराब हो सकते हैं।

Topics: पंजाब वित्तीय संकटपंजाब राजस्व घाटाCAG रिपोर्ट पंजाब 2026पंजाब कर्ज 4 लाख करोड़
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