पाकिस्तानी कहीं भी रहें, वो ऐसी हरकतें करते हैं कि विवाद खड़ा होना स्वाभाविक है। ताजा मामला जापान के साइतामा प्रांत के कावागोए शहर का है, जहां पाकिस्तानियों ने अवैध मस्जिद बना दी। इसके लिए जापान सरकार ने कोई भी अनुमति नहीं ली। बड़ी बात ये है कि इसके उद्घाटन में पाकिस्तान के राजदूत अब्दुल हमीद भी शामिल हुए थे, जिसके बाद पाकिस्तानी दूतावास को सफाई देनी पड़ी।
क्या है पूरा मामला?
यह मस्जिद करीब 4,500 वर्ग मीटर जमीन पर बनी है। इलाका “पहाड़ी वन भूमि” के रूप में रिजर्व है और “अर्बनाइजेशन कंट्रोल एरिया” यानी नियंत्रित शहरी विकास क्षेत्र में आता है। यहां बड़े निर्माण के लिए स्थानीय प्रशासन की खास मंजूरी जरूरी होती है। जापानी अधिकारियों का कहना है कि मस्जिद बिना इन अनुमतियों के बनाई गई। निर्माण पर रोक के बावजूद काम जारी रहा। इस साल 3 अप्रैल 2026 को इसका उद्घाटन हुआ, जिसमें पाकिस्तान के राजदूत अब्दुल हमीद शामिल हुए।
राजदूत की भूमिका
पाकिस्तानी दूतावास ने 31 मई को बयान जारी कर कहा कि राजदूत ने निमंत्रण तभी स्वीकार किया जब आयोजकों ने उन्हें बताया कि सभी जरूरी अनुमति जापानी कानून के मुताबिक ले लिए गए हैं। दूतावास ने साफ किया कि वह किसी भी ऐसी परियोजना से जुड़ा नहीं है जो स्थानीय नियमों का पालन न करती हो। दूतावास ने जापान में रह रहे पाकिस्तानियों से अपील की कि वे स्थानीय कानूनों का पूरा पालन करें।
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स्थानीय पाकिस्तानी समुदाय की प्रतिक्रिया
याशियो मस्जिद के प्रतिनिधि, 62 साल के पाकिस्तानी नागरिक शकील शेख मोहम्मद ने इस परियोजना की आलोचना की। उन्होंने कहा कि बिना अनुमति मस्जिद बनाना सही नहीं है। अच्छे माहौल के लिए स्थानीय लोगों के साथ अच्छे संबंध जरूरी हैं।
जापान ने इसे बताया अवैध
स्थानीय प्रशासन ने मस्जिद को अवैध बताया है। कावागोए के मेयर ने कहा कि नियम सबके लिए बराबर होने चाहिए। कुछ रिपोर्ट्स में मस्जिद को हटाने या तोड़ने की बात भी कही गई है। जापान में निर्माण नियम काफी सख्त हैं, खासकर संरक्षित इलाकों में। मामला सामने आने के बाद जापान में पाकिस्तानी समुदाय और धार्मिक स्थलों के निर्माण को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। पाकिस्तानी दूतावास ने स्पष्ट किया कि वे जापानी कानूनों का सम्मान करते हैं और किसी गलत काम से जुड़े नहीं हैं।











