नई दिल्ली/भोपाल: मध्य प्रदेश में यूसीसी लागू करने से पहले नागरिकों से सुझाव लिए गए हैं। मंगलवार तक करीब साढ़े नौ लाख सुझाव मिले हैं। बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं ने समान नागरिक संहिता के पक्ष में सुझाव दिया है। करीब 71 फीसदी मुस्लिम महिलाओं ने UCC का सपोर्ट किया है। इससे साफ है कि मुस्लिम महिलाएं समान नागरिक संहिता के पक्ष में हैं।
मुस्लिम पुरुषों से अधिक मुस्लिम महिलाओं ने किया UCC को सपोर्ट
UCC के लिए बनाई गई राज्य स्तरीय समिति को 9.5 लाख से अधिक सुझाव मिले हैं। इनमें 8.9 लाख यानी 93 फीसदी लोगों ने समान नागरिक संहिता का समर्थन किया है। मुस्लिम पुरुषों से अधिक मुस्लिम महिलाओं ने यूसीसी को सपोर्ट किया है। यूसीसी को लेकर मांगे गए समुझावों में मुस्लिम पुरुषों में सिर्फ 38 फीसदी ने इसका समर्थन किया है। जबकि 15 हजार मुस्लिम महिलाओं में से 10.5 हजार यानी 71 फीसदी ने समान नागरिक संहिता को अपना समर्थन दिया है।
कानूनी सुधारों और लैंगिक समानता के पक्ष में मुस्लिम महिलाएं
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता के लिए मांगे गए सुझावों से साफ है कि सूबे में बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएं कानूनी सुधारों, लैंगिक समानता और सामाजिक सुरक्षा के पक्ष में हैं। दूसरी तरफ 5.2 लाख हिंदू पुरुषों में से 4.9 लाख यानी 95 फीसदी और 3.7 लाख हिंदू महिलाओं में से 3.6 लाख यानी 97 फीसदी ने यूसीसी को सपोर्ट किया है। सभी धर्मों की कुल 4 लाख महिलाओं में से 3.8 लाख यानी 95 फीसदी महिलाएं यूसीसी को समर्थन दिया है।
क्या है यूनियन सिविल कोड?
यूनियन सिविल कोड यानी UCC का मतलब है कि पूरे देश में शादी, तलाक, गोद लेने, विरासत और संपत्ति के बंटवारे जैसे निजी और पारिवारिक मामलों के लिए एक समान कानून लागू होना। यानी देश के सभी नागरिकों के लिए चाहे वो किसी भी धर्म, पंथ और मजहब के हों एक समान कानून। अभी तक भारत में हिंदू, मुस्लिम व अलग पंथों के लिए व्यक्तिगत कानून हैं। हिंदुओं के लिए हिंदू मैरिज एक्ट, मुसलमानों के लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ और ईसाइयों के लिए इंडियन क्रिश्चियन मैरिज एक्ट। यूसीसी लागू होने के बाद सबके लिए एक सा कानून। अभी उत्तराखंड, गुजरात, असम और गोवा में यूसीसी लागू हो गया है। मध्य प्रदेश में इसका मसौदा तैयार है। महाराष्ट्र में यूसीसी ड्राफ्ट तैयार करने के लिए समिति गठित की गई है।











