मध्य प्रदेश में धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए देश के सबसे कड़े कानूनों में से एक, मध्य प्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 है। इसके बावजूद, समय-समय पर ऐसे मामले सामने आते रहे हैं, जिनमें प्रेम संबंध, शादी के वादे, पहचान छिपाने, ब्लैकमेल और धर्मांतरण के लिए कथित दबाव के आरोप शामिल हैं।दरअसल, भोपाल के चर्चित नाबालिग छात्रा दुष्कर्म और कथित ‘लव-जिहाद’ मामले में पुलिस द्वारा कोर्ट में चालान पेश किए जाने के बाद एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर सख्त कानून के बावजूद ऐसे प्रयास क्यों जारी हैं? ताजा मामले में पुलिस चालान में जो तथ्य सामने आए हैं, उन्होंने कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है।
उल्लेखनीय है कि राजधानी भोपाल के कोहेफिजा थाना क्षेत्र में वीआईपी रोड स्थित होटल इम्पीरियल सबरे के सामने बड़े तालाब किनारे 11वीं कक्षा की एक नाबालिग छात्रा से जुड़े कथित ‘लव-जिहाद’ और दुष्कर्म मामले में पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चालान प्रस्तुत कर दिया है। पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी औसाफ खान और उसके सहयोगी माज के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया था। चालान में दावा किया गया है कि आरोपी ने बड़े तालाब के किनारे अलग-अलग अवसरों पर पीड़िता के साथ छह बार दुष्कर्म किया। पुलिस जांच में तीन अलग-अलग कारों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है। इनमें एक थार वाहन और एक सियाज कार दूसरे आरोपी माज से जुड़ी बताई गई है, जबकि तीसरी होंडा सिटी कार आरोपी अपने रिश्तेदार से लेकर आया था। जांच अधिकारियों के अनुसार पहली घटना 5 जुलाई 2025 को हुई थी, जिसके बाद कथित रूप से पीड़िता को वीडियो वायरल करने की धमकी देकर लगातार ब्लैकमेल किया जाता रहा।
वीडियो बनाकर ब्लैकमेल, फिर धर्मांतरण का दबाव
पुलिस चालान के अनुसार पीड़िता ने बताया कि 5 जुलाई 2025 को औसाफ माज की थार गाड़ी में उसके साथ दुष्कर्म करता रहा, उस समय माज वीडियो बना रहा था। इसके बाद यही वीडियो कथित रूप से ब्लैकमेलिंग का माध्यम बना। क्योंकि औसाफ हर बार पीड़िता को वीडियो वायरल करने की धमकी देकर अपने साथ बड़े तालाब के किनारे ले जाकर दुष्कर्म करता था। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पीड़िता पर धर्म परिवर्तन, इस्लाम में कन्वर्ट करने के लिए लगातार दबाव बनाता था। इसके साथ ही पुलिस द्वारा प्रस्तुत चालान में दावा किया गया है कि आरोपी उसे बुर्का पहनने और अपनी धार्मिक पहचान बदलने के लिए कहता था।
हथियार दिखाकर डराने के आरोप
पुलिस जांच में एक और गंभीर दावा सामने आया है। चालान के अनुसार आरोपी अपनी कार में बंदूक और तलवार रखता था। आरोप है कि जब पीड़िता ने उसके प्रस्ताव को अस्वीकार किया और वाहन से उतरने का प्रयास किया, तब उसे हथियार दिखाकर डराया गया। जांच अधिकारियों का कहना है कि भय और दबाव का वातावरण बनाकर अपराध को अंजाम दिया गया। पुलिस के अनुसार मामले की जानकारी मिलने के बाद आरोपी माज अजमेर भाग गया था। पूछताछ में उसने कथित रूप से स्वीकार किया कि उसे जब अपने नाम के मामले में आने की सूचना मिली, तो उसने बचने का प्रयास किया। जांच में यह भी सामने आया कि भोपाल लौटते समय उसने उज्जैन रेलवे स्टेशन पर अपना मोबाइल फोन तोड़कर फेंक दिया था।
पुलिस विभाग पर भी उठे सवाल
मामले में पुलिस पर भी सवाल उठे। जांच के दौरान कोहेफिजा थाने के तत्कालीन हेड कांस्टेबल ज्ञानेंद्र द्विवेदी पर भी आरोपी की मदद करने के आरोप लगे। पुलिस जांच में आरोप सामने आए कि वह आरोपी को थाने की गतिविधियों की जानकारी देता था और उसके साथ कथित रूप से समझौते की कोशिश कर रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित पुलिसकर्मी को डीसीपी जोन-3 ने एफआईआर दर्ज होने के कुछ समय बाद निलंबित कर दिया।
धर्म स्वातंत्र्य कानून के बावजूद क्यों जारी हैं ऐसे आरोप?
मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2021 में धर्मांतरण के मामलों पर रोक लगाने के उद्देश्य से धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम लागू किया था। कानून में छल, प्रलोभन, दबाव, विवाह या पहचान छिपाकर कराए गए धर्मांतरण के लिए कठोर दंड का प्रावधान है। इसके बावजूद समय-समय पर ऐसे अनेक मामले सामने आ रहे हैं। भोपाल का यह मामला कोई अकेला उदाहरण नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से लगातार इस्लामिक लोगों द्वारा कथित धर्मांतरण, पहचान छिपाकर संबंध बनाने और विवाह के नाम पर दबाव डालने के आरोपों वाले कई मामले सामने आए हैं। भोपाल में पहले भी धर्मांतरण और पहचान छिपाकर संबंध बनाने के आरोपों से जुड़े प्रकरण दर्ज हो चुके हैं, जिनमें पुलिस ने धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम के तहत कार्रवाई की थी। इंदौर में भी कई मामलों में युवतियों द्वारा पहचान छिपाने, विवाह का झांसा देने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने की शिकायतें दर्ज कराई गईं। कुछ मामलों में पुलिस ने विशेष जांच दल गठित कर जांच की थी। उज्जैन, जबलपुर, खंडवा, रतलाम और सागर जैसे जिलों में भी समय-समय पर धर्मांतरण संबंधी विवाद और एफआईआर दर्ज होने की घटनाएं सामने आई हैं। कई मामलों में जांच के बाद आरोपपत्र दाखिल हुए, जबकि कुछ मामलों में न्यायालयों ने साक्ष्यों के आधार पर अलग-अलग निर्णय दिए।














