ममता बनर्जी नीत अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस पार्टी में विरोध का बिगुल तेज हो रहा है। पार्टी के कई सांसद अलग रुख अख्यितार करने लगे हैं। खबरों के मुताबिक पार्टी के एक दर्जन से अधिक सांसदों को अब पार्टी नेतृत्व में विश्वास नहीं रहा और अब वो दूसरा रास्ता ढूंढ रहे हैं।
तृणमूल कांग्रेस और बंगाल की राजनीति में हलचल तेज होती जा रही है। ममता बनर्जी और पार्टी के कई विश्वस्त सांसद, काकोली घोष दस्तीदार और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने पार्टी और ममता विरोधी सुर अपना लिए हैं। बारासात लोकसभा सीट से चार बार की सांसद काकोली घोष दस्तीदार सहित तृणमूल कांग्रेस पार्टी के छह विधायक मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा कल्याणी में बुलाई गई प्रशासनिक बैठक में शामिल हुए। यह स्पष्ट दिखाता है कि अब तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी के नेतृत्व में इन नेताओं का भरोसा नहीं रहा। बुधवार को काकोली घोष ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया।
ममता बनर्जी के निशाने पर थीं काकोली घोष
काकोली घोष ममता बनर्जी के निशाने पर थीं और विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद उन्हें लोकसभा के मुख्य सचेतक पद से हटाया गया था। उन्होंने इसके प्रतिरोध स्वरूप बारासात जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया। इसके बाद राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने भी पार्टी के खिलाफ आवाज़ बुलंद करते हुए तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए एक पोस्ट किया कि बंगाल के लोगों ने असहनीय अराजकता का अंत कर दिया है। आरजी कर अस्पताल की महिला चिकित्सक से दुष्कर्म और हत्या की घटना के बाद हुए जन आंदोलन का भी जिक्र किया।
तृणमूल के कई सांसद भाजपा में जाना चाहते हैं
खबरों के मुताबिक तृणमूल के कई सांसद भी भाजपा में शामिल होना चाहते हैं। तृणमूल कांग्रेस के दो विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा का विधानसभा अध्यक्ष से मिलने उनके कक्ष में पहुंचना भी अटकलों को और हवा दे रहा है। ऋतब्रत ने मुख्यमंत्री अधिकारी की तारीफ भी की है।
ज्ञातत्व हो कि ममता बनर्जी ने भी विगत विधानसभा चुनाव में भाजपा के 12 विधायकों को अपने पार्टी में सत्ता की धमक के कारण शामिल करवा लिया था।मगर भाजपा अपने पूरे देश और पुराने राजनीतिक इतिहास को देखते हुए इस प्रकार के कोई भी कदम लेना नहीं चाहती हैं।
फलता चुनाव के मायने
यह भी चर्चा है कि तृणमूल के सांसद माकपा की ओर भी रुख कर सकते हैं। फलता चुनाव में यह स्पष्ट हो गया है कि भाजपा की धाक यहां पूरी तरह से जम चुकी है। भाजपा ने पश्चिम बंगाल में और त्रिपुरा में माकपा को नेस्तनाबूद करके यह स्पष्ट कर दिया है कि न सिर्फ तृणमूल और समाजवादी पार्टी जैसे क्षेत्रीय दलों बल्कि माकपा जैसी कैडर आधारित पार्टी को भी धराशायी कर सकती है।

















