उत्तराखंड

देहरादून: दिल्ली सिख प्रतिनिधिमंडल ने की CM धामी से मुलाकात, चमोली घटना पर की चर्चा, DIG को सौंपी जांच

दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखंड के CM पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर चमोली पुलिस की कार्रवाई पर सिख समुदाय की चिंताएं जताईं। DIG यशवंत चौहान को जांच।

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उत्तराखंड ब्यूरो

देहरादून। दिल्ली से आए दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने आज उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने बीते 16 जून को हुई अप्रिय घटना और उसके बाद चमोली पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई को लेकर देश भर के सिख समुदाय में उपजी गहरी चिंताओं और रोष से मुख्यमंत्री को अवगत कराया।

मुख्यमंत्री धामी ने सिखों की धार्मिक भावनाओं और न्याय की मांग का सम्मान करते हुए मामले में तत्काल उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच के कड़े आदेश जारी कर दिए हैं।

सिख प्रतिनिधिमंडल के मुख्य आरोप और न्याय की मांग

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे दिल्ली गुरुद्वारा सिख कमेटी के महासचिव सरदार जसदीप सिंह कालू, सरदार भूपिंदर सिंह पुन्ना, सरदार सुखविंदर सिंह बब्बर और सरदार इंदरजीत सिंह मोंटी ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी बातें मजबूती से रखीं।

प्रतिनिधिमंडल द्वारा उठाए गए मुख्य बिंदु और पुलिसिया कार्रवाई पर लगाए गए आरोप इस प्रकार हैं:

  • पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का आरोप: यदि दो पक्षों के बीच स्थानीय स्तर पर कोई विवाद हुआ था, तो कानून के दायरे में दोनों पक्षों पर समान और निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए थी। पुलिस ने कथित तौर पर एकतरफा रुख अपनाया।
  • धार्मिक गरिमा को ठेस: प्रतिनिधिमंडल ने गंभीर आरोप लगाया कि सिख युवकों के साथ लॉकअप के भीतर पुलिस द्वारा दुर्व्यवहार किया गया। सबसे आपत्तिजनक बात यह रही कि सिख युवकों को उनकी धार्मिक पहचान (पगड़ी) के बिना ही सीधे अदालत में पेश किया गया, जिससे समूचे सिख समाज की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुँची है।
  • दोषी पुलिसकर्मियों के निलंबन की मांग: प्रतिनिधिमंडल ने पुरजोर मांग की कि जिन भी स्थानीय पुलिसकर्मियों पर मर्यादा तोड़ने और दुर्व्यवहार के आरोप लगे हैं, निष्पक्ष जांच पूरी होने तक उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए।

प्रशासनिक फेरबदल और विधिक कार्रवाई

मामले की संवेदनशीलता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री ने केस को चमोली जिले से पूरी तरह स्थानांतरित करते हुए कड़े कदम उठाए हैं, जिसका पूरा प्रशासनिक विवरण नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट है:

प्रशासनिक / विधिक कदमसरकार द्वारा जारी आधिकारिक आदेश एवं प्रगति
मुख्य जांच अधिकारी (IO)डीआईजी (DIG) यशवंत चौहान को संपूर्ण प्रकरण की जांच सौंपी गई है।
जांच रिपोर्ट की समयसीमा15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत करने के निर्देश।
केस का नया स्थानांतरण क्षेत्रचमोली जिले से हटाकर अब हरिद्वार के एसएसपी नवनीत सिंह घुरलर को विवेचना सौंपी गई है।
विधिक स्टेटस (FIR)दोनों ही पक्षों की शिकायतों के आधार पर पुलिस द्वारा क्रॉस एफआईआर (Cross FIR) दर्ज।

“देवभूमि में हर समुदाय सुरक्षित, सौहार्द हमारी परंपरा” : सीएम धामी

प्रतिनिधिमंडल को पूरी संजीदगी से सुनने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें आश्वस्त किया कि किसी के साथ भी अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा-

“उत्तराखंड देवभूमि है और यहां सदियों से सामाजिक सद्भाव, अटूट भाईचारे और आपसी सौहार्द की गौरवशाली परंपरा रही है। हमारी सरकार राज्य में रह रहे या बाहर से आ रहे किसी भी समुदाय के नागरिक को असुरक्षा अथवा असुविधा का अहसास नहीं होने देगी। दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के निमित्त वे स्वयं पुलिस महानिदेशक (DGP) के साथ उच्च स्तरीय चर्चा कर उचित और विधिक फैसला लेंगे।”

श्री हेमकुंट साहिब यात्रा सुचारू रूप से जारी

मुलाकात के बाद दिल्ली सिख प्रतिनिधिमंडल ने इस बात पर गहरा संतोष व्यक्त किया कि इस संवेदनशील घटना के बावजूद देवभूमि में कानून व्यवस्था सुदृढ़ रही और पवित्र श्री हेमकुंट साहिब यात्रा को एक भी दिन के लिए स्थगित नहीं किया गया। यात्रा पूरी तरह से सुरक्षित और सुचारू रूप से संचालित हो रही है।

प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए त्वरित एवं ठोस आश्वासनों पर पूर्ण संतुष्टि जताई है और उम्मीद व्यक्त की है कि राज्य सरकार अपने वादों को जल्द पूरा कर न्याय दिलाएगी। साथ ही, सिख गुरुद्वारा कमेटी के पदाधिकारियों ने सभी समुदायों और आम जनता से आपस में शांति, भाईचारा और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की पुरजोर अपील की है।

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