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ड्रैगन फ्रूट पर विदेशी माल का दबाव, सीमांचल के किसानों की बढ़ी चिंता

किशनगंज, मालदा और सिलीगुड़ी के फल मंडियों में ड्रैगन फ्रूट की कीमतों में भारी गिरावट। बांग्लादेश से बढ़ती आपूर्ति के कारण स्थानीय किसान परेशान। खर्चीली खेती और घटते मुनाफे की पूरी खबर।

Written byसुबोध कुमार साहसुबोध कुमार साह — edited by कुलदीप सिंह
Jun 16, 2026, 12:20 pm IST
in बिहार
Dragon fruit Farming

प्रतीकात्मक तस्वीर

किशनगंज जिले समेत उत्तर बंगाल के फल बाजारों में इन दिनों विदेशी और स्थानीय कृषि उत्पादों के बीच कड़ा व्यापारिक मुकाबला देखने को मिल रहा है। कभी किसानों के लिए बेहतर मुनाफे वाली फसल माने जाने वाला ड्रैगन फ्रूट अब बाजार में बढ़ती आपूर्ति और गिरते दाम के कारण चिंता का विषय बन गया है।

मालदा, किशनगंज, ठाकुरगंज और सिलीगुड़ी की प्रमुख फल मंडियों में इन दिनों ड्रैगन फ्रूट की आवक काफी बढ़ गई है। बाजार में एक ओर स्थानीय प्रगतिशील किसानों द्वारा आधुनिक तकनीक और जैविक तरीके से तैयार किया गया ताजा ड्रैगन फ्रूट उपलब्ध है, वहीं दूसरी ओर बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर हो रहे उत्पादन के कारण वहां से आने वाली खेप ने बाजार की स्थिति बदल दी है। अधिक आपूर्ति के कारण थोक मंडियों में कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे स्थानीय उत्पादकों की चिंता बढ़ गई है।

सामान्य से अधिक खर्चीली है ड्रैगन फ्रूट की खेती

किसानों के अनुसार ड्रैगन फ्रूट की खेती सामान्य फसलों की तुलना में काफी खर्चीली है। खेत तैयार करने, आरसीसी पिलर लगाने, ड्रिप सिंचाई व्यवस्था विकसित करने और उच्च गुणवत्ता वाले पौधे खरीदने में प्रति एकड़ लाखों रुपये तक का निवेश करना पड़ता है। किसानों को उम्मीद थी कि बेहतर उत्पादन के बाद उन्हें अच्छा मूल्य मिलेगा, लेकिन बाजार में बाहरी आपूर्ति बढ़ने से लागत निकालना भी मुश्किल होता जा रहा है।

बांग्लादेशी माल ने भारतीय किसानों की आय पर किया वार

सीमावर्ती क्षेत्रों में ड्रैगन फ्रूट की व्यावसायिक खेती बढ़ने से बांग्लादेश से आने वाली खेप मालदा की मंडियों के रास्ते किशनगंज, ठाकुरगंज, इस्लामपुर और सिलीगुड़ी तक पहुंच रही है। कम परिवहन लागत और अधिक उपलब्धता के कारण थोक बाजार में इसका सीधा असर स्थानीय उत्पादकों पर पड़ रहा है। हालांकि स्थानीय किसान गुणवत्ता के मामले में अपने उत्पाद को बेहतर बता रहे हैं। उनका कहना है कि खेत से सीधे तोड़ा गया ड्रैगन फ्रूट कुछ ही घंटों में बाजार तक पहुंच जाता है, जिससे इसकी ताजगी और स्वाद बरकरार रहता है। वहीं लंबी दूरी तय कर आने वाले फलों में गुणवत्ता प्रभावित होने की संभावना रहती है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते बाजार दौर में केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। किसानों को अपने उत्पाद की ग्रेडिंग, बेहतर पैकिंग और ब्रांडिंग पर ध्यान देना होगा, ताकि स्थानीय ड्रैगन फ्रूट को प्रीमियम बाजारों और बड़े खरीदारों तक पहुंचाया जा सके।
कृषि बाजार के जानकारों के मुताबिक यदि बाहरी आपूर्ति का दबाव इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले समय में थोक कीमतों में और गिरावट आ सकती है। इससे उपभोक्ताओं को कम कीमत पर ड्रैगन फ्रूट जरूर उपलब्ध होगा, लेकिन सीमांचल में नई उम्मीदों के साथ इस खेती को अपनाने वाले किसानों और उद्यमियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।

Topics: ड्रैगन फ्रूट कीमत किशनगंजबांग्लादेशी ड्रैगन फ्रूटड्रैगन फ्रूट खेती
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