नई दिल्ली। इस समय सोशल मीडिया पर दो घटनाएं काफी वायरल हो रही हैं। एक यूपी की है जहां एक हिंदू लड़की ने मुस्लिम पुरुष पर ऑटो में छेड़छाड़ करने और जांघो को स्पर्श करने का आरोप लगाया है। दूसरी केरल की है जहां एक कट्टरपंथी सोच वाले मुस्लिम ने अपने जिम में शरीयत कानून को लागू कर दिया है। ये दोनों ही घटनाएं बताती हैं कि जिहादी मानसिकता किस तरह से पनप रही हैं। ऑटो में जिस हिंदू लड़की से छेड़छाड़ हुई उसने बताया था कि वो इलाका मुस्लिम था और वो मुस्लिम पुरुष अपने हाथों को उसके जांघों तक ले जाने के बाद उसको ही बैठने की तमीज सीखाने लगा। दूसरे मामले में अब केरल के पुथुनगरम स्थित जिम का मालिक नवाज़ कह रहा है कि उसके मन में किसी अन्य धर्म के प्रति नफरत नहीं है। लेकिन जिम में चलेगा शरीयत कानून ही। हिजाब में एक्सरसाइज होगी और स्त्री-पुरुष इस्लामिक नियमों का पालन करेंगे।
जिम को बना दिया इस्लामिक कट्टरता का पाठ पढाने वाला मदरसा
अगर किसी जिम को कट्टरपंथी विचारों का केंद्र बना दिया जाए तो क्या ये जिहादी सोच नहीं है? फिटनेस सेंटर या जिम ऐसी जगह होती है जहां स्त्री-पुरुष चाहे वो किसी भी धर्म व मजहब से हों, स्वस्थ रहने के लिए एक्सरसाइज करते हैं। लेकिन जब उस जिम पर शर्तें लगा दी जाती हैं कि यहां एक्सरसाइज करने वाली महिलाएं सिर्फ बुर्का पहनकर आएंगी और पुरुष इस्लामिक कपड़े तो वो जिम, जिम नहीं रह जाता बल्कि इस्लामिक कट्टरता का पाठ पढ़ाने वाला मदरसा बन जाता है। वहां न संगीत होता, न गीत और न सौहार्द। वहां सिर्फ होती है कट्टरता… नफरत और जिहादी मानसिकता।
क्या जिम इस्लाम के अनुकूल चलाने की जगह है?
जिम मजहब की शिक्षा देने का कोई केंद्र नहीं है। जिम वो जगह है जहां स्त्री और पुरुष शरीर को स्वस्थ रखने के लिए व्यायाम करते हैं। लेकिन नवाज मुथु टी जैसे इस्लामिक कट्टरपंथी सोच ने उस जगह को भी दूसरे धर्मों के प्रति नफरत फैलाने का केंद्र बना दिया। हालांकि विवाद बढ़ने के बाद नवाज ने अपना पहले वाला वीडियो हटा लिया है। और दूसरा वीडियो जारी किया है जिसमें उसने सफाई दी लेकिन यह साफ किया कि उसका जिम इस्लाम के नियमों के हिसाब से ही चलेगा।
ऑनली फॉर मुस्लिम जिम नहीं… जिहादी सोच है ये
नवाज मुथु टी का कहना है कि बहुत से मुसलमान इस्लामी सिद्धांतों के अनुसार ज़िंदगी जीते हैं। वे संगीत नहीं सुनते। उनके लिए कोई जिम नहीं है। जब आप किसी जिम में जाते हैं तो संगीत बंद करना मुमकिन नहीं होता। कुछ ऐसी औरतें भी हैं जिन्हें मिली-जुली जगहों पर कसरत करने में असहजता महसूस होती है। ये वे लोग हैं जिन्हें अब तक जिम जाने का मौका नहीं मिल पाया है। इसलिए उसने अपने जिम में शरीयत कानून लगा किया। जब उससे सवाल किया गया कि अगर उसके जिम में हिंदू लोग आते हैं तो? क्या जिम के ऐसे नियम हिंदू लोगों को जिम में आने से नहीं रोकेंगे? यहां पर कट्टरपंथी सोच से संचालित नवाज कहता है कि जिम की सदस्यता सभी के लिए खुली है। दरअसल ये ऑनली फॉर मुस्लिम जिम नहीं बल्कि जिहादी सोच है।











